जेपी स्मृति ट्रस्ट की विशेष बैठक में लोकतंत्र की रक्षा, युवाओं में जेपी विचारों के प्रसार और सामाजिक सरोकारों को मजबूत करने का लिया गया संकल्प:

दैनिक खोज खबर/छपरा, 25 जून।
भारतीय लोकतंत्र के इतिहास के सबसे काले अध्याय माने जाने वाले आपातकाल की 51 वीं वर्षगांठ के अवसर पर बुधवार को जेपी की जन्मस्थली स्थित जयप्रकाश नारायण स्मृति ट्रस्ट, सिताब दियारा के प्रांगण में ट्रस्ट के वरीय पदाधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के संघर्ष, उनके लोकतांत्रिक मूल्यों तथा वर्तमान समय में उनकी विचारधारा की प्रासंगिकता पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम की शुरुआत लोकनायक जयप्रकाश नारायण के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं श्रद्धासुमन अर्पित कर की गई। उपस्थित पदाधिकारियों और समाजसेवियों ने जेपी के संघर्षमय जीवन और लोकतंत्र की रक्षा के लिए दिए गए उनके योगदान को याद किया।

आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय:
बैठक को संबोधित करते हुए ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी रामायण जीवनदानी ने कहा कि वर्ष 1947 में देश को स्वतंत्रता मिलने के साथ लोकतांत्रिक व्यवस्था की शुरुआत हुई थी, लेकिन 25 जून 1975 की मध्यरात्रि को लागू किए गए आपातकाल ने लोकतांत्रिक अधिकारों को लगभग समाप्त कर दिया। उन्होंने कहा कि लाखों लोगों को जेलों में बंद किया गया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सहित नागरिक अधिकारों पर व्यापक प्रतिबंध लगाए गए। उन्होंने इसे भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय बताया।

‘संपूर्ण क्रांति’ केवल एक आंदोलन नहीं बल्कि सतत सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया:
रामायण जीवनदानी ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने तानाशाही के सामने कभी घुटने नहीं टेके और लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए संघर्ष का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि जेपी द्वारा प्रतिपादित ‘संपूर्ण क्रांति’ केवल एक आंदोलन नहीं बल्कि सतत सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया है, जिसकी उपयोगिता आज भी बनी हुई है। उन्होंने वर्तमान परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और जनभागीदारी को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में 25 जून 1975 के ऐतिहासिक महत्व पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इसी दिन आपातकाल की घोषणा के बाद लोकनायक जयप्रकाश नारायण को गिरफ्तार किया गया था। बावजूद इसके उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं किया और लोकतंत्र की बहाली के लिए संघर्ष जारी रखा। उन्होंने यह भी कहा कि आज का दिन उनके साहस, त्याग और लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता को स्मरण करने का अवसर है।

“जेपी के विचार और आज का युवा” विषय पर संगोष्ठी, निबंध लेखन एवं वाद- विवाद प्रतियोगिताओं का होगा  आयोजन:
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि ट्रस्ट आगामी दिनों में सारण प्रमंडल सहित बिहार के विभिन्न स्कूलों, कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों में “जेपी के विचार और आज का युवा” विषय पर संगोष्ठी, निबंध लेखन एवं वाद- विवाद प्रतियोगिताओं का आयोजन करेगा। इसका उद्देश्य युवाओं को लोकनायक जयप्रकाश नारायण के विचारों से जोड़ना और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति जागरूक बनाना होगा। इसके अलावा समाज के गरीब एवं वंचित वर्ग के बच्चों के लिए शैक्षणिक सहायता कार्यक्रमों को विस्तार देने तथा नि:शुल्क स्वास्थ्य शिविरों के आयोजन को और गति देने का भी निर्णय लिया गया। ट्रस्ट ने यह भी तय किया कि जेपी के ऐतिहासिक भाषणों, लेखों और विचारों को डिजिटल माध्यमों के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाएगा, ताकि युवा उनके जीवन और संघर्ष से प्रेरणा ले सकें।

बैठक के समापन पर उपस्थित सभी पदाधिकारियों, सदस्यों, शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों ने राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध पंक्तियां—“सिंहासन खाली करो कि जनता आती है”—दोहराते हुए लोकतंत्र की रक्षा, सामाजिक कुरीतियों के उन्मूलन और ‘संपूर्ण क्रांति’ के मूल उद्देश्यों को आगे बढ़ाने का सामूहिक संकल्प लिया। बैठक में ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी रामायण जीवनदानी, आशुतोष कुमार भारती, सचिव आलोक कुमार सिंह, हरेराम सिंह, इंजीनियर जमाल हैदर, दीन दयाल और भगवान गिरी सहित कई अन्य प्रबुद्ध नागरिक, शिक्षाविद एवं जेपी आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ समाजसेवी उपस्थित थे।