✍प्रणव वर्मा 👉”दैनिक खोज खबर” मुरलीगंज, मधेपुरा👈
सरकार के सात निश्चयों में से एक ” हर घर बिजली ” सिर्फ फाइलों और रिपोर्ट में ही फल फूल रहा है जबकि धरातल पर नतीजा सिफर है । विद्युत विभाग द्वारा निजी कंपनियों ( टेक्नो , लेनिवो …) के माध्यम से बिजली से वंचित क्षेत्र में बिजली व्यवस्था पहुंचाने का कार्य जोर शोर से शुरू हुआ लेकिन कुछ ही दिनों बाद नतीजा ढाक के तीन पात । कभी आंवटन का रोना , तो कभी तार खंभो की किल्लत ; यूं कहें कि वादे थे वादों का क्या !
निजी कंपनियों की करतूत –
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार के योजना के तहत विद्युत से वंचित क्षेत्रों का सर्वे कर लागत सामग्रीयों ( तार , खंभा , ट्रांसफार्मर …) का आकलन किया जाता है । यहां गौर करने वाली बात है कि निजी कंपनियों के कर्मीयों द्वारा सर्वे से छांट देने का भय दिखाकर आम ग्रामीणों से रुपए उगाही किए जाते है । खासकर कम बसावटों ( 05-10 घर ) वाले स्थान पर यह गोरखधंधा धरल्ले से चलता है ।
विभागीय खामी –
निजी कंपनियों को कार्य सौंपाने के बाद विद्युत विभाग पूर्ण रूप से संबंधित कंपनियों ( टेक्नो , लेनिवो ) पर आश्रित हो गई और यह भी जानना आवश्यक नहीं समझा कि कार्य व्यवस्थित और सुदृढ़ ढंग से हो रहा है या नहीं ? जिसका नतीजा यह निकला कि अधिकांश क्षेत्र जहां पूर्व से ही बिजली ( तार , खंभा , ट्रांसफार्मर ) थी वहां नया विद्युत संचरण उपलब्ध करायी गई । अधिकतर विद्युत से वंचित क्षेत्र वंचित ही रह गए ।
वादे और हकीकत –
बिजली विहीन क्षेत्रों के ग्रामीणों द्वारा जब कनीय अभियंता या संबंधित पदाधिकारीयों से बात की जाती है कि तो वह यह कह कर पल्ला झाड़ लेते हैं कि – ” यह काम वहीं लोग ( निजी कंपनी ) देखेंगे … उन्हीं से बात कीजिए !
पुनः जब निजी कंपनी के क्षेत्रीय अधिकारी से बात की जाती है तो वे यह कहकर बच निकलते हैं कि अभी तार खंभा आदि का आंवटन स्टाक में नहीं है ।
मामला 01 – मुरलीगंज थानाक्षेत्र के जोरगामा पंचायत के अरुण राम ( पिता – परमेश्वरी राम ) कहते हैं कि हमलोंगो से6 सर्वे के नाम पर रूपए की मांग की गई । नहीं देने पर सर्वे से छांट दिया गया जिस कारण अभी तक हमलोगो तक बिजली नहीं पहुंचा है ।
मामला 02 –
जोरगामा पंचायत अंतर्गत वार्ड संख्या 09 निवासी मोहम्मद आकूफ का कहना है कि 2014 में उपभोक्ता बना लेकिन अभी तक तार खंभा आदि नहीं उपलब्ध कराई गई है ।हमलोग बांस बल्लों के सहारे विद्युत का उपयोग करते हैं!
मामला 03-
शंकर कुमार ( पिता – स्व० अशोक राम ) मीरगंज निवासी ने बताया कि , निजी कंपनी वाले ने कहा -” रुपया दो , तुम्हारा काम कर देते हैं ; नहीं तो 5-6 घर के लिए तार खंभा कभी नहीं लगेगा ।
मामला 04 –
जोरगामा पंचायत के वार्ड संख्या 11 के अरुण कुमार यादव ने बताया कि 2009 में जब मैं उपभोक्ता बना तब से लेकर आजतक , विभाग के द्वारा तार खंभा उपलब्ध नहीं कराई गई है जिस कारण विद्युत संचरण 11 हजार केवी के खंभे ( उपर 11 हजार नीचे 440 ) के सहारे ही किया जा रहा है । 11 हजार केवी का खंभा-तार भी आदम जमाने का है और काफी झुका है ।
वर्ष 2016 में सभी पंचायत रोजगार सेवक को यह काम सौंपा गया था कि विद्युत से संबंधित अद्यतन स्थिति ऑनलाइन प्रतिवेदन करें , जिसकी मॉनिटरिंग खुद जिला पदाधिकारी कर रहे थे । वह रिपोर्ट भी सिर्फ फाइलों तक ही सीमित रह गए ।
अभी भी ढेर सारे ऐसे क्षेत्र हैं जहां अभी तक बिजली नहीं पहुंची है । जिसका मुख्य कारण कम संख्या में आबादी होना , निजी कंपनियों की करतूत है । बहरहाल विभाग को चाहिए कि अपने व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालन हेतु रुपरेखा तैयार कर वंचित क्षेत्र को बिजली उपलब्ध करायी जाए ।




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