🛑🛑 मांडलगढ़ चुनावी चर्चा 🛑🛑
•भाजपा को जनता ने नहीं दिया आदर, दोषी कौन ? मतदाता या फिर दामोदर
💢 मांडलगढ़ [ दिलीप मेहता ]..✍🏻🌈मांडलगढ़ विधानसभा में पिछले समय में चमक कर उभरने वाली भाजपा को भी गुटबाजी की दीमक लग गई है जो धिरे धिरे संगठन को खोखली करती जा रही है । जिले की राजनीति में जिला प्रमुख व यूआई टी चेयरमेन मांडलगढ़ क्षैत्र के बनने के बाद उपचुनाव में विधायक के लिये फिर राजपूत कार्ड पर जिलाप्रमुख को ही टिकट देकर भाजपा ने अपना पक्ष जनता के सामने रखा लेकिन जनता जनार्दन के मतदाताओ ने इसे अपनी जन अदालत में नकार दिया ?
जनता ने सरकार के कामकाज से बढ़ती नाराजगी के साथ ही चली चर्चाओ में भाजपा संगठन के जिलाध्यक्ष भाई दामोदर की उपचुनाव में चली गुटबाजी व मनमानी की कहानी ने इतनी दुरिया पैदा कर दी की अब इस चुनाव में नानी याद दिला दी । जबसे ही भाई दामोदर ने इस मेवाड की धरा मांडलगढ़ में चुनावी बिसात बिछाने के लिये कदम रखा वही से ही गुटबाजी व मनमानी तथा बडबौले बोल के स्वर मुखर होने लगे जिस पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने जिला भाजपा संगठन की कार्यशैली से नाखुश होकर अपना विरोध भी दर्ज कराया लेकिन महारानी ने मनन नहीं करके इस पर अमल तक नहीं किया।
अगर चुनावो से पहले जिलाध्यक्ष का मांडलगढ़ में दखल कम कर स्थानीय नेताओ को गले लगा दिया जाता तो भाजपा आज एकजूट नजर आती ? अपने राम ने शुरु से ही लिखा और चेताया भी था लेकिन उस समय भाई की मनमानी का डंका बज रहा था ? अब चुनावी परिणाम के बाद खुद जिला संगठन कह रहा है कि कहां चुक हुई देखेगें ..यह आश्चर्य वाली बात है ।
चुनावो में हार जीत होती रहती है लेकिन अपनी गलती से होतो दु:खदायी और पीडा कारक होती है ? भीलवाडा से लेकर मांडलगढ़ तक चली गुटबाजी रूपी मटके में दरार आ गई थी जिसे समय पर नहीं बदला गया और भरा भराया पानी भी ऐनवक्त पर चुनाव परिणाम के रूप में बह गया ? भाजपा आलाकमान को इसकी शिकायते की जा रही है और हो सकता है इस पर शिघ्र ही मंथन होकर भीलवाडा व अजमेर के जिलाध्यक्ष हटाये जायेगे जिसकी चर्चायें है ?
कांग्रेस के सुत्रधार सीपी जोशी ने मांडलगढ़ के चुनावी रिमोर्ट का बटन अपने हाथ में रखा और ” हाथ ” को ऊंचा कर दिखाया । आजादी के बाद कल पहली बार धाकड समाज का जोश देखा जो काबीले तारीफ था क्योकि लोकतंत्र में समाज को जनता की अदालत में मान व सम्मान मिला उससे समाज गद् गद् है । वहीं निर्दलिय के रूप में ताल ठोकने वाले भाई गोपाल मालवीय का [ लंबाई ] कद भले ही छोटा है लेकिन रेकार्ड तोड मत लेकर उन्होने अपना कद जरूर ऊंचा कर दिखाया है जिसकी चारो तरफ चर्चायें जारी है।
निर्दलिय की ‘ मशीन ‘ ने जरूर ” फूल ” को फैल किया है लेकिन कई जगहो पर ” हाथ ” में भी चुभन का असर दिखाया है। इस उप चुनाव में कांग्रेस का विवेक फिर लौट आया है और पानी [ कार्यकर्ता ] की कमी से फूल मुरझाया है तो सिलाई मशीन का जोर भी रंग लाया है ? जनता जनार्दन की निगाहों में भाजपा के शक्तीसिंह सिधे पन से नायक बने हुये है और निर्दलिय गोपाल मालवीय अपने व्यवहार व मेहनत से जन नायक बन उभर कर सामने आये है और चुनाव जीत कर के कांग्रेस के विवेक धाकड पहली बार महानायक बन कर छा गये है । आनेवाले समय में इस त्रिमूर्ती का अगले चुनावो से पहले क्या समीकरण रहेगा और जनता की अदालत में कौन मतदाताओ पर पकड बनाये रखेगा …. इसके लिये तो यही जाने या फिर … राम ही जाने ? 🤷♀🤷🏼♂




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