संजय विजित्वर/हाजीपुर: आपको जानकर यह सुखद महसूस होगा कि हाजीपुर के ऐतिहासिक तथा सांस्कृतिक धरोहर में से एक गांधी आश्रम जिसका नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्णाक्षरित है, जहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 7 दिसंबर 1920 ईस्वी को पधार कर निज कर- कमलों से इसकी नींव रखी थी। अर्थात लगभग 100 वर्षों का इतिहास लिए हाजीपुर का यह ऐतिहासिक गांधी आश्रम जो हाजीपुर रेलवे जंक्शन से महज कुछ मिनट की दूरी पर पूरब दिशा में अवस्थित है और आज 5 संस्थानों के समूह लिए हुए हैं जो अपने आप में महत्वपूर्ण है। पुस्तक अवलोकन के आधार पर यह स्पष्ट हो सका कि गांधी आश्रम का यह ऐतिहासिक परिसर 22 कट्ठा 4 धुर में फैला हुआ है। लोगों से बातचीत के आधार पर, जनश्रुति के आधार पर तथा प्रत्यक्ष अवलोकन के आधार पर साथ ही इस ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परिसर के शिलापट्टिका पर अंकिताक्षर के आधार पर वैशाली जिला के सहदेई प्रखंड अंतर्गत पोहियार के स्वर्गीय चंद्रदीप नारायण सिंह के द्वारा दान दी गई भूमि है जहां बापू ने स्वयं पधार कर इसकी नींव रखी थी। यहां पर स्वतंत्रता सेनानियों के विश्राम के लिए 8-10 कमरे हैं जो कभी खपड़पोश हुआ करता था ।वह आज आधुनिक स्वरूप में है, जहां गरम दल तथा नरम दल के नेताओं के आगमन होते रहते थे।_____________१)07 दिसंबर 1920 ईस्वी में महात्मा गांधी ने हाजीपुर के गांधी आश्रम की नींव निज कर -कमलों से रखी थी। २) यह ऐतिहासिक गांधी आश्रम परिसर इनदिनों 5 संस्थानों के समूह लिए हुए है। ३) इस ऐतिहासिक परिसर की चहारदीवारी से सटे चारों ओर बापू के नाम पर ही घनी आबादी वाला गांधी आश्रम मोहल्ला है। ४) प्राचीन निवासियों के कथनानुसार यहां तक आने की सड़क पगडंडी थी। ५) गांधी आश्रम मोहल्ला की प्राचीन सड़क भी कच्ची और पतली थी। ६) गांधी आश्रम मोहल्ला नगरपालिका के वार्ड नंबर 4 में था फिर वार्ड नंबर 8 और आज नगरपरिषद के वार्ड नंबर 22 में है। —————————————- बता दें कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में भारत के गांधी आश्रम के प्रमुख केंद्रों में मिदनापुर, मेरठ ,चटगांव, इलाहाबाद, कानपुर की तरह यह भी प्रमुख रहा है। यहां गरम दल तथा नरम दल के क्रांतिकारी अपने सिद्धांतों के अनुरूप योजना को मूर्त रूप देते थे। आपको सुखद महसूस होगा कि शेर- ए- बिहार के नाम से प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी योगेंद्र शुक्ल यहीं से अपनी योजना को मूर्त रूप देते थे। नेताजी सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, देशरत्न डॉ राजेंद्र प्रसाद, आचार्य कृपलानी , डॉ राम मनोहर लोहिया, राम नंदन मिश्र सहित कई महान व्यक्तित्व इस गांधी आश्रम से जुड़े हुए थे। इस गांधी आश्रम को संचालित रखने में जिले के सभी स्वतंत्रता सेनानी महान क्रांतिकारी स्वर्गीय जय नंदन झा का सहयोग करते थे। उनमें से कुछ प्रमुख नाम हैं जैसे किशोरी प्रसन सिंह, अक्षयवट राय, योगेंद्र शुक्ल, बैकुंठ शुक्ल, बाबूलाल शास्त्री, अब्दुल हमीद, गुलजार पटेल, सुनीति सिन्हा, चंद्रमा सिंह ,अमीर गुरु, सूर्य नारायण सिंह, सूर्यनारायण आजाद, राम अयोध्या राय सहित और भी कई नाम है जिनका नाम इतिहास के पन्नों में अंकित है। आज भी उन पुण्य आत्माओं की अनुगूंज इन कमरों को देखते ही सहज महसूस होने लगती है। ऐसे तमाम विभूतियों को नमन और श्रद्धांजलि। बाद के वर्षों में इस ऐतिहासिक स्थल को जीवंत रखने में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय दीप नारायण सिंह स्वर्गीय सत्येंद्र नारायण सिंह तथा भूतपूर्व राज्यसभा सांसद सीताराम सिंह की रही। कालांतर में और भी कई स्वतंत्रता सेनानी इसे जीवंत रखने में अपनी भूमिका निभाते रहे। इस ऐतिहासिक स्थल के ठीक पूरब दिशा में कुछ कदम की दूरी पर दूसरे संस्थान के रूप में गांधी स्मारक पुस्तकालय है। बिहार के तत्कालीन राज्यपाल डॉ जाकिर हुसैन ने 7 दिसंबर 1960 ईस्वी में इसका शिलान्यास किया था। इस पुस्तकालय में भी कई कमरे हैं और एक बड़ा हॉल है। इसके परिसर में भी बर्षों से कई कार्यक्रम होते रहे हैं। इसके एक कमरे में सांध्यकालीन पुस्तकालय चलता है। कई साहित्यिक तथा सांस्कृतिक आयोजन बर्षों से होते रहते हैं। इस पुस्तकालय से ठीक सटे पूरब दिशा में तीसरे संस्थान के रूप में सन् 1983 ईस्वी में स्थापित बसावन सिंह स्मृति भवन है जिसमें आंगनवाड़ी प्रशिक्षण केंद्र का बोर्ड लगा हुआ है। इस भवन के सामने सुंदरतम पार्क की चहारदीवारी है जिसे हाल के वर्षों में हाजीपुर नगर परिषद के द्वारा बनाया गया था। इस पार्क में सुंदर पेड़- पौधे तथा व्यायाम करने के कई उपकरण लगे हुए हैं। यह पार्क लॉकडाउन के पूर्व सुबह- शाम खुलता था जहां बच्चे ,बूढ़े जवान, लोग महिला, पुरुष सब कोई आते थे और स्वयं को तरोताजा करते थे। पिछले वर्ष यानी इसका 99 वां वर्षगांठ के अवसर पर इस पार्क की चहारदीवारी पर चंदू बाबू पार्क की नाम पट्टिका लगाई गई थी। इस पार्क के पूर्वी छोर पर दीप नारायण सिंह संग्रहालय है जिसमें स्वतंत्रता सेनानियों से संबंधित चित्र, तथ्य इत्यादि मौजूद हैं। इस संग्रहालय तक पहुंचने का रास्ता इसी पार्क से है। गांधी आश्रम ऐतिहासिक परिसर की चहारदीवारी से सटे चारों ओर यानी पूरब, पश्चिम ,उत्तर, दक्षिण घनी आबादी वाला हाजीपुर के प्राचीन मोहल्ले में से एक गांधी आश्रम मोहल्ला है जिसमें सैकड़ों मकान तथा दर्जनाधिक्य गलियां हैं ।इस परिसर के मुख्य द्वार के सामने हनुमान मंदिर है जहां गांधी आश्रम मोहल्ला के निवासी पूजा- अर्चना करते हैं। गांधी आश्रम मोहल्ला का नामकरण बापू के ही नाम पर हुआ था। बता दें कि स्वतंत्रता सेनानियों के लिए विश्राम स्थल तथा सभा स्थल के रूप में बने कमरे की दीवार से सटे दक्षिण दिशा में गांधी आश्रम मोहल्ला में जाने की नाला सहित पीसीसी सड़क है जिसके दोनों छोर पर 55- 60 साल पुराने दर्जनाधिक्य बाशिंदे के मकान हैं। इस मोहल्ला में कुछ किराना की दुकानें भी हैं जिनसे इस मोहल्ले के निवासी दैनिक उपयोग की वस्तुएं आसानी से खरीदारी करते हैं। इस परिसर के पूर्वी छोर से भी नाला सहित पीसीसी सड़क है जो गांधी आश्रम मोहल्ले की ओर जाती है। साथ ही एक और सड़क जो इस परिसर के लगभग तीन -चार बांस पहले पश्चिम दिशा में ही नाला सहित पीसीसी सड़क है। गांधी आश्रम परिसर के उत्तर में खादी ग्रामोद्योग भवन का परिसर है जो बीते कई वर्षों से अपनी जर्जर स्थिति पर आंसू बहा रहा है। जबकि बापू को खादी से कितना गहरा लगाव था यह जगजाहिर है। प्रत्यक्ष अवलोकन तथा 2 दर्जन से अधिक लोगों से बातचीत के क्रम में यह भी स्पष्ट हुआ की यह मोहल्ला कभी नगरपालिका के वार्ड नंबर 4 उसके बाद वार्ड नंबर 8 और आज नगर परिषद के वार्ड नंबर 22 में अवस्थित है। निःसंदेह तत्कालीन नगर पालिका नियमों के तहत ही इस मोहल्ला का विकास हुआ होगा तभी तो आज यह गांधी आश्रम मोहल्ला की सड़क जो प्राचीन निवासियों के कथनानुसार कभी कच्ची और पतली सड़क थी ,आज वह चौडी़ और नाला सहित पीसीसी है जिसपर वर्षों से आवागमन आसानी से होता रहा है तथा सड़क के दोनों छोर पर 55-60 साल और उससे अधिक पुराने बासिन्दें का मकान है। आज इस मोहल्ले की प्राय सभी सड़कें नाला सहित पीसीसी है। एक, दो गली को छोड़कर। गांधी आश्रम ऐतिहासिक परिसर की पश्चिमी दीवार से सटी सड़क में लगभग 200 मीटर आगे दक्षिण दिशा में गांधी आश्रम मोहल्ला के लगभग 90 वर्षीय बुजुर्ग राम सिंहासन कुमार (पूर्व उप समाहर्ता)-ने अपनी बचपन की बातों को याद करते हुए बताया कि सन् 1936 इस्वी से ही गांधी आश्रम आते-जाते थे। उस समय यहां पगडंडी थी, खजूरबन्नी था अर्थात खजूर पेड़ों की श्रृंखला और बापू के आगमन के बाद ही यहां परिवर्तन हो सका। आज नाला सहित सड़क, बिजली ,पानी है।उन्हें इस बात का गर्व है कि बापू के नाम पर बसे इस गांधी आश्रम मोहल्ला के वे 50 साल पुराने बासिन्दे हैं।उन्होंने अपने सामने वाले घर के बारे में बतलाया कि स्वर्गीय धूपेंन्द्र प्रसाद जी का मकान है जो मुझसे भी प्राचीन निवासी थे और काफी भले और ईमानदार थे। इसी मार्ग पर लगभग 75 वर्षीय बुजुर्ग डॉ विजय कुमार ( पूर्व सहायक मंडल प्रबंधक एलआईसी)ने बतलाया कि बहुत गर्व का विषय है कि वे बापू के नाम पर स्थापित मोहल्ला के 60 साल पुराने बाशिंदे हैं। इन्होंने भी अपने बचपन की यादें ताजा करते हुए कहा कि पहले इस मोहल्ला में एकपैरिया रास्ता और कच्ची सड़क थी। दक्षिण दिशा में आगे तक खजूर बन्नी था।बापू के आगमन के बाद से ही यह मोहल्ला विकास करता गया और आज इस गांधी आश्रम मोहल्ला में नाला सहित चौड़ी सड़क है। बिजली, पानी, स्ट्रीट लाइट है और कामना इस बात की है कि वे और उनकी आने वाली पीढ़ी सदियों तक आबाद रहे ,सुरक्षित रहे तथा मोहल्ला वासी भी समृद्ध रहें।इस क्रम में साहित्यकार तथा प्रसिद्ध जादूगर प्रोफेसर ध्रुव कुमार चित्रांश ने हर्षित भरे स्वर में कहा कि लगभग 40 वर्षों से इस ऐतिहासिक स्थल तक आना- जाना लगा रहा है और संयोगवश इस परिसर की दक्षिणवाली चहारदीवारी से सटे मकान में निवास करते हैं। काफी गौरव का एहसास है। उन्होंने बताया कि बुजुर्गों से सुनता रहा हूं कि इस ऐतिहासिक स्थल तक आने के लिए बंधा वाला पतली सड़क थी। खजूर बन्नी था। महात्मा गांधी के आने के बाद से ही इस सड़क के स्वरूप में परिवर्तन हुआ और आज नाला सहित पीसीसी चौड़ी सड़क है। बिजली ,पानी, लाइट इत्यादि की सुविधा भी है। इसी क्रम में बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारी डॉ अजय कुमार अलंकार जो इस गांधी आश्रम मोहल्ला की ही लगभग 60 साल पुराने बाशिंदे हैं, ने बतलाया कि बापू के आगमन के कारण इस स्थल का काफी महत्व है। यह भी कहा कि कई इतिहासकारों ने भी इसकी चर्चा की है।उन्होंने बताया कि बचपन के दिनों में इस ऐतिहासिक परिसर में खेलने- कूदने जाते थे, जहां आज सुंदर तम पार्क है। अपने स्वर्गीय पिता ब्रजकिशोर शर्मा जो इस शहर के वरिष्ठ अधिवक्ता थे ,की बातों को याद करते हुए कहा कि पिताजी के कथनानुसार इस ऐतिहासिक स्थल तक आने के लिए पतली कच्ची सड़क थी। बापू के आगमन के बाद से ही विकास हुआ और आज नाला सहित पीसीसी सड़क है, बिजली-पानी भी। इस क्रम में लगभग 55 वर्षीय अशोक कुमार सिन्हा ने बताया की बहुत गर्व महसूस करते हैं कि बापू के नाम पर स्थापित गांधी आश्रम मोहल्ला के लगभग 55 साल पुराने बाशिंदे हैं और सदियों तक आवाद रहना चाहते हैं। उन्होंने यह भी बतलाया कि सुनते आये हैं कि पहले इस ऐतिहासिक मोहल्ला में पतली कच्ची सड़क थी और आज चौड़ी सड़क है जिसके दोनों छोर पर 55-60साल पुराने बाशिंदे के मकान हैं। नाला सहित पीसीसी सड़क। बिजली ,पानी की भी सुविधा है। गांधी आश्रम मोहल्ला के लगभग 60साल पुराने बाशिंदे हरिहर प्रसाद सिन्हा’गुड्डू'(फिल्म बाबू) ने गर्व महसूस करते हुए कहा कि हाजीपुर रेलवे स्टेशन से समीप इस मोहल्ले में सुरक्षा की दृष्टिकोण से यदि सीसीटीवी कैमरे चौक- चौराहे पर लग जाए तो अच्छा होता। इस मोहल्ले के विजय कुमार ‘लड्डू’ ने बताया कि पहले यह मोहल्ला नगरपालिका के वार्ड नंबर 4 में था उसके बाद वार्ड नंबर 8 में हुआ और आज नगरपरिषद के वार्ड नंबर 22 में अवस्थित है। इसी मोहल्ला के लगभग 60 साल पुराने बाशिंदे प्रोफेसर अमरेश श्रीवास्तव ‘लड्डू’ ने बताया कि गांधी जी का आगमन इस मोहल्ले के लिए एक सुखद संयोग था और सभी लोग इस बात के लिए गर्व और खुशी महसूस करते हैं। इसी मोहल्ला के अनंत कुमार (आरसीएम परिवार )ने बतलाया कि कई पीढ़ी से वे यहां के बाशिंदे हैं और काफी गर्व है कि बापू यहां पधारे थे। उनके चाचा स्वर्गीय राम अयोध्या राय स्वतंत्रता सेनानी थे जो कहते थे कि बापू के आगमन से यह मोहल्ला ,शहर और जिला गौरवान्वित हुआ। इस मोहल्ला में कुछ ही घर था, एकपैरिया रास्ता था और बहुसंख्यक खजूर पेड़ तथा अमरुदबन्नी था और आज विकास के क्रम में पीसीसी चौड़ी सड़क नाला सहित है। बिजली, पानी तथा लाइट की व्यवस्था है। उन्होंने गांधी आश्रम ऐतिहासिक परिसर से सटे उत्तर खादी ग्राम उद्योग भवन की जर्जर स्थिति पर चिंता जताई और कहा कि काश कोई उद्धारक मिल जाता । इस ऐतिहासिक स्थल से लगभग 100 मीटर की दूरी पर स्थित स्थाई निवासी रंजीत कुमार अधिवक्ता) ने कहा कि इस ऐतिहासिक स्थल से वैशाली जिला गौरवान्वित महसूस करता है ।यहां आज भी इस शहर के बुद्धिजीवी कोई- न -कोई कार्यक्रम या बैठक करते रहते हैं ।उन्होंने बताया कि इनके दादा नंदलाल राय कहते थे कि स्टेशन से यहां तक आने की सड़क बंन्हा था अर्थात् एकपैरिया रास्ता ,पतली सड़क थी।और बापू के पधारने के बाद से ही यहां पर विकास होता गया। इस ऐतिहासिक स्थल से सटे पूरब दिशा में कई पीढ़ी से अवस्थित राजेश कुमार शर्मा ( समाजसेवी) ने बतलाया कि बापू सहित कई महान क्रांतिकारियों स्वतंत्रता सेनानियों के कदम यहां पड़े।काफी गर्व और सौभाग्य का विषय है। खासकर इस ऐतिहासिक स्थल से सटे पूर्व उनका पैतृक निवास है। यहां पर कई पीढ़ी से बरसों पुराने बाशिंदे बासकित राय(समाजसेवी तथा संवेदक) ने भी हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि सौभाग्यशाली हैं वे कि इस ऐतिहासिक स्थल के आसपास ही उनका निवास स्थान है। उन्होंने भी पूर्व काल में यहां की पगडंडी वाली सड़क की बात की और कहा कि आज काफी विकास हुआ है। इनके अतिरिक्त जिन लोगों ने गांधी आश्रम मोहल्ला के निवासी होने पर गर्व महसूस किया उनमें कई नाम हैं यथा- डॉक्टर रंजन ( प्रसिद्ध फिजियोथेरेपिस्ट), डॉक्टर कुमारी लक्ष्मी (डेंटल सर्जन), मदन मोहन मिश्रा, प्रोफेसर जयंत कुमार, सतीश कुमार जायसवाल (समाजसेवी), मनोरंजन वर्मा (वरिष्ठ रंगकर्मी), भोला नाथ ठाकुर (साहित्यसेवी सह सचिव गांधी स्मारक पुस्तकालय), संजीव कुमार ‘बेबी भाई’, त्रिवेणी कुमार (अध्यक्ष, शैक्षिक महासंघ वैशाली), प्रमोद कुमार सिन्हा, अनिल कुमार ( गांधी आश्रम पूर्वी छोर), विश्वनाथ प्रताप सिंह (कर्मचारी, स्वास्थ्य विभाग), अजीत कुमार (किराना दुकानदार), अशोक कुमार राय,पवन कुमार, प्रभात कुमार सिंह, भूषण सिंह (स्वतंत्रता सेनानी के पुत्र), अनिल लोदीपुरी(साहित्यसेवी), तथा डॉक्टर नलिनी कुमार ( होम्योपैथी चिकित्सक) ने भी अपनी भावना जताई। निःसंदेह इन प्राचीन निवासियों की भावना यह दर्शाती है कि वे सभी गौरवान्वित महसूस करते हैं और सदियों तक आवाद रहना चाहते हैं। तो इन निवासियों की पुनीत भावना पर किसी पूर्वाग्रहीअथवा असामाजिक तत्वों की कुदृष्टि ना पड़े ।यही कामना करता हूं और शासन- प्रशासन से भी विनीत आग्रह है कि गांधी आश्रम मोहल्ला के प्राचीन निवासियों की पुनीत भावना की कद्र हो सके और वे सब- के -सब जिस बात के लिए गर्व और खुशी महसूस करते हैं, वह सदियों तक गौरव बना रहे और सुरक्षित रह कर जीवन व्यतीत कर सकें।