जयप्रभा सेतु पर 14 फरवरी से बन्द हो जाएगा भारी वाहनों का परिचालन

मांझी(सारण)। यूपी बिहार को सड़क मार्ग से जोड़ने वाला अति महत्वपूर्ण जयप्रभा सेतु पर चौदह फरवरी से बन्द हो जाएगा भारी वाहनों का परिचालन। मालूम हो कि सेतु की जर्जर हालत तथा दो गार्डर के क्षतिग्रस्त होने के बाद एन एच विभाग ने सेतु के जीर्णोद्धार के लिए 14 फरवरी से कार्य प्रारम्भ करने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार ने सेतु की मरम्मति के लिए दो करोड़ रुपये सहित गाजीपुर।यूपी। से मांझी घाट तक की सड़क मरम्मति के लिए 15 करोड़ रुपये स्वीकृत कर दी है। टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। बताते चलें कि जयप्रभा सेतु के क्षतिग्रस्त होने का मुद्दा ।अनुभव जिंदगी का। नामक सोशल मीडिया ग्रुप ने उठाया था। तथा इस सम्बंध में प्रशासन पर दबाव बनाने के उद्देश्य से ग्रुप के सदस्यों ने स्थानीय बलिया मोड़ पर धरना भी आयोजित किया था। बाद में ग्रुप के सदस्यों के आग्रह पर सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल ने इस मुददे को लोकसभा में भी उठाया था। सेतु की मरम्मति की सूचना से आसपास के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई है। कई लोगों ने बताया कि सेतु की जर्जर स्थिति के चलते आये दिन यात्री दुर्घटना के शिकार हो रहे हैं। कई लोग दुर्घटना में अपनी जान भी गंवा बैठे हैं। उधर गार्डर के क्षतिग्रस्त होने के बावजूद ओवरलोडेड भारी वाहनों के परिचालन जारी रहने के कारण सेतु के ध्वस्त होने की आशंका से लोग भयभीत थे।
उत्तरप्रदेश सेतु निर्माण निगम द्वारा सेतु की मरम्मति कराये जाने की अवधि तक भारी वाहनों का परिचालन बन्द होने के कारण दोनों प्रदेशों के ब्यवसाय पर बिपरीत असर पड़ेगा। खासकर बिहार का लाल बालू इस रास्ते अब यूपी नही जा सकेगा। भारी वाहन अब मउ गोरखपुर मार्ग पर स्थित दोहरीघाट पुल से पार कर गोपालगंज व सिवान होकर सारण तक आ सकेंगे। हालांकि छोटे वाहनों का परिचालन जारी रहने से लोगों को आंशिक राहत मिलेगी। ज्ञातब्य है कि सरयू नदी पर बने भागलपुर।देवरिया। तथा बक्सर के समीप गंगा नदी पर बने सड़क पुल के क्षतिग्रस्त होने के कारण जयप्रभा सेतु पर भारी वाहनों का जबरदस्त दबाव था। यही वजह है कि महज बीस वर्षों में सेतु क्षतिग्रस्त होकर रह गया।
36 खम्भों वाले इस सेतु का निर्माण पूर्व प्रधानमंत्री स्व चन्द्रशेखर के विशेष प्रयास के बाद बना था।




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