✍रांची खेलगांव से नवीन सिंह परमार की रिपोर्ट


💢रांची ( 28 सितंबर )रांची के खेलगांव में आयोजित हो रहे लोकमंथन 2018 के दूसरे दिन के एक चर्चा सत्र की अध्यक्षता करते हुए प्रख्यात निर्त्यांगना और राजनीतिज्ञ डॉ सोनल मानसिंह ने भारत और जापान का तुलनात्मक विश्लेषण करते हुए कहा कि जापान दो विश्वयुद्ध के बाद खड़ा हो गया। भारत में तो विश्वयुद्ध का कुछ था ही नहीं और गांधी जी के कहने पर भारतीय सैनिकों ने अपने प्राण दिए. जापान की गाड़ियां और यंत्र विश्व भर में चले. अमेरिका से ज्यादा जापान के यंत्र प्रचलित थे। एक समय ऐसी स्थिति थी। जापान को आज जनसंख्या बढ़ानी है जबकि हमारे यहां जनसंख्या को नियंत्रित करना है । आज जापान रोबोटिक सभ्यता बनने जा रहा है। वहां यंत्रमानव की जरूरत है पर हमें यंत्र मानव की नहीं मानव बनने की जरूरत है। भारत को मातृ संस्कृति कहा गया। हमें अपने ऊपर गर्व करने का पूरा अधिकार है लेकिन अधिकार का अधिकारी होना एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। यदि हम कान में ध्वनि यंत्र लगाकर मोबाइल के गुलाम बन गए हैं, यदि हम गूगल को आचार्य मान रहे हैं, यदि हम फेसबुक और ट्विटर पर जो लिख रहे हैं उनको विद्वान मान रहे हैं, यदि हम फिल्मों के गानों को समझ रहे हैं कि यही हमारी सभ्यता संस्कृति है तो हम बहुत बड़ी भूल कर रहे हैं हमें निरंतर अपने आप में डूबना पड़ेगा। फिर से समझना होगा कि कहां हम निर्बल है? कहां फिर से बल जुटाने की आवश्यकता है।

इसके उपरांत उपस्थित जनसमूह द्वारा समाज अवलोकन से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे गए जिसका वक्ताओं ने उत्तर दिया।
{ इनपुट – परमार डाॅट काॅम : सीवान )




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