दुर्गा दत्त पाठक की रिपोर्ट :-
रेल सुरक्षा बल के जवानो की रेलवे की तानाशाही, इरकॉन की लापरवाही और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से नरकटियागंज के रेल यात्री और आम जनता तंग ओ तबाह हैI ऐसे में रेल यात्रियों और उनके परिजन रेलवे सुरक्षा बल की कारगुजारियों से सकते में हैI इस बावत रेल सुरक्षाबल के निरीक्षक बी के तिवारी अपने खासम खास नरकटियागंज के रिपोर्टरों को बयान दिया, लेकिन बेतिया कार्यालय से पूछे जाने पर मामले में कुछ नही बताते हुए अपनी व्यस्तता का हवाला दिया I उल्लेखनीय है कि नरकटियागंज के प्रबुद्धजनो में एक सामाजिक व् राजनीतिक कार्यकर्ता अंकित तिवारी को रिसीव करने पहुंचे उनके परिजनों को रेल सुरक्षा बल के जवानो ने धमकाया और रिश्वत की मांग कीI अंकित तिवारी ने इस बावत रेल मंत्रालय को प्रेषित अपने पत्र में उन्होंने कहा है कि वे बगहा से सत्याग्रह एक्सप्रेस द्वारा नरकटियागंज लगभग 4.30 बजे पहुचे और वहाँ से लगभग 7 मिनट में वहाँ पहुंचे जहाँ उन्हें लेने पहुंचे उनके परिजन को शराब के नशे में फंसाने की साजिस की गईI अंकित तिवारी के अनुसार उनके बड़े भईया के साले उन्हें रिसीव करने आये तो आरपीएफ के पुलिसकर्मियों का उनसे विवाद हुआ, जिसके कारण सुरक्षाबल के जवानो की अवैध उगाही नही हो सकी, इसी कारण उन्होंने शराब के मामले में उनके साले को फंसाने का प्रयास किया । उसके बाद वे खुद वहाँ पहुंचे तो “रेल सुरक्षाबल के जवानो का अवैध उगाही का प्रयास किया जाता पाया, जिसका विरोध श्री तिवारी ने किया और उन्हें रिश्वत नहीं मिली हताश व निराश रेसुब के जवानों ने उन्हें भी फंसाने का प्रयास किया”I अब रेसुब और अंकित तिवारी के प्रकरण में रेसुब के निरीक्षक श्री तिवारी का बयान भी तथ्य परक प्रतीत नही होताI ऐसे में आर पी एफ के जवान दीपक कुमार, चितरंजन सिंह और अन्य जवानो के अवैध उगाही एवं शराब के केस में फंसाने वाले मामले में उच्चस्तरीय जाँच की आवश्यकता है, जिससे रेलवे के यात्री सुरक्षा और यात्रीहितों की रक्षा हो सके तथा उपर्युक्त मामले को छुपाने प्रयास पर लगाम लग सके ।