क्या अस्तित्व है मेरा, मै एक नारी हूँ।
सविता उपाध्याय 
क्या अस्तीत्व है मेरा.एक सवाल.     मै.एक नारी हुँ। किसी की बेटी.किसी की बहन.किसी की पत्नी.किसी की माँ हुँ.अपने जन्म के साथ ही परिवारिक. सामाजिक.बन्धन नामक पिंजरे मे कैद कर दी जाती हुँ. समय के साथ. मेरी मेरी तकदीर का फैसला परिवार और समाज के द्वारा कर दिया जाता है.मै अपने सपनोंं की चिता पथराई आँखो से जलते देखती हुँ.  जिस आंँगन मे मेरा बचपन खेलता है.समय के साथ उसी आँगन मे गाय की तरह एक खूँटे से मुझे बाँध दिया जाता है .जब मुझे निकाला जाता है मेरी तब मेरा मालिक कोई और होता है कभी किसी कोख मे मेरा बजुद ही मिटा दिया जाता है.तलाशती हुँ मेरी पहचान क्या है क्युँ मै खुल कर जिन्दगी का आनन्द क्युँ नही ले सकती.क्यूँ समाज की दुहाई दी जाती है .हरपल मर मर कर जिंदा हुँ .मेरी वेदना को कोई क्यो नही समझता क्या कसूर है मेरा मेरा नारी होना ही मेरे लिये ईश्वर का   अभी श्राप है क्युँ जन्म लेने से पहले मुझे मार दिया जाता है मै नही रहुँगी । इस श्रृष्टी से मेरा नाम मिट जायेगा.तब इस दुनियाँ मे सिर्फ पुरुष ही नजर आयेगे .यह श्रृष्टी नारी विहीन हो जायेगी । तब कैसे चलेगी दुनीँया     बस एक सवाल क्या  अश्तीत्व हे मेरा