•सुशासनी राज्य बिहार में सुशासन का चीरहरण करता है ये सीवान का भ्रष्ट अधिकारी
दैनिक खोज ख़बर के लिये श्रीनारद सेवा संवाद-सीवान उमेश कुमार के साथ धनंजय पांडेय की रेपोर्ट सीवान : जिले के पचरुखी अंचल को भ्रष्टाचार अपने मकड़जाल में पूरी तरह जकड़ चूका है।इस बात का खुलासा तब हुआ जब सोसल मिडिया में पचरुखी सीआई द्वारा अपने ही हल्का कर्मचारी से अवैध वसूली करते हुवे एक वीडियो वायरल होने लगा।मगर उक्त सीआई की कथित पहुच तो देखिये, विगत तीन दिनों से चर्चा का विषय बने उक्त वीडियो जैसे साक्ष्य के बावजूद भी सीआई शम्भूनाथ चौधरी अपने पद पर बने हुवे हैं।
यह तो सभी जानते हैं कि और अक्सर ये देखा जाता रहा है कि बिना रिश्वत दिए आमलोगों का कोई काम नहीं होता है।पूर्व प्रधानमंत्री स्व• राजीव गांधी ने कहा था कि सरकार से चलने वाला एक रूपया जनता तक पहुंचते-पहुंचते 15 पैसा रह जाता है।भ्रष्टाचार पर शोध करने वाली संस्थाओं का कहना है कि भ्रष्टाचार ऊपर से नीचे की तरफ फैलता है।रिश्वतखोरी का यह सिस्टम ऐसा है जिसमें रिश्वत का माल ऊपर तक पहुंचता है।
सिवान के पचरुखी प्रखंड में ऐसा ही मामला सामने आया है।जिसमें अंचल निरीक्षक सह कानूनगो शंभूनाथ चौधरी जिनका काम प्रखंड में हो रहे विकास कार्यो का निरीक्षण करना और कानून के मुताबिक सही काम कराना है ।मगर वायरल वीडियो में ये महोदय अपनी पद की गरिमा को ताक पर रख कर खुद कैसे कानून भूल गए ,और कैसे अपने की अंचल के एक हल्का कर्मचारी से रिश्वत ले रहे हैं।और तो और जब रिश्वत की रकम कम मिलती है तो जनाब बदलते जमाना का हवाला देकर रकम बढाने की बाते कहते हुए ये कहते है कि रासन-पानी बंद कर देंगे। हमको माल चाहिए । 
वही दूसरी तरफ से मिमियाते हुवे कमचारी की ये आवाज आती है कि सर…ऐसा कमाइये कि जो दे उसका भी भला…और जो न दे उसका भी भला… अब सिवान DCLR के ड्राईवर का पैरवी था ।एक रुपया भी नहीं मिला। ये तस्वीर और कर्मचारी अधिकारियों के बीच की बातें ये साबित करती है की इस प्रखंड का पूरा सिस्टम भ्रष्ट है और लोग इससे त्रस्त हैं।
इस संबंध में बड़हरिया विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी समाजसेवी उमेश कुमार सिंह का कहना है कि मैंने दाखिल खारिज के लिए पचरुखी हल्का कर्मचारी सीताराम प्रसाद को दिया था।परंतु पैसे के अभाव में नहीं किया गया।यहां पर दो हजार से लेकर 5 हजार,10हजार तक रूपये लिए जाते हैं।दूसरे कार्यों में भी अवैध वसूली भी की जाती है।
वायरल वीडियो के कुछ खास अंश…
अंचल निरीक्षक(रूपये गिनने के बाद) :-कितना है…?
हल्का कर्मचारी :-….दस गो है…
अंचल निरीक्षक :- पुरानका जमाना छोड़िये…नयका जमाना में आईए….
कर्मचारी:-सीधी तरह से बैठ के कमाइये….जो दे उसका भी भला जो न दे उसका भी भला…
अंचल निरीक्षक :- हउ…राशन-तेल नहीं मिलने देंगे….हमको चाहिए….हमको माल चाहिए।
(फिर बात कुछ और आगे बढ़ती है इसके बाद वीडियो में तरवारा हल्का कर्मचारी नाजबुल हक दीखते हैं…और वसूली नही होने का रोना रोने लगते हैं)
हल्का कर्मचारी :- देखिये…एक पैरवी आ गया सलाउद्दीन का ….डीसीएलआर के ड्राइवर का….एक रुपया नहीं दिया…
अंचल निरीक्षक :-सलाउद्दीन…?
(फिर अवैध वसूली संबंधी और भी बातें होती हैं…)