
छपरा। अग्निवीर योजना के मुद्दे पर समूचा देश जल रहा है। केन्द्र में सत्तासीन मोदी सरकार त्वरित निर्णय लेकर देश को और बर्बाद होने से बचा ले। सरकार को अपनी भूल पर पश्चाताप करनी चाहिए। अग्निवीर योजना को लागू करने से पहले संसद में इस मुद्दे पर बहस किया जाना चाहिए था। अब भी वक्त है सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाकर इस मुद्दे पर सबकी राय लेकर कोई ठोस निर्णय ले। छात्रों का यह स्वतः स्फूर्त आंदोलन हिंसक रूप ले चुका है। पूरे देश में आगजनी तथा हिंसा का दौर जारी है। यह कटु सत्य है कि आंदोलनों की परम्परागत परिपाटी पर अमल करते हुए राजनीतिक दिवालियेपन का शिकार विपक्ष भी छात्र आंदोलन के जरिये अपनी खोई राजनीतिक जमीन हासिल करने हेतु राजनीतिक रोटी सेंकने में लगा हुआ है। छात्र तो कच्चे मिट्टी से बनने वाले बर्तन के समान होते हैं कुम्हार चाहे तो सुराही बना दे या चिलम बना दे। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में चाहिए कि केन्द्र सरकार अपनी जिद छोड़कर तत्काल अग्निवीर योजना को ठंडे बस्ते में डालने की घोषणा करे तथा सर्वदलीय बैठक बुलाकर छात्रों से बात कर उनका गुस्सा शांत करने की पहल करे। अन्यथा देश बर्बाद हो जाएगा। पिछले तीन दिनों से जारी छात्र आंदोलन में देश की अरबों रुपये सम्पत्ति का नुकसान हो चुका है। अनवरत जारी हिंसा में सरकारी कर्मी पुलिस व यात्री शिकार होते चले जा रहे हैं। रेलवे स्टेशनों तथा सड़कों पर नाराज अभ्यर्थियों का उत्पात जारी है। योजना से आहत छात्रों के बीच आत्महत्याओं का दौर शुरू है। देश भर के यात्री भाग भाग कर अपनी जान बचा रहे हैं। छात्रों द्वारा पुलिस पर किये जा रहे हमलों से परेशान पुलिस भी बेबस बनी हुई है। सरकार आंदोलन रोकने हेतु पहल करने में तनिक विलम्ब न करे अन्यथा आने वाले दिनों में छात्र गलतफहमी का शिकार होकर एक दूसरे के खिलाफ हिंसा भी करेंगे इस आशंका से भी इनकार नही किया जा सकता। राजनीतिक तथा गैर राजनीतिक शांतिप्रिय लोग अपील तथा आग्रह के माध्यम से आंदोलन की आग को शांत करने की पहल करें। मैं ब्यक्तिगत तौर पर केन्द्र सरकार से अपील करना चाहता हूँ कि अग्निवीर योजना के मुद्दे पर सरकार अपनी जिद छोड़ कर बातचीत की त्वरित पहल करे तथा विपक्ष राष्ट्रहित में आंदोलन को हवा देने से परहेज करते हुए देश में अमन चैन बहाल करने में अपनी महती भूमिका का निर्वहन करे। साथ ही नाराज अभ्यर्थी व छात्र हिंसा का रास्ता छोड़कर अपने भविष्य को बर्बाद करने की भूल न करें। देश जबतक आबाद है तबतक ही हम सबका अस्तित्व है। अपनी बात मनवाने के लिए जोर जबरदस्ती व हिंसा का सहारा लेकर देश के नागरिकों का अथवा राष्ट्र की सम्पत्ति का नुकसान पहुंचाना कहीं से न्यायोचित नही है।
लेखक : मनोज कुमार सिंह,राष्ट्रीय प्रवक्ता
अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति




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