
सीवान।आप अपने घर में लाफिंग बुद्धा रखते हैं या नहीं। रखते हैं तो भी और नहीं रखते तो भी आपको असली लाफिंग बुद्धा को एकबार जरुर देख लेना चाहिए। जी हाँ, मैं उस लाफिंग बुद्धा की बात कर रहा हूँ, जो जिन्दा है और आज भी सैकड़ों लोगों को हंसाता है।इसके लिए आपको कहीं ज्यादा दूर नहीं जाना है।जिले के रहने वाले लाफिंग बुद्धा उर्फ बाबा नागेश्वर दास।बाबा नागेश्वर दास पिछले 20 साल से लोगों को अपने खास अंदाज से हंसाने का काम करते हैं। अपने इसी हंसाने की कला के कारण प्यार से लोग इन्हें लाफिंग बुद्धा कहते हैं।अगर किसी के घर में कोई बीमार होता है,तो इनका उस घर में बेसब्री से इंतज़ार होता है।आज के तनावपूर्ण परिवेश में लगभग हर दूसरा व्यक्ति किसी न किसी कारणवश तनावग्रस्त है।पर इसका मतलब यह नहीं कि,आप आत्महत्या ही कर लें।आप उसे इग्नोर भी कर सकतें हैं।बस एक जोरदार ठहाका और सारे टेंशन उड़न छू।जी हां आप जिसके स्टेचू को अपने घरों ऑफिसों व प्रतिष्ठानों में रखकर जिस खुशी का,धन-वैभव का आह्वाहन करतें हैं। उन्हीं के जीवित रूप नागेश्वर दास हैं।नागेश्वर दास का जन्म उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में 12-7-1989 को हुआ ,पिता शिवबचन के देहांत के बाद नागेश्वर ने अपना घर छोड़ दिया।माता तारावती देवी नागेश्वर को हरवक्त हँसानें के लिए बहुत मारापीटा करती थीं। उन्हें लगता था कि मेरा बेटा विक्षिप्त है,आस पड़ोस के लोग भी इस बात की शिकायत करते रहतें थें।इसी वजह से नागेश्वर नें पिता के मरणोपरांत अपना घर छोड़कर बनारस कबीर चौरा मठ पर जा पहुँचे। उस वक्त नागेश्वर का उम्र महज़ 8 साल का ही था।मठ पर एक उमाशंकर दास नामक संत ने नागेश्वर को लॉफिंग बुद्धा की उपाधि दिया। नागेश्वर के हँसी में ईश्वरीय आकर्षण के नाते उमाशंकर दास ने बताया कि आज से एक हजार साल पहले तुम जापान में होतोई नामक भिक्षुक थे।तुम्हारे हँसने के वहज से लोगों के तनावग्रस्त जीवन में आनंद की किरणें घुलने लगी,लोग अवसाद मुक्त होने लगे।फिर तुम लॉफिंग बुद्धा के नाम से विख्यात हुए।भगवान गौतम बुद्ध के अनन्य शरण भक्त होने के कारण तुम्हारा जन्म उत्तर प्रदेश के देवरिया की धरती पर हुआ है। जहां गौतम बुद्ध ने अपना शरीर त्यागा ,देवरिया कुशीनगर में। तुम जापान के बाद फिर एक हजार साल बाद हिंदुस्तान में आये हो लोगों को अवसाद से बचने बीमारियों समस्याओं से मुक्ति दिलाने। आज नागेश्वर की पहचान इंडियन लॉफिंग बुद्धा के नाम से है,देश के कई जिस्सों में जाकर यह लोगों को हँसी का मंत्र देतें हैं।जब बिहार के धरती पर इनका आगमन हुआ,तो सम्पूर्ण बोध हुआ।जिस तरह गौतम बुद्ध को बिहार के गया में बोध हुआ,उसी तरह नागेश्वर दास को सिवान की धरती पर पूर्ण बोध हुआ और सेकेंड लॉफिंग बुद्धा के रूप में विख्यात हुये।बिहार के लगभग सभी जिलों में इनका प्रोग्राम हो चुका है।इनके सानिध्य में असंख्य लोग अपराधमुक्त नशामुक्त व अवसाद मुक्त हो चुके हैं।




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