*​मुश्किल में है पत्रकार, बड़ी लड़ाई की है दरकार – डॉ भारती*
👈संजय कुमार सुमन”दैनिक खोज खबर”मधेपुरा👉
बिहार में पत्रकारों पर लगातार हो रहे जानलेवा हमले चिन्ता जनक ही नही है बल्कि कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति के अलावा बड़ी व गंभीर समस्याओं को दर्शा रही है । उक्त बातें इण्डियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन, बिहार के प्रदेश मुख्य महासचिव डॉ दयानन्द भारती ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कही। उन्होंने कहा कि बिहार में पत्रकारों पर हुए हमले का आंकड़ा काफी ज्यादा ही है । गत वर्ष अप्रैल 16 में पूर्ण शराबबंदी लागू किए जाने के बाद से बिहार के मुखिया नीतीश कुमार कई राज्यों का दौरा कर दावा करते फिर रहे हैं की बिहार में आपराधिक आंकड़ा कम है । पिछले एक साल के दौरान सूबे में कई पत्रकारों की हो रही हत्याएं एवं जानलेवा हमले उनके इस दावे पर प्रश्न चिन्ह लगा रही हैं । पिछले माह 3 जनवरी को समस्तीपुर के विभूतिपुर में एक दैनिक अखबार के पत्रकार ब्रजकिशोर ब्रजेश की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी । वहीँ बीते साल नवंबर में सासाराम के एक दैनिक अखबार से जुड़े पत्रकार धर्मेंद्र सिंह पर भी घातक हमला हुआ और अस्पताल जाने के क्रम में दम तोड़ दिया था । जबकि उससे पहले सिवान में एक अखबार के पत्रकार राजदेव रंजन की रेलवे स्टेशन के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी । इसी कड़ी में गम्हरिया, मधेपुरा पत्रकार डिक्सन भगत शराब माफिया के खिलाफ खबर छापी तो पुलिस ने उनके दुकान में तोड़फोड़ के साथ उनकी जमकर पिटाई कर दी ।  सहरसा के पत्रकार विकास कुमार की पुलिस द्वारा बुरी तरह से पिटाई कर दी गयी । कैमूर में देवब्रत तिवारी द्वारा अपराधियों का खबर लगाया तो उल्टे उन्हें ही पुलिस सांठ गांठ से एससी- एसटी एक्ट में फंसा दिया और अपराधी आज भी छुट्टा घूम रहा है, बेगूसराय के मोकमा में एक पत्रकार पर दबंगो द्वारा जानलेवा हमलाकर बुरी तरह से जख्मी कर दिया गया । बांका में एक अखबार के ब्यूरो ने लगातार खबर छापी तो नाराज होकर जिलाधिकारी ने उनके ऊपर किसी भी सरकारी कार्यालय में प्रवेश पर रोक लगा दी । खगरिया के मानसी बीडीओ द्वारा पत्रकार अभिजीत कुमार को अपशब्द के साथ जान से मारने की धमकी दी गयी । 17 फरवरी को मधेपुरा सदर थाना में खबर संकलन करने गए पत्रकार मुकेश मधुकर को पुलिस कर्मी द्वारा सरेआम पिटाई कर दी गयी, वहीँ इसी जिले में 3 मार्च को पत्रकार उदय कुमार को खबर संकलन के दौरान पुलिस द्वारा बुरी तरह से पिटाई कर दी गयी । इस तरह के सैकड़ो उदाहरण है जहां पत्रकारों को अपमानित, प्रताड़ित, पिटाई व जानलेवा हमले में असामाजिक तत्व के अलावा अधिकारी भी हमलावर रहें है । कई अन्य पत्रकारों और उनके परिजनों पर जानलेवा हमले भी हुए हैं । उन्हें डराया धमकाया गया है। हमारा शिकायत है कि राज्य में सुशासन होने का दावा करने वाले नीतीश कुमार यह विश्वास दिला पाने में नाकाम रहे हैं कि गलत कार्यो के खिलाफ आवाज उठाने के बाद पत्रकार सुरक्षित हैं । 
उक्त तमाम मुद्दों पर बड़ी लड़ाई लड़ने  की जरूरत महशुस की  जा रही है और इस लड़ाई को अंजाम तक पहुंचने के लिए देश के सभी पत्रकार को एक होना होगा । डॉ भारती ने 5 अप्रैल 17 को हाजीपुर, वैशाली की धरती पर आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय पत्रकार सम्मेलन में बिहार के सभी प्रिंट, एलोक्ट्रोनिक चैनल एवं वेव पोर्टल के पत्रकारो से उक्त कार्यक्रम में भाग लेकर अपने अधिकार की लड़ाई में आगे आने की अपील की ।