​*भारत जैसे धर्मनिर्पेक्ष देश में विदेशी उत्सव का दस्तक  मदर्स डे*
👈चंदन कुमार झा”दैनिक खोज खबर”मधेपुरा👉
भारत में 2017 का दिन रविवार 14 मई को *मातृत्व दिवस* है । हर साल मई के दूसरे रविवार को मातृत्व दिवस भारत में अक्सर मनाया जाने लगा है !
*भारत में इसका  महत्त्व*–
भारतीय मां  की नजरों से , 
बच्चे की मुस्कान ही मां की धरोहर होते हैं और उनकी खुशी के लिये ही वो दिवाली,होली,दशहरा और ईद आदि मनाती हैं लेकिन भारतीय बच्चे ने मां को समर्पित करते हुए एक दिन उसके नाम पर रखा है जिसे हम *मातृत्व दिवस* या  ‘ *मदर्स डे*  कहते हैं।
यह तिथि हर किसी के लिए वर्ष का एक बहुत खास दिन होता है ।जो लोग अपनी माताओं से प्यार करते हैं और उनका ध्यान रखते हैं, वे कई तरह से इस विशेष अवसर का जश्न मनाते हैं । पूरे वर्ष में यही एकमात्र दिन होता है जिसे भारत  की सभी माताओं को समर्पित किया जाता है ।विभिन्न देशों के लोग देश के नियमों व तिथि  के अनुसार अलग-अलग तिथियों और दिनों में इस दिन का जश्न मनाते हैं ।
भारत में हर साल देश के लगभग सभी क्षेत्रों में यह मई के दूसरे रविवार को मनाया जाता है ।पूरे भारत में आज के आधुनिक समय में इस उत्सव के मनाने के तरीके में काफी बदलाव आ गया है । यह समाज में बड़ी जागरूकता की एक घटना बन गयी है ।हर कोई इस घटना में अपने तरीके से भाग लेना और मनाना चाहता है । यह इस धर्मनिरपेक्ष देश में विदेशी त्योहार की उपस्थिति का ही नहीं विदेशी तौर तरीके उनके चाल ढ़ाल , उनके द्वारा किये गये कार्य के  अनुसरण कर समाज को  चलने व बदलने का एक संकेत मात्र देख रहे है । यह कई देशों में मनाया जाने वाला एक वैश्विक आयोजन है । उच्च तकनीकों के आज के समय में लोग अपने सभी रिश्तों के बारे में बेहद जागरूक हैं और उत्सव के माध्यम से उन रिश्तों को सम्मान प्रदान करते हैं ।भारत एक महान संस्कृति और परंपरा वाला देश है जहां लोग अपनी मां को पहली प्राथमिकता देते हैं। इसलिए यहां मातृत्व दिवस  का जश्न हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है ।यह वह दिन है जब हम हमारी माँ की देखभाल, कड़ी मेहनत और उनके प्रेरक विचारों का एहसास कर सकते हैं ।वह हमारे जीवन की सबसे महान इंसान है, जिसके बिना हम एक साधारण जीवन की भी कल्पना नहीं कर सकते ।उन्होंने ही अपनी देखभाल और प्यार से हमारी ज़िंदगी को इतनी सरल और आसान बना दिया है ।

स्कूलों में शिक्षकों द्वारा बच्चों के सामने इसे आयोजित किया जाता है ताकि वे घटना के बारे में जागरूक हो सकें और मां के महत्व को जान सकें। छोटे छात्रों की माताओं को स्कूल के उत्सव में हिस्सा लेने के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया जाता है । इस दिन, प्रत्येक छात्र कविता पाठ, निबंध लेखन, भाषण, नृत्य, गायन, बातचीत, आदि के माध्यम से अपनी मां के बारे में कुछ कहता है | माताएं भी अपने बच्चों के लिए कुछ कहती हैं | वे आम तौर पर गाने गाती हैं या बच्चों के मनोरंजन के लिए नृत्य करती हैं | माताएं स्कूल में कुछ सुंदर व्यंजन भी लाती हैं और उत्सव के अंत में कक्षा के सभी छात्रों को समान रूप से वितरित करती हैं | बच्चे अपनी माताओं को एक उपहार के रूप में हाथ से बनी ग्रीटिंग कार्ड या अन्य चीज़ें देते हैं |
ईसाई धर्म के लोग इसे अपने तरीके से मनाते हैं | वे अपनी माता के सम्मान में चर्च में भगवान के सामने इस दिन विशेष प्रार्थना करते हैं | वे बिस्तर पर या नाश्ते पर ग्रीटिंग कार्ड देकर अपनी मां को आश्चर्यचकित भी करते हैं | इस दिन, बच्चे अपनी मां को परेशान नहीं करते और उन्हें सुबह देर तक सोने देते हैं और मां को आश्चर्यचकित करने के लिए उनकी कुछ पसंदीदा खाना का व्यंजन  तैयार करते हैं | कुछ बच्चे अपनी मां को प्रभावित करने के लिए बने बनाये उपहार व पसंदीदा सामान  जैसे- कपड़े ,पर्स, व ज्वेलरी आदि खरीदते हैं |

*विदेशों में महत्त्व*—
” *Mother’s Day*” पर कुछ देशों में छुट्टियां होती है ताकि बच्चों को परिवार के साथ आनंद लेने का पूरा मौका मिल सके | माताओं को उनके घर के सभी कार्यों और जिम्मेदारियों से दूर रखने का यह सबसे अच्छा दिन है।’मदर्स डे’ की शुरूआत वेस्ट वर्जिनिया में एना जार्विस ने की थी उन्होंने इस दिन अवकाश घोषित कर दिया था।
बाद में ये हॉलीडे काफी लोकप्रिय हो गया जिसे कि ‘होलमार्क होलीडे’ की संज्ञा दे दी गई।
कहा जाता है कि मातृ पूजा का रिवाज पुराने ग्रीस से शुरू हुआ था जो स्य्बेले ग्रीक देवताओं की मां थीं ।
जानकारी के अनुसार ग्रीस में यह त्यौहार के रूप में 18 मार्च को मनाया जाता है ! यूरोप और ब्रिटेन में ‘मदर्स डे’  एक खास संडे को मनाया जाता है जिसे कि ‘मदरिंग सन्डे’ कहते हैं।

मातृ दिवस, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के रूप में कई देशों में 8 मार्च को मनाया जाता हैं।
लेकिन भारत में ‘मदर्स डे’ मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है।
चीन में, मातृ दिवस के दिन मां को उपहार के रूप में गुलनार का फूल दिया जाता है, ये दिन वहां गरीब माताओं की मदद के लिए 1997 में निर्धारित किया गया था।देश व विदेशों की इतिहास को देखें तो यह दिवस अलग – अलग दिनों व तिथियों को मनाया जाने वाला एक उत्सव का ही दिन है !