सिवान : कारण एक… स्पष्टीकरण एक…तो फिर नियमित का वेतन क्यों बांटा और नियोजित का वेतन क्यों काटा
✍कुमार विपेंद्र
👉जानिए हाल पचरुखी प्रखंड के शिक्षा विभाग का
सिवान : “एक तो अत्यंत कम वेतन और उसपर से भी छह -छह माह के बाद भुगतान।यह बिहार के नियोजित शिक्षकों की पीड़ा है।उस पर से भी शोषण का फंडा इतना कि लगता है कि शिक्षक बन कर ही गुनाह कर दिएं हैं।” उक्त बातें शिक्षक नेता जयप्रकश सिंह ने कहीं।
शिक्षक नेता श्री सिंह का कहना है कि बिहार में शिक्षकों में कई कैटैगरी(श्रेणी) हैं।लेकिन फिलहाल दो श्रेणी है।नियमित शिक्षक और नियोजित शिक्षक।
👉जानिए पूरा मामला…
विगत मार्च माह में पूरे सूबे में जोर-शोर से छात्रों का मूल्यांकन कार्य चला था।जिसमें संकुल स्तर पर कापियों का मूल्यांकन करना था।जिसमें संकुल समन्वयकों को अपने संकुलाधीन विद्यालय के शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति कर मूल्यांकन कार्य संपन्न कराना था।

पचरूखी प्रखंड के मध्य विद्यालय गम्हरिया के समन्वयक अजय कुमार के द्वारा प्रतिनियुक्त शिक्षकों में से कुल 17 शिक्षक समय से योगदान नहीं कर पाये।इसमें से मध्य विद्यालय पचरुखी के ही कुल 14 शिक्षक तथा शेष तीन अन्य विद्यालयों के थे।संकुल समन्वयक के द्वारा भेजे गये प्रतिवेदन पर तत्कालीन डीपीओ राजकुमार ने इन सबसे स्पष्टीकरण की मांग की।मध्य विद्यालय पचरूखी के 14 शिक्षकों ने सामूहिक रूप से स्पष्टीकरण में कहा कि विद्यालय में एक दिन पहले रसोई घर में आग लग गयी थी।इसकी अफरा-तफरी और व्यवस्था में विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने एक दिन बाद इन शिक्षकों को विरमित किया।इसके बावजूद इसमें से गिन-गिन कर नियमित शिक्षकों का वेतन भुगतान हो गया और नियोजित शिक्षकों का वेतन कट गया।

👉सवाल ये भी है…
एक समय में एक शिक्षक दो जगह कार्यरत कैसे रह सकता है ?
वहीं प्राथमिक विद्यालय चांदपुर के दीपक कुमार का स्पष्टीकरण देखा जाए तो यह स्पष्ट होता है कि वे उक्त दिन प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के आदेश से प्रखंड कार्यालय पर बुलाई गयी बीएलओ की मीटिंग में थे।इस बात को स्वयं बीडीओ ने लिखित रूप में दिया है।बावजूद इसके इनका एक दिन का वेतन काट लिया गया है।सारी घटनाओं को देखा जाए तो एक बात उभर कर सामने आती है कि एक ही तरह के मामले में नियमित शिक्षकों का वेतन नहीं काटा गया है ।जबकि नियोजित शिक्षकों का काटा गया है।





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