🚩दानवीर भामाशाह क चरित्र आज भी प्रासंगिक एवं अनुकरणीय है: रवींद्र
*सीपीएस के शिक्षकों व विद्यार्थियों ने श्रद्धा पूर्वक याद किया मेवाड़ी प्रधानमंत्री को।
🇦🇱परमार अखिलेश राणा
🤺”भामाशाह नहीं होते तो कोई सगे व खास नहीं होते।
जलालाबाद होता मेवाड़ी इतिहास नहीं होते।
हिन्दुआ सूर्य के अश्वों के घास दिया एहसास है अब तक,
झीलों का शहर होता मगर;छतरी-रानीवास नहीं होते।”इसी अंदाज में वरिष्ठ पत्रकार परमार अखिलेश राणा ने दानवीर भामाशाह की जयंती कार्यक्रम का श्री गणेश किया। सेंट्रल पब्लिक स्कूल पुकार काम्पलेक्स के भामाशाह सभागार में आयोजित दानवीर भामाशाह की जयंती पर श्री परमार ने कहा कि त्याग व भोग दो परस्पर विरोधी विचारधाएं हर काल खंड में विद्यमान रही हैं। मुगलकालीन भारत में ब्रह्ममण तुलसी दास क्षत्रिय महाराणा प्रताप सिंह वैश्य भामाशाह व मुस्लिम हाकिम खां शूर त्याग व बलिदान के प्रतीक व प्रेरणा स्रोत हैं, वहीं पंडित बीरबर राजामानसिंह वैश्य टोडरमल भोगवादी विचार धारा के पोषक रहे हैं। आज कहा भारत उन्हीं त्यागी राष्ट्रवादी महापुरुषों के आदर्श पर टिका हुआ है। मुख्य अतिथि वरिष्ठ भाजपा नेता रवींद्र कुमार सिंह ने कहा कि दानवीर भामाशाह के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। जिन्होंने अपने संचित धन २०,०००स्वर्ण मुद्राएं व ढाई लाख रुपए मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए महाराणा प्रताप सिंह को सौंप दी। एकलिंग के दीवान महाराणा ने मेवाड़ को स्वतंत्र कराकर को भामाशाह को प्रधानमंत्री कार्यालय पर व मेवाड़ रक्षक की उपाधि प्रदान की। शिक्षक राहुल रंजन के सफल संचालन में सचिव विवेक पूर्व नगर मंडल भाजपा अध्यक्ष मोहन शंकर प्रसाद, उप प्राचार्य विकास कुमार, कुमारी रजनी, बद्रुलहक, मनीष शंकर, सुमीत कौशिक, धनंजय मिश्रा, नौशाद हुसैन, आदि ने भामाशाह के व्यक्तित्व विकास कृतित्व पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर विद्यालय निदेशक कमलेश्वर प्रसाद सिंह को भावभीनी विदाई दी गई।





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