कोई जीते, कोई भी हारे… जनमत का सम्मान करें

मृत्युंजय त्रिपाठी(पत्रकार)/दैनिक खोज खबर डेस्क : इनके कारण सच में लोकतंत्र खतरे में है… वे जो बूथ लूटकर जीतने के आदी हो चुके थे, वे अब लाख चाहकर भी ईवीएम हैक नहीं कर पा रहे तो पागल हुए जा रहे हैं। वे जो कल तक सत्ता से दूर होने पर लोकतंत्र को खतरे में बता रहे थे, अब एक बार फिर हार की आशंका हुई तो हरवे-हथियार लेकर तैयार हैं। वैसे भी सत्ता का नशा चरस-अफीम से भी अधिक चढ़ता है। जिन्हें भी एक बार यह नशा हो गया, वे फिर ज्यादा दिन इससे दूर नहीं रह सकते… फिर या तो खुद मर जाएंगे या आपको मारने पर उतारू हो जाएंगे। अभी यही हो रहा है…।

अच्छी बात यह है कि अभी इन गुंडों का असली चेहरा सामने है जो नेता बनकर जनता को लूटते हैं और जब भी सत्ता दूर होती नजर आती है तो लोकतंत्र की दुहाई देकर फिर से ठगते हैं। आज सजग रहने का दिन है। क्योंकि, आज गुंडे, गुंडे के रूप में ही सामने होंगे, उनके गुर्गे, गुर्गे के रूप में। हां! जिन्हें लोकतंत्र में वास्तव में आस्था है वो नेता और जनता के रूप में ही दिखेंगे। बेहतर स्थिति यह भी है कि सेना के जवान तैयार हैं इन गुंडों और इनके गुर्गों को इन्हीं की भाषा में समझाने के लिए। … तो आप ऐसे तत्वों से सजग रहिए किन्तु निश्चिन्त भी रहिए कि ये दंगाई अपने मंसूबे में कामयाब नहीं होंगे।

सब भूलकर आइए, हम सब इन गुंडों-गुर्गों से इतर जनता के रूप में अपने-अपने नेता की जीत की कामना करें। और फिर कोई जीते, कोई भी हारे… जनमत का सम्मान करें।

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