जानिए…सुशासन में एसपी और एमपी नामक नए पदधारक कैसे बदल रहे हैं महिला सशक्तिकरण की परिभाषा
🙏🏼🙏🏼गुस्ताखी माफ🙏🏼🙏🏼
✍🏻कुमार विपेन्द्र

सीवान :- एमपी,एसपी,पीपीपी,पीपी और डब्ल्यूएसपी ये सुशासन की सरकार के नये पदधारक हैं।अजी चौंक गए का..?धत तेरे की..!आप चौंकिए मत…यहां हम सांसद और पुलिस कप्तान की बात बिल्कुल नहीं कर रहे हैं।ये दोनों पद तो बहुत पुराने हैं।
मगर इन सभी नाम से नये भी पद हैं…एमपी माने मुखिया पति,एसपी माने सरपंच पति,पीपीपी माने प्रखंड प्रमुख पति,पीपी का मतलब पंच पति तथा डब्ल्यूएसपी माने वार्ड सदस्य पति।यकीन मानिए…इन नये पदधारकों ने महिला सशक्तीकरण की परिभाषा ही बदल दी है।ये नये पदधारक अपने आप को ही वास्तविक जनप्रतिनिधि समझ बैठे हैं।सरकार का रवैया भी इनके प्रति सहयोगात्मक है।तभी तो ये निधड़क सरकारी बैठकों में भाग लेते हैं और कभी कभार अपनी कथित दबंगई भी दिखाते हैं।कई पंचायतों के ये एमपी और एसपी तो ऐसे हैं जो कथित आम सभा भी कागजों में करा लेते हैं।बताया जाता है कि चेक और पहचान संबधी कागजातों तक पर भी…….।लोगों का कहना है कि ऐसा नहीं है कि अधिकारियों-कर्मचारियों के संज्ञान में ये बात नहीं है।सभी जानते हैं और जानते-बूझते ऐसे अवैध कार्यों का आंख मूंद कर समर्थन करते हैं।
अब सवाल उठता है कि आखिर सुशासन की सरकार का महिला सशक्तीकरण कहां है ? महिलाओं के लिए पद को आरक्षित करने तक ही सशक्तिकरण का दावा क्यों किया जाता है ? संसद में महिला आरक्षण का मांग करने वाले महिला हितैषियों को इस मामले पर सांप क्यों सूंघ जाता है ? ये सभी यक्ष प्रश्न हैं।जिसका जवाब आना शेष है।इंतजार कीजिये।




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