टिकट का टीका के लिए एनडीए में घमासान तेज, सारण में भी संशय बरकरार

छपरा:लोकसभा आम चुनाव 2019 की घोषणा के बाद बिहार भाजपा-जदयू के बीच आपसी तालमेल के तहत 17-17 सीटों पर चुनाव लड़ने की बात सामने आ रही हैं लेकिन समझौता ने टिकट का टीका के लिए घमासान मचाये हुए है. जबकि लोजपा ने सारण प्रमंडल की किसी भी सीट पर कोई दावेदारी नहीं ठोकी हैं.
सीटों को लेकर एनडीए के घटक दलों के बीच संशय बरकरार
एनडीए के घटक दलों के बीच आपसी तालमेल के तहत सीटों का बंटवारा लगभग तय माना जा रहा हैं. लेकिन कौन कहा से प्रत्याशी होगा इसकी आधिकारिक पुष्टि नही की गई हैं.

सारण की चारों सीट पर भाजपा का हैं कब्जा
सारण प्रमंडल की चार सीटें सारण, महाराजगंज, सिवान और गोपालगंज के भी सियासी पारा परवान चढ़ा हुआ है. लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही अब टिकट वितरण पर मंथन शुरू हो गया है.सबसे पहलें सारण लोकसभा क्षेत्र की बात करें जहां से बीजेपी के कद्दावर नेताओं में शुमार, पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता व सारण से तीन बार सांसद व कई बार केंद्र में मंत्री रह चुके निवर्तमान सांसद राजीव प्रताप रूडी का टिकट लगभग तय माना है रहा है. जिन्होनें 2014 कें लोकसभा चुनाव के दौरान बिहार कें पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और बिहार विधान परिषद कें उपसभापति सलीम परवेज को पटखनी दे चुनाव जीते थे.
भाजपा अपने राष्ट्रीय प्रवक्ताओं को उतार सकती हैं चुनावी दंगल में
सूत्रों की बातों पर यकीन करें तो भारतीय जनता पार्टी इस बार के चुनाव में पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ताओं को भी चुनावी दंगल में उतार सकती है. इनमें मुख्य रूप से भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव प्रताप रूडी, शाहनवाज हुसैन,और संबित पात्रा जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं जिनलोगों पर भाजपा के शीर्षस्थ नेता बैठक कर नामों की सूची तैयार करने में लगे हुए है जबकि सिवान संसदीय क्षेत्र से एक बार फिर ओमप्रकाश यादव पर ही भाजपा दांव लगाना चाहती है.
सिवान की सीट चाहे किसी के खाते में जाये लेकिन लड़ेंगे ओमप्रकाश यादव
खबर तो यह भी हैं कि सिवान का सीट भाजपा के खाता में हो या फिर जदयू के खाते में लेकिन उम्मीदवारी होगी तो केवल ओमप्रकाश यादव की.
इसके पिछे एक मजबूत कारण यह भी बताया जा रहा हैं कि राजद के परम्परागत वोटों कें समीकरण को दरकाने के लिए ओमप्रकाश यादव ही एनडीए कें उपयुक्त उम्मीदवार हो सकते हैं. इसके लिए श्री यादव को जदयू के सिम्बल पर भी चुनावी समर में उतारने कें लिए अंतिम समय में एनडीए ले सकता हैं निर्णय.जब अभी सिवान पर पेंच फ़सा हैं तों इसकी लपट महाराजगंज और गोपालगंज की सीटों पर भी तपिश बढ़ना लाजिमी हो गया हैं क्योंकि इन दोनों सीटों पर जदयू ने दावा ठोक रखा है.
लालू के गृह जिले गोपालगंज से कौन लड़ेगा चुनाव सस्पेंस बरकरार
यहां तक अटकलों का बाजार गर्म है कि जदयू ने गोपालगंज सीट पर उम्मीदवार के लिए भी मंथन का दौर शुरू हो गया है जबकि गोपालगंज की सीट से 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा कें जनक राम निर्वाचित हुए थे इसलिए भाजपा को अपने जीते हुए प्रत्याशी व निवर्तमान सांसदों का टिकट काटना भी कष्टदायी साबित हो सकता हैं.
वहीं महाराजगंज सीट को जदयू दूसरी वरीयता सूची में रखा है, इसलिए भाजपा के लोगों को पुरा विश्वास हैं कि पार्टी जदयू को राज्य के अन्य क्षेत्रों में अधिक सीटें देकर चितौड़गढ़ कहे जाने वाले महाराजगंज को अपनी झोली में ही रखना चाहेगा.
चितौड़गढ़ कहे जाने वाले महराजगंज के लिए अभी भी बना हुआ हैं सस्पेंस
जब महाराजगंज सीट भाजपा की झोली में रहेगी तों निवर्तमान सांसद जनार्दन सिंह सीग्रीवाल को टिकट का टीका लगने की प्रबल संभवना बन रही हैं. इसके पिछे कारण यह भी बताया जा रहा हैं कि महाराजगंज से पिछले कई चुनावों में जदयू या जदयू समर्थित प्रत्याशियों को इस सीट पर विजय नही मिल पायी हैं. यहां तक की 2014 कें लोकसभा चुनाव में बिहार की राजनीति कें कद्दावर नेता माने जाने वाले प्रभुनाथ सिंह को निवर्तमान सांसद जनार्दन सिंह सीग्रीवाल ने हरा भाजपा का विजय पताका लहराया था.
जनता का भरोसा जनार्दन पर
वहीं भाजपा और जदयू दोनों दलों को स्मरण होगा की निवर्तमान सांसद का भाजपा-समता पार्टी के बीच वर्ष 2000 में समझौता के तहत जलालपुर विधानसभा का टिकट समता पार्टी कें मिथिलेश कुमार सिंह को देकर श्री सीग्रीवाल को टिकट से वंचित कर दिया गया था, तों जनार्दन सिंह सीग्रीवाल ने निर्दलीय चुनाव लड़ समता पार्टी व राजद के प्रत्याशी को पराजित कर चुनावी समर को पार कर विधानसभा पहुंचे थे इसलिए श्री सीग्रीवाल की दावेदारी मजबूत दिख रही हैं.फिलहाल जब तक पार्टियां अपने अधिकृत प्रत्याशियों के माथे टिकट का टीका लगाने की घोषणा नहीं करती हैं तब तक अटकलों का बाजार और संभावनाओं में कयास लगाएं जाते रहेंगे..




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