​मधेपुरा :-बिहार राज्य किसान सलाहकार संघ जिला इकाई मधेपुरा का एक दिवसीय बैठक संपन्न, मानदेय समय पर नहीं मिलने से किया गया प्रकट रोष प्रकट
👈संजय कुमार सुमन”दैनिक खोज खबर”मधेपुरा👉
बिहार राज्य किसान सलाहकार संघ जिला ईकाई मधेपुरा का जिला स्तरीय बैठक उमेश कुमार जिला अध्यक्ष  की अध्यक्षता में शिव मंदिर परिसर पुरानी कचहरी मधेपुरा में आयोजित किया गया।
             श्री कुमार ने कहा कि सरकार के द्वारा विज्ञापन निकालकर किसान सलाहकार की बहाली की गई ।जिसमें स्पष्ट तौर पर वर्णन था की किसान सलाहकार का कार्य सेवा प्रदायी केन्द्र चलाने की होगी परंतु सरकार के आदेश का बिल्कुल विपरीत कार्य किसान सलाहकारों से लिया जाता है ।किसान सलाहकार कृषि विभाग के संपूर्ण योजना चाहे ,रबी का मौसम हो, या खरीफ का, दोनों में किसान और विभाग के बीच एक कड़ी बनकर किसान बंधुओं को तकनीकी जानकारी के साथ इनपुट भी विभाग से दिलाती है। कृषि विभाग के द्वारा किसान सलाहकार को प्रत्येक योजना में लक्ष्य दिया जाता है और हमारे भाई बंधू उस लक्ष्य की पूर्ति के लिए धूप में ,बरसात में ,ठंड में ठिठुर कर भी सरकार के लक्ष्य की पूर्ति के लिए पंचायत में घूम-घूमकर किसानों को लाभ देते हैं।

इतना ही नहीं किसान सलाहकार के द्वारा किसान को अपने आवश्यकतानुसार कृषि यंत्र के लिए भी जानकारी देकर उसका ऑनलाइन तक करवाते हैं ।जबकि सरकार का उद्देश्य केवल था कि सेवा प्रदायी केंद्र चलाकर तकनीकी जानकारी दिया जाए। उतना काम करने के बावजूद भी समय-समय पर अन्य विभाग के काम का देखरेख करते हैं ।कभी सांख्यिकी विभाग ,तो कभी जनगणना ,तो कभी प्रखंड विकास प्राधिकारी का आदेश का पालन करना पड़ता है। और जिन्हें एक पंचायत का जिम्मा था। वर्तमान में दो से तीन पंचायत भी किसान सलाहकार को दिया गया है।   किसान सलाहकार के अथक परिश्रम का फल कृषि कर्मण पुरस्कार बिहार सरकार को प्राप्त हो पाई है ।किसान सलाहकार का भविष्य सिमटता चला गया और उच्चाधिकारी का आदेश सर आंखों पर  चढ़ कर बोले लगा है।जिससे सलाहकार बंधुओं का आर्थिक दुर्दशा दिन प्रतिदिन कमजोर होती गई है।
 श्री कुमार ने कहा कि सरकार के आदेश के विपरीत स्थानीय उच्चाधिकारी के द्वारा अपने स्तर से अपने अनुसार हम लोगों से काम लेती है ।और केवल एक मजदूर से भी कम मानदेय देकर 8 से 10 घंटे तक काम करवाती है ।इसके बावजूद भी जिला में दो से तीन बार बुलाकर क्लास लगाया जाता है ।किसान सलाहकार के द्वारा इतना काम करने के बावजूद भी मानदेय की कटौती ,तो कभी उच्च अधिकारी के द्वारा चयनमुक्त की धमकी बराबर मिलती रहती है ।सरकार हम लोगों के लिए दोहरी नीति का काम कर रही है ।किसान सलाहकार पंचायत में जनसेवक का कार्य बखूबी से निभाती है। इतना ही नहीं सरकार के द्वारा किसानों को दिए जाने वाले अनुदान के लिए आवेदन करवाती है। इसके बावजूद विभाग समय पर अनुदान नहीं देती ।किसान के द्वारा भी सलाहकार प्रताड़ित होता है और विभाग के उच्च अधिकारी के द्वारा भी डराया धमकाया जाता है। हम लोग कहां जाएं ऐसी नोबत बन आती है ।4 माह से किसान सलाहकार को मानदेय नहीं मिला है ,जिससे किसान सलाहकारों में भुखमरी की स्थिति आ गई है। अगर जून के अंतिम सप्ताह तक मानदेय नहीं दी जाती है, तो जिला मुख्यालय में धरना प्रदर्शन के लिए हम लोग बाध्य हो जाएंगे।

जिला सचिव कुंजबिहारी शास्त्री ने कहा कि बिहार राज्य किसान सलाहकार संघ प्रदेश में सरकार को कई बार अल्टीमेटम दी है हमारे भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाए और हमें  स्थाई किया जाए ।लेकिन सरकार की दोहरी नीति का मार हम लोग झेल रहे हैं।
 इसी आलोक में प्रदेश संयोजक शंभू नाथ झा के द्वारा तथ्यात्मक प्रतिवेदन के साथ मानवाधिकार आयोग में केस दर्ज की है ताकि हम अपने भविष्य सुरक्षित कर सकें ।
इस मौके पर संजय कुमार राय कोषाध्यक्ष ,अमरदीप कुमार रौकी उपाध्यक्ष ,रविंद्र कुमार, नरेंद्र कुमार ,निर्भय कुमार, विजय कुमार भास्कर ,धीरेंद्र कुमार, संतोष कुमार ,सुनील कुमार, मनोज कुमार ,राजेश कुमार, कमलेश कुमार ,ललन कुमार, मनोज कुमार, रमाकांत कुमार आदि दर्जनों किसान सलाहकार बंधू उपस्थित होकर अपना दुख दर्द एवं रोष प्रकट किया।