बुलबुल दंगल प्रतियोगिता के फाइनल विजेता बने चुन्नू अंसारी

मकर संक्रांति पर यहां होता है अनोखा दंगल, जहां आखड़े में इंसान नहीं, होती है बुलबुल

विजेता टीम को मिला एक साइकिल तथा पच्चीस सौ का नगद इनाम

गुठनी(सिवान)
गुठनी में मकरसंक्रांति के मौके पर अनोखा दंगल देखने को मिला। ये दंगल इंसानों के बीच नहीं बल्की बुलबुल पंछी के बीच खेला गया। पिछले कई बर्षो से मकर संक्रांति के मौके पर गुठनी के पूर्व प्रमुख अवधेश प्रसाद गुप्ता के हाता में बुलबुल के बीच दंगल प्रतियोगिता होता है। जिसे देखने के लिए गुठनी प्रखंड के दर्जनों गांवों से सैंकड़ों लोग पहुंचते हैं। इसी क्रम में बुधवार को विशाल बुल बुल दंगल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।इस दंगल प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए गुठनी निवासी आफताब आलम, अमर कसेरा, राजू अंसारी, चुन्नू अंसारी आदि ने अपने-अपने बुलबुल पक्षीयो को लेकर शामिल हुए थे। जहां बुलबुल पंछियों का दंगल देखने के लिए भारी सख्या में लोगों की भीड़ पहुंची। बता दें कि बुलबुल पंछियों के बीच इस दंगल के लिए कई महीनों से तैयारी की जाती है। जिसके लिए मेहनत और धन दोनों खर्च होते हैं। दिलचस्प ये है कि प्रतियोगिता में विजयी बुलबुलों के मालिक को इनाम मिलता है वही हारे हुए बुलबुलों को बंधन से रिहा कर दिया जाता है।

होती है विशेष तैयारी

मकर संक्रांति (खिचड़ी) के दिन होने वाले ‘बुलबुल दंगल’ के लिए विशेष तैयारी की जाती है। दंगल के लिए एक महीने पहले लड़ाई के लिए जंगल से पकड़कर या बहेलियों से खरीदकर बुलबुल लाया जाता है और उन्हें मैदान में उतारने से पहले इनको खिला-पिलाकर मजबूत बनाया जाता है। बुलबुल को लड़ाने वाले इसे काफी पौष्टिक खाना खिलाते हैं। लड़ाई के मैदान में अपने पठ्ठे की जीत को सुनिश्चित करने के लिए एक महीने पहले से इनका खूब ख्याल रखा जाता है।

कैसे होती है बुलबुल पक्षी की लड़ाई की तैयारी

मकर संक्रांति के दिन होने वाले विशेष दंगल से पहले बुलबुल पहलवानों की कड़ी परीक्षा होती है। इसके लिए इन लड़ाके बुलबुलों को छोटे-छोटे दंगल से होकर इम्तिहान पास करना पड़ता है। बुलबुल मालिक आफताब आलम, चुन्नू अंसारी, अमर कसेरा, राजू अंसारी आदि का कहना है कि फाइनल दंगल में जीतने वाले बुलबुल को विशेष इनाम से सम्मानित किया जाता है। इस दौरान इन लड़ाके बुलबुलों के साथ कोई ज्यादती नहीं की जाती है। दंगल के बाद इन पठ्ठों को वापस जंगल में उड़ा दिया जाता है।

तोखी होती है सबसे लड़ाकू प्रजाति

बुलबुल के मालिक के अनुसार बाजार में कई प्रजातियों के बुलबुल बिकते हैं, जिसमें तोखी, डोमा, बेर्रा मुख्य प्रजातियां खास हैं। इनमें सबसे लड़ाकू प्रजाति तोखी होती है।

बुलबुल दंगल का धार्मिक महत्व

मकर संक्रांति पर बुलबुलों की लड़ाई केवल मनोरंजन मात्र नहीं है। हिन्दू धर्म में ‘बुलबुल दंगल’ का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इस लड़ाई की शुरुआत भगवान विष्णु के समय हुई थी। हिन्दू धर्म के अनुसार विष्णु परमेश्वर के तीन मुख्य रूपों में से एक रूप हैं। पुराणों में त्रिमूर्ति विष्णु को विश्व का पालनहार कहा गया है। बुलबुल की लड़ाई सदियों पुरानी प्रथा है और भगवान विष्णु की पूजा बुलबुल की लड़ाई से शुरू होती है।