नौ दिवसीय शतचण्डी महायज्ञ का चौथा दिन
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साकार निराकार से परे है परमात्मा -: गोबिंद जी महाराज
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डोरीगंज-:
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पूर्वी तेलपा छपरा में चल रहे शतचण्डी महायज्ञ के चौथे दिन संत श्री गोविन्द जी महाराज जी ने सृष्टि वर्णन करते हुये कहा की सत्य और असत्य ,साकार और निराकार इन सबसे परे है परमात्मा। उत्तम पुरुष परमात्मा का वास्तविक स्वरूप प्राकृतिक आकर रहित बिलक्षण आकरवन्त और समस्त ब्रह्मलोक के बाहर एवम् भीतर परिपूर्ण है ।वे जन्म मरण आदि विकारो से रहित ,आदि अनादि सर्वथा विशुद्ध है ।वे दिव्य प्राण स्वरूप ,दिव्य मन स्वरूप शुद्ध साकार स्वरूपी पुरुषोत्तम परमात्मा सच्चिदानन्द गुणयुक्त सत् अक्षर ब्रह्म से भी परे अक्षरातीत पुरुषोत्तम अपने दिव्य ब्रह्मपुर ब्रह्मधाम परमधाम में विराजमान है।वे ही परमात्मा ने अपनी आत्माओ को दुःख का खेल नश्वर जगत दिखाने की इच्छा किये और सत् अक्षर ब्रह्म के द्वारा पञ्च तत्व तीन गुण ग्यारह इंद्रिया और इनके अभिमानी देव इन सबके द्वारा असत् जगत स्वरूप पिंड और ब्रह्माण्ड  की उत्पत्ति कराई ।जिसमे ब्रह्माण्ड रूपी अंडा को फोड़कर सृष्टि का प्रथम जीव आदि नारायण की उत्पत्ति हुई ।और आदि नारायण ने परमात्मा की इच्छा से इस सृष्टि का विस्तार किया जिसमे बिभिन्न लोक परलोक उतपन्न हुये ।और संसार के अज्ञानी मनुष्य उत्तम पुरुष को छोड़कर इन्ही लोक लोकान्तरों में फस जाते है
इस अवसर पर समिति के सभी सदस्य और भक्त उपस्थित थे मिंटू सिंह ,प्रोफेसर मनोज यादव ,अखिलेश सिंह आदि उपस्तिथ थे