Θ बेतिया :- *सरकार द्वारा शिक्षकों की समाजिक उपेक्षा एवं आर्थिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करना दुःखद, निराशाजनक व दुर्भाग्यपूर्ण : TSUNSS गोपगुट*

✍न्यूज इनपुट नीरज ठाकुर बेतिया (प.च) बिहार 👉
29 सितम्बर 2018 को राजधानी पटना के राष्ट्रीय सहारा अखबार में जदयू सचेतक सह विधायक रामसेवक सिंह का शिक्षक पर निशाना साधते हुए ”नियोजित शिक्षकों की हरकतों को देख रही जनता : विधायक” शीर्षक से निराशाजनक बयान कि ‘शिक्षकों को पहले अपने अंदर झांक कर देखना चाहिए। भले ही नियोजित शिक्षक सरकार के विरुद्ध सुप्रीमकोर्ट में लड़ाई लड़ रहें हैं पर उनकी हरकतों को जनता शांति से सब कुछ देख रही है। सरकार के मध्याह्न भोजन योजना में लूट खसोट को लेकर विद्यालयों में मार हो रहा है शिक्षक पढ़ाने पर ध्यान नही दे रहें हैं। फिर ऐसे विद्यालय से अच्छे शिक्षा प्रणाली की कल्पना कैसे की जा सकती है?’ निंदनीय है। सरकार द्वारा राज्य में समान स्कूलिंग प्रणाली लागू करने के बजाय शिक्षकों पर दोषारोपण निराशाजनक व निंदनीय है। सरकार की नजर में लूटखसोट वाली योजनओं को या तो बंद कर देनी चाहिए या फिर शिक्षकों को उनसे अलग रखना चाहिए। इन्हीं गैर शैक्षणिक कार्यों के कारण समाज में शिक्षक की गरिमा धूमिल हो रही है। TSUNSS गोपगुट संघ के हवाले से उक्त बातें संघ के जिला सोशल मीडिया प्रभारी सुनिल कुमार ‘राउत’ ने कही। आगे कहा – नियोजित शिक्षक विद्यालयों में शिक्षण कार्य के साथ साथ सरकार के अन्य गैर शैक्षणिक कार्यो में भी अपना शत प्रतिशत योगदान देते हैं किन्तु सरकार व उसके नेता लोग बयानबाजी कर के शिक्षकों के योगदान को नजरंदाज कर देते हैं जिससे उनमें निराशा उत्पन्न होती है। सरकार को चाहिए की शिक्षकों को सम्मानित ढंग से कार्य करने दे एवं ससमय सम्मानजक समान वेतन दे एवं शिक्षा हेतू अनुकूल परिवेश बनाए तथा युवाओं को बढ़ावा दे। शिक्षकों के दृष्टिकोण से सरकार की नीति शिक्षक विरोधी है व सरकार के नित नए व अन्यान्य प्रयोग से शिक्षा का स्तर गिरते जा रहा है इसके लिए शिक्षक नही बल्कि सरकार ही खुद जिम्मेवार है। विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की घोर कमी है। उत्क्रमित उच्च विद्यालयों में शिक्षकों की कमी से मध्य विद्यालय के शिक्षक शिक्षण कार्य कर रहें हैं। सरकारी विद्यालयों के बच्चों को समय से पुस्तकें नही मिली इसके दोषी कौन है ? विद्यालय को भोजनालय में परिणत किया गया और शिक्षक को गैर शैक्षणिक कार्यो में शामिल किया गया इसके जिम्मेदार कौन है ? ऐसे परिवेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात बेमानी होगी। सरकार के उदसीनता के कारण ही 2011 में TET परीक्षा उत्तीर्ण हजारों अभ्यर्थियों के सर्टिफिकेट की वैधता बहाली के इंतजार में ही समाप्त हो गई। शिक्षक बनने वाले युवा बेरोजगारी का दंश झेलने को मजबूर हैं। सरकार द्वारा शिक्षकों की उपेक्षा, उदसीनता के कारण ही शिक्षकों का शिक्षा विभाग से पलायन हो रहा है इसका प्रत्यक्ष उदाहरण BPSC की परीक्षा में शिक्षकों का चयन होना है। यह सरकार को जवाब ही है। सरकार राजनीति के दृष्टिकोण से समाज में शिक्षकों को उपेक्षित करने के उद्देश्य से बयान दे कर जनता में नकरात्मक संदेश दे रही। इन्हें जब यह तक पता नही कि शिक्षक सरकार के विरुद्ध नही लड़ रहे बल्कि सरकार ही शिक्षक व हाईकोर्ट निर्णय के विरुद्ध समान काम समान वेतन मामले को लेकर सुप्रीमकोर्ट गई है। जबकि उच्च न्यायालय पटना द्वारा शिक्षकों के पक्ष में निर्णय किया गया है बावजूद उस निर्णय का पालन करने के सरकार सुप्रीमकोर्ट चली गई यह शिक्षक विरोधी मनसिकता नही तो और क्या है ? क्या सारी योजनाएँ शिक्षकों के हित को समाप्त कर के ही चलाई जा रहीं हैं ? जब शिक्षक ही मानसिक रूप प्रताड़ित होते रहेंगे तो वे निर्भीक रूप से शिक्षण कार्य कैसे करेंगे ? जब शिक्षा ही प्रभावित होगी तो बेहतर समाज व नौनिहालों के भविष्य के साथ राष्ट्र निर्माण कैसे होगा ? बावजूद इन समस्याओं के नियोजित शिक्षक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने हेतू कृत संकल्पित हैं। श
िक्षकों का अपने अधिकार की माँग सरकार है ना कि विद्यार्थियों से। यदि सरकार के वश की बात हो तो सभी विद्यालयों में MDM एवं अन्य गैर शैक्षणिक योजनाओं से शिक्षकों को अलग करें। पर सरकार को यह पता है कि विभिन्न योजनाएँ शिक्षकों के योगदान के बिना पूरी नही हो सकती। बावजूद इसके सरकार के दल के सचेतक व विधायक का यह शिक्षक विरोधी बयान निंदनीय, दुर्भाग्यपूर्ण व उपेक्षित करने वाला है। आज समाज में शिक्षकों की यह स्थिति सरकार के भोजनालय एवं अन्य लुभावने स्कीम के कारण हुईं है जिससे शिक्षा का स्तर गिरा है और समाज का एवं अशिक्षित वर्ग की भोली भाली जनता लुभावने बयान व योजना में उलझ कर रह जाते हैं। वहीं माध्यमिक शिक्षक संघ के जिला सचिव उमेश चन्द्र पाण्डेय का शिक्षकों के आचरण को लेकर दिया बयान निराशाजनक है। वह भी सरकार के सुर में सुर मिला रहें हैं। क्या उन्हें तनिक भी यह एहसास नही कि सरकार शिक्षकों के शोषण के लिए शिक्षकों को ही माध्यम एवं सहारा बना रही है ? सचिव के बयान से यह दृष्टिगोचर होता है कि वह वह पूर्णतः राजनीति से प्रेरित है।
TET STET उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ गोपगुट शुरू से ही सरकार से यह माँग करता रहा है कि राज्य में समान स्कूलिंग प्रणाली लागू करने के साथ शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यो से मुक्त करें पर सरकार वोट बैंक एवं समाज में शिक्षकों की गरिमा धूमिल करने के उद्देश्य से ऐसा नही कर रही जो खेदजनक है। सरकार पहले स्वयं आकलन करें फिर शिक्षकों पर दोषारोपण करें। सरकार के शिक्षक विरोधी, शोषणकारी नीति के कारण ही शिक्षकों का सामजिक, शारीरिक, आर्थिक व मानसिक शोषण के साथ साथ उपेक्षा हो रही है।
सुनिल कुमार ‘राउत’
(TSUNSS गोपगुट)