इराक के मोसुल शहर में इस्लामिक आतंकवादी संगठन isis द्वारा मारे गए 38 भारतीय नागरिकों में सीवान के पांच युवक शामिल
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इराक के मोसुल शहर में इस्लामिक आतंकवादी संगठन isis द्वारा किए गए जघन्य अपराध से सीवान जिला पुरी तरह सदमे है ।

बता दे कि मंगलवार की सुबह सीवान सहित पुरे देश के लिए एक दुखद खबर लेकर आया । पिछले चार वर्षों जिनके सकुशल घर लौटने का इंतजार किया जा रहा था,मंगलवार की सुबह उनकी मौत की खबर ने पुरे देश को झकझोर कर रख दिया ।
गौरतलब हो कि 40 भारतीयों इराक में आतंकवादी संगठनों के द्वार 2014 में बंधक बना लिया गया था।बंधक बनाए गए 40 भारतीय नागरिकों में सीवान के पांच युवक भी शामिल थें।
मंगलवार की सुबह सीवान के आन्दर प्रखंड के ससरांव गांव के दो युवकों की हत्या की समाचार आ रही थी, लेकिन मंगलवार की देर रात तक सीवान के ही मैरवा गंडक कालोनी के एक युवक, मैरवा के ही सिसवां खुर्द गांव के एक युवक व हरपुर गांव का एक युवक की हत्या की समाचार की पुष्टि हो चुकी है ।
गौरतलब हो कि विदेश मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार सीवान के अन्दर प्रखंड के ससरांव गांव मधुसूदन तिवारी के 35 वर्षीय पुत्र विद्या भूषण तिवारी व चन्द्र मोहन सिंह के 30 वर्षीय पुत्र संतोष कुमार सिंह , मैरवा गंडक कालोनी के रामायण कुशवाहा के पुत्र सुनील कुशवाहा, मैरवा के ही सिसवां खुर्द गांव के रामबहादुर सिंह के पुत्र अदालत सिंह, हरपुर गांव के राजेंद्र प्रसाद के पुत्र ध्रमेन्द्र कुमार 2013 के दिसंबर माह में नौकरी करने के लिए इराक के मोसुल शहर गए हुए थें और वे वहां के एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करते थें ।
विदेश मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार 15 जून 2014 उन्हें इस्लामिक आतंकवादी संगठन isis ने इराक के मोसुल से अगवा कर लिया था । बाद में सभी 39 भारतीय नागरिकों के साथ इनकी भी हत्या कर दी गई ।
इसकी जानकारी मंगलवार को केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने राज्यसभा में दी। उन्होंने ये भी बताया कि आईएसआईए ने 2014 में 40 भारतीयों को मोसुल में किडनैप कर लिया था, जब इन्होंने भागने की कोशिश की तो आतंकियों ने इन्हें मार डाला, जबकि इनमें से एक बच निकलने में कामयाब हो गया। मोसुल की आजादी के बाद इन भारतीयों के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह खुद इराक गए थे। यहां उन्होंने भारतीयों के शव जमीन से खोदकर निकलवाए थे और डीएनए सैंपल को फॉरेंसिक जांच के लिए भिजवाया था।
विदेश मंत्री ने मंगलवार को
राज्यसभा को बताया कि करीब चार साल से ये तलाश चल रही थी। डीप पेनिट्रेशन रडार के जरिए इराक में बॉडी को देखा गया था।उसके बाद सभी शवों को खुदाई कर जमीन से बाहर निकाला गया था। इसमें पहचान को लेकर हाथों के कड़े जैसे कई निशान मिले थे और डीएनए जांच के बाद इसकी पुष्टि हुई।
उन्होंने बताया कि डीएनए टेस्ट में सबसे पहले संदीप नाम के लड़के का पता चला। इसके बाद सोमवार को 38 अन्य लोगों के डीएनए मैच होने के पता चला।
बता दें किडनैप किए गए 40 भारतीयों में से एक हरजीत मसीह आतंकियों के चंगुल से बच निकला था। मसीह ने बताया था कि उसने बाकी भारतीयों को अपनी आंखों के सामने मरते देखा था।
उन्होंने बताया कि विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह फिर इराक जाएंगे, जहां से सभी शवों को भारत लाया जाएगा। इसके बाद जो लोग जिस प्रदेश के है वहाॅ उनकी शव को पहुंचाया जाएगा।




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