• गजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम में सुदामा चरित्र पर भावविभोर हुए श्रद्धालु, सोनपुर विधायक ने लिया आशीर्वाद

दैनिक खोज खबर/सोनपुर।। श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम में चल रहे श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ के छठे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा के छठे दिन शुक्रवार को श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य जी महाराज ने सुदामा चरित्र का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा बचपन के परम मित्र थे, जिन्होंने एक ही गुरुकुल में शिक्षा पाई थी।
सुदामा जी संतोषी थे, दरिद्र नहीं:
स्वामी लक्ष्मणाचार्य ने श्रापित चने का रहस्य बताते हुए कहा कि जो भी उस चने को खाता, वह धनहीन हो जाता। सुदामा जी इस रहस्य को जानते थे। उन्होंने स्वयं कष्ट सहना स्वीकार किया, लेकिन प्रभु श्रीकृष्ण को वह चना नहीं दिया, ताकि संपूर्ण जगत धनहीन होने से बच जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि गरीब और दरिद्र में बड़ा अंतर होता है। सुदामा जी गरीब जरूर थे, लेकिन दरिद्र नहीं, क्योंकि दरिद्र वह है जो अपने कर्मों का परित्याग कर निष्कर्मी बन जाता है। सुदामा जी पूर्ण संतोषी थे और उन्होंने जीवन भर ‘अयाचक वृत्ति’ (किसी से न मांगने का नियम) का पालन किया।
“आजकल लोग स्वार्थ के वश में होकर मित्र या हितैषी बनते हैं और स्वार्थ खत्म होते ही एक-दूसरे के शत्रु हो जाते हैं। संसार का कोई भी सांसारिक मित्र विपत्ति में धोखा दे सकता है, लेकिन असली मित्र केवल वह परमात्मा है जो कभी साथ नहीं छोड़ता।”- स्वामी लक्ष्मणाचार्य
कृष्ण-सुदामा मिलन की जीवंत झांकी:
कथा के दौरान जब सुदामा जी अपनी पत्नी के आग्रह पर द्वारका पहुंचे, तो प्रभु श्रीकृष्ण अपने सखा का नाम सुनते ही नंगे पांव दौड़ पड़े। दोनों मित्रों के इस अलौकिक मिलन को देखकर देवलोक से देवताओं ने पुष्प वर्षा की। स्वामी जी ने कहा कि द्वारकाधीश ने सुदामा जी को अपने सिंहासन पर बिठाकर राजसी स्वागत किया। सुदामा जी ने प्रभु से प्रत्यक्ष रूप से कुछ नहीं मांगा, लेकिन अंतर्यामी प्रभु ने उन्हें देवदुर्लभ त्रिलोकी का राज्य प्रदान कर दिया। इस दौरान मंदिर परिसर में कृष्ण-सुदामा मिलन की अत्यंत आकर्षक झांकी भी निकाली गई, जिसे देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
विधायक विनय कुमार सिंह ने लिया आशीर्वाद:
भागवत कथा में सोनपुर के विधायक विनय कुमार सिंह ने भी देवस्थानम पहुंचकर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्य जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस धार्मिक आयोजन में सोनपुर के अलावा हाजीपुर, छपरा, पटना, मुजफ्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित रहे। कथा के अंत में श्रीमद्भागवत जी की भव्य आरती की गई और उपस्थित भक्तों के बीच प्रसाद का वितरण हुआ।
कल होगी महापूर्णाहूति:
यज्ञ समिति के सदस्यों ने बताया कि शनिवार को इस सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा की महापूर्णाहूति होगी, जिसके बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा।




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