कोटा:जनता की नुमाइंदगी के बिना 76 करोड़ का बजट पास
वसीम खान
कोटा 6 मई। कोटा विश्वविद्यालय के प्रबंध मंडल (बोम) ने जनता की नुमाइंदगी के बिना ही 76 करोड़ रुपए का बजट पास कर दिया। नया बजट सत्र शुरू होने के एक महीने बाद बुलाई गई बैठक में छात्र दुर्घटना बीमा कोष बनाए जाने को मंजूरी दे दी गई, जबकि नई रिसर्च गाइड लाइन को इस बैठक का हिस्सा ही नहीं बनाया गया।
विवि के कामकाज को पारदर्शी बनाने के लिए प्रबंध मंडल में राज्यपाल की ओर से दो शिक्षाविद् और सरकार की ओर से दो जनप्रतिनिधियों की नियुक्ति की जाती है, वहीं नया बजट सत्र शुरू होने से पहले फरवरी या मार्च में आगामी सत्र का बजट पास करवाया जाता है, लेकिन कोटा विवि ने इस बार नया बजट सत्र शुरू होने से पहले बजट बैठक नहीं बुलाई और इसी बीच चारों सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो गया। 
इसी बीच राज्यपाल कल्याण सिंह ने प्रो. जॉन वर्गिस व प्रो. अरविन्द कुमार को अपना प्रतिनिधि नामित कर दिया, लेकिन सरकार अभी किसी जनप्रतिनिधि को सदस्य नामित नहीं कर सकी है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों के नामित होने का इंतजार किए बिना ही विवि प्रशासन ने बोम की बैठक बुलाकर बजट पास करवा दिया। इस बाबत कुलसचिव डॉ. संदीप चौहान ने कहा कि बजट के बिना विवि के संचालन में दिक्कतें आ रही थीं, इसलिए जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी के बिना ही बैठक आयोजित करनी पड़ी।
छात्रों को मिलेगा दुर्घटना बीमा
बोम की बैठक में सिर्फ एक ही नया प्रस्ताव पारित किया गया। इसमें छात्रों को दुर्घटना बीमा योजना का लाभ देने के लिए एक लाख रुपए के प्रारंभिक कोष के निर्माण की घोषणा की गई। वहीं कुलगीत को मंजूरी देने के साथ ही निर्माण कार्य से जुड़े पुराने प्रस्तावों को फिर से अनुमोदित किया गया।
पुराने नियमों से होगी पीएचडी
राज्यपाल सिंह की ओर से जारी की गई पीएचडी की नई गाइड लाइन और यूजीसी के पीएचडी-एमफिल रेग्युलेशन 2016 को बोम की इस बैठक में भी मंजूरी नहीं दी गई, जबकि कोटा विवि 25 मई को पीएचडी की प्रवेश परीक्षा आयोजित करने जा रहा है। इसके बाद तय हो गया है कि विवि प्रशासन इस बार भी पुराने नियमों से ही पीएचडी में प्रवेश देगा। रेग्युलेशन 2009 के मुताबिक शोध उपाधि जारी करने पर यूजीसी और राजभवन पहले ही रोक लगा चुके हैं।