आँगनवाड़ी केन्द्रों में मना वजन दिवस

छपरा:-पोषण पखवारा के अंतर्गत ज़िले के सदर अस्पताल में वजन दिवस मनाया गया. इस दौरान बच्चों का वजन और ऊँचाई नापी गयी और इसके महत्त्व के विषय में अभिभावकों को जानकारी दी गई।सदर प्रखण्ड की बाल विकास परियोजना पदाधिकारी उर्वशी के देखरेख में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने वजन करने के बाद कुपोषित बच्चों को पोषक आहार देने के विषय में अभिभावकों को जानकारी दी। कुपोषित बच्चों को नियमित पोषाहार खिलाने की सलाह देते हुए आईसीडीएस के अंतर्गत दी जाने वाली पोषाहार एवं टेक होम राशन के विषय में भी बताया गया।

अभिभावकों को बताई गयी वजन के लंबाई का महत्व

जिले के सभी प्रखंडो में पंजीकृत बच्चों के वजन एवं ऊँचाई नापकर कुपोषित एवं अतिकुपोषित बच्चों की पहचान भी की गयी। साथ ही अतिकुपोषित बच्चों को जिले के पोषण पुनर्वास केंद्र में सन्दर्भन के विषय में भी अभिभावकों को जागरूक किया गया. सदर प्रखंड की सीडीपीओ उर्वशी ने बताया की बच्चों में बौनापन कुपोषण की पहचान होती है। बच्चों में उम्र के हिसाब से लम्बाई नहीं बढ़ने से बौनापन होता है. इससे शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता का ह्रास होता है और बच्चा बार-बार संक्रमण का शिकार होता है. लेकिन सामुदायिक स्तर पर इसके विषय में जानकारी का अभाव है. इसको ध्यान में रखते हुए वजन दिवस का आयोजन किया गया.

उम्र के अनुसार सही वजन है जरुरी

उम्र के हिसाब से बच्चे का वजन कम या ज्यादा है तो उन्हे कई तरह की स्वास्थ्य संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ सकता हैं. सही वजन बच्चों को स्वस्थ रखने के साथ-साथ कई बीमारियों से दूर रख सकता है. इसीलिए उम्र के मुताबिक सही वजन की जानकारी होना बेहद आवश्यक है।जन्म के समय जिन बच्चों का वजन 2 किलोग्राम से कम रहता है उन बच्चों में रोग-प्रतिरोधक क्षमता कम जाती है. इसकी वजह से संक्रमण तेजी से फैलता है एवं कई प्रकार के रोगों से बच्चे को खतरा बना रहता है. सामान्य स्थिति जन्म के समय ढाई किलोग्राम से लेकर साढ़े तीन किलोग्राम तक के वजन वाले बच्चों को स्वास्थ्य माना जाता है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों के अनुसार एक औसत स्वास्थ्य बच्चे का वजन उसकी 3 से 7 वर्ष तक की आयु पर प्रतिवर्ष 2 किलोग्राम की दर के अनुसार बढ़ता है और उसके बाद पूर्ण वयस्क होने तक प्रतिवर्ष 3 किलोग्राम की दर के अनुसार बढ़ता है.इस अवसर पर पर्यवेक्षिका गुड़िया, श्रुतिरानी व रजनी बाला उपस्थित थी।