👉बुधवार, मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि व पुष्य नक्षत्र में सीवान शहर के महादेवा , मालवीय नगर में आयुर्वेद पद्धति से  पहली बार 51 बच्चों का स्वर्णप्राशन संस्कार प्रसिद्ध आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉक्टर के.डी.रंजन  के नेतृत्व में किया गया👈

✍नवीन सिंह परमार 

♨भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद के अनुसार  नौनिहालों अर्थात  जन्म से लेकर सोलह साल के उम्र  तक के  बच्चों में  रोगप्रतिरोधक  क्षमता यानि इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए  बुधवार, मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि व पुष्य नक्षत्र तदनुसार २८ नवंबर को   स्वर्णप्राशन संस्कार आयोजित किया जाता है । बुधवार को सीवान शहर के महादेवा , मालवीय नगर में आयुर्वेद पद्धति से सीवान में पहली बार 51 बच्चों का स्वर्णप्राशन संस्कार प्रसिद्ध  आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉक्टर के. डी.रंजन  के नेतृत्व में किया गया । इस दौरान नगर पार्षद सलीम सिद्दीकी पिंकू , शिक्षिका कंचनबाला, चंदन कुमार, विशाल कुमार,  मेराज अहमद, अर्जुन कुमार, संजय कुमार, सतीश सिंह सहित दर्जनों की संख्या में शहर के गणमान्य लोग उपस्थित थे ।


इस मौके पर आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉक्टर रंजन  के  बताया कि आयुर्वेद के अनुसार स्वर्णप्राशन संस्कार से  बच्चों को सर्दी, जुकाम, अतिसार, वायरल रोगो से बचाया जा सकता  है,  साथ ही साथ उनकी मेधा,  बुद्धि,स्मृति को बढाया जा सकता  है।

डाक्टर  रंजन  ने कहा  कि स्वर्णप्राशन संस्कार से बच्चों में बार-बार प्रयोग  होने वाली एंटीबायोटिक के दुष्परिणामों से भी बचाया जा सकता है ।


 उन्होंने बताया कि  आयुर्वेद में महर्षि काश्यप व  सुश्रुत ने सर्वप्रथम इसका प्रयोग  किया था। यह बच्चों में  रोगप्रतिरोधक  क्षमता यानि इम्यून सिस्टम को मजबूर करता है।इस से  बच्चों मे रोगो से लडने की क्षमता बढती है।उसे बार-बार एन्टीबायोटिक नही देना पडता है।स्वर्ण प्राशन मे बच्चों को शुद्ध स्वर्ण भस्म, गोघृत, शंखपुष्पी,अश्वगंधा, आदि औषधियो का मिश्रण दिया जाता हैं।यह संस्कार पुख्य नक्षत्र मे किया जाता हैं।इन औषधि का संग्रह भी पुख्य नक्षत्र में  होता हैं।

गौरतलब हो कि पिछले दिनों  स्वर्णप्राशन का प्रयोग उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के आसपास के इलाकों में इंसेफेलाइटिस बीमारी से  बच्चों की जान बचाने के लिए  किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज के  संयुक्त तत्वाधान में आयुर्वेद के डॉक्टरों ने गहन छानबीन कर सुवर्णप्राशन विधि से इंसेफेलाइटिस जैसे जानलेवा बीमारी पर काबू पाया था ।