विश्व फोटोग्राफी दिवस पर विशेष – ” फोटो पत्रकारिता में गुदड़ी के छुपे लाल हैं बिहार के सिमरी बख्तियारपुर के फोटो जर्नलिस्ट अजय कुमार “

🌐आज विश्व फोटोग्राफी दिवस हैं । सोशल मीडिया में सुबह से ही फोटो – फोटोग्राफी व फोटोग्राफर को लेकर कई लोग बहुत कुछ लिख चुके है ।
सोचा मैं भी कुछ लिखूं, बहुत सोचने के बाद सोचा कि क्यों न मैं अपने सबसे पंसदीदा फोटो जर्नलिस्ट के संबंध में कुछ आप सबों के साथ शेयर करू।

कहते हैं हजार शब्द जो बात नहीं कह पाते हैं एक तस्वीर कह देती है और तस्वीर यदि दिल को छूने वाली हो तो क्या कहना? पर मेरे पंसदीदा फोटो जर्नलिस्ट व बिहार के कोसी के क्षेत्र के चर्चित फोटोजर्नलिस्ट अजय कुमार जैसी तस्वीरें ले पाना सबके वश की बात भी नहीं है। आज बस इतना ही कहना चाहता हूँ कि फोटो पत्रकारिता के क्षेत्र में गुदड़ी के छुपे लाल हैं बिहार के
सिमरी बख्तियारपुर के फोटो जर्नलिस्ट अजय कुमार ”

फोटो पत्रकारिता में अजय भाई के महत्वपूर्ण योगदान का ही परिणाम है कि इनकी तस्वीरें विश्व की चर्चित मीडिया हाउस बीबीसी से लेकर क्विंट, हरिभूमि, बदलाव, गाँव कनेक्शन, गाँव जवार समेत दर्जनों वेबसाइट्स व बिहार से प्रकाशित लगभग सभी समाचार-पत्र व पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी है ।

गौरतलब हो कि हिन्दुस्थान समाचार के मेरे साथी अजय भाई जो कि उम्र में मुझसे बड़े हैं । जो
सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर के रहने वाले हैं।
अजय भाई दर्जनों अखबारों में बतौर जर्नलिस्ट काम कर चुके है । वे छात्र जीवन से ही पत्रकारिता के शौकीन रहे हैं ।

पढ़ाई के दौरान ही सबसे पहले वर्ष 1983 में ये बेगुसराय टाइम्स से जुड़े और फिर अपने गृह शहर सिमरी बख्तियारपुर से ही इन्होने अपने पत्रकारिता के इस लम्बे कैरियर में आत्मकथा (दैनिक), प्रभात खबर (रांची एडिशन), पाटलिपुत्र टाइम्स, आर्यावर्त, प्रदीप, जनशक्ति, हिन्दुस्थान न्यूज एजेंसी (HS), नवभारत टाइम्स, दैनिक हिन्दुस्तान आदि के लिए अपनी सेवा समर्पित कर चुके है ।

एक साक्षात्कार के दौरान अजय भाई ने बताया था कि वे वर्ष 1992 में ये दैनिक हिन्दुस्तान से जुड़े थे और लगातार 21 साल इस अखबार के लिए अपना सबकुछ समर्पित कर दिया। पर 2013 में स्थानीय मोडम प्रभारी के द्वारा उन्हें अपमानित किये जाने के बाद इन्होने इस अखबार को छोड़ दिया ।

उन्होंने बताया कि तनाव में काम छूटा तो उसी समय सोशल मीडिया की तरफ झुकाव बढ़ा और दिल बहलाने के लिए जब फेसबुक तथा अन्य जगहों पर अपनी कोसी के दर्द की तस्वीरें और आलेख आदि पोस्ट करनी शुरू की तो सोशल मीडिया के यूजर्स ने अजय को पलकों पर बिठा लिया। इंटरनेट पर दुनियां से जुड़े तो विभिन्न प्रकार की ख़बरों और पोस्ट की गई तस्वीरों ने इन्हें और निखारना शुरू किया ।लोगों की टिप्पणियाँ मनोबल बढ़ाती चली गई और फिर इनकी तस्वीरों के माध्यम से देश और दुनियां ने न सिर्फ इस इलाके के पिछड़ेपन को देखा बल्कि बीबीसी जैसी दुनियां की प्रतिष्ठित न्यूज ब्रॉडकास्टिंग एजेंसी ने भी सरकार की आँखें अजय कुमार की तस्वीरों के माध्यम से ही खोलने का प्रयास किया।

निर्भीक और ईमानदार पत्रकारिता करने वाले अजय कुमार की लगभग सभी तस्वीरें कोसी के ग्रामीण जनजीवन से जुड़ी हुई रहती है, जो इनके प्रिय आंचलिक कथाकार फनीश्वर नाथ रेणु के उपन्यासों से प्रभावित दीखती है। वर्तमान में प्रभात खबर के लिए बतौर फोटोजर्नलिस्ट व न्यूज एजेंसी हिन्दुस्थान समाचार के काम कर रहे । अजय कुमार की कई तस्वीरें तो इतनी मार्मिक होती है कि संवेदनशील लोगों को विचलित करने के लिए काफी है. कहते हैं बिना थके फोटोजर्नलिज्म के लिए तो मेरी जिन्दगी ही समर्पित है.

इस आलेख के साथ अजय भाई की कुछ तस्वीरें शेयर कर रहा हूँ यह तस्वीरें यह भी बताने के लिए काफी है कि भले ही शहरें डिजीटल हो रहे हों, पर गांवों के लाखों परिवार को आज भी न तो बदन ढंकने के लिए पूरा वस्त्र है और न खाने के लिए दो जून की रोटी।
अंत में बस इतना ही कहना चाहूंगा कि अजय भाई की बोलती तस्वीरें बरबस अदम गोंडवी की चर्चित दो पंक्तियाँ फिर से याद दिला जाती हैं:
“तुम्हारी फाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है ,
मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है.”

यही नही कवि दुष्यंत की यह पंक्तियां भी अजय भाई बहुत ही सटीक बैठती है कि –
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।
विश्व फोटोग्राफी दिवस पर अजय भाई को ढेर सारी शुभकामनायें, ईश्वर आपको स्वास्थ्य रखें ।
( इनपुट : मधेपुरा टाइम्स )
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नवीन सिंह परमार
By- परमार मीडिया – सीवान { बिहार }