सारण :कपालभांति से घटेगा शरीर का वजन-गोविन्द जी महाराज

#रिपोर्ट -सुरभि कुमारी
तरैया:03अप्रैल 2018
वाईडीबीएस कॉलेज परिसर में आयोजित संगीतमय भागवत कथा और योग विज्ञान शिविर के तीसरे दिन मंगलवार को
श्री कृष्ण प्रणामी धर्म श्री निजानंद सम्प्रदाय के संत गोविंद जी महाराज ने सुबह योग शिविर के दौरान बारह योगिंग जॉगिंग ,बारह सूर्य नमस्कार,बारह दंड, आठ बैठक , वजन कम करने हेतु साइकिलिंग क्रिया , पाद वृक्त आसन एवं अन्य विभिन्न आसन सैकड़ो लोगो को सिखाया। सूर्य मुद्रा में कम से कम अन्य प्राणायामों के साथ 15 मिनट कपालभांति किया जाए तो जल्द ही वजन घटाया जा सकता है। योग की चर्चा करते हुए गोविंद जी महाराज ने कहा कि योग मानव को स्वस्थ्य रहने का मूल आधार है योग करने वाला व्यक्ति स्वस्थ्य रहते हुए दीर्घायु को प्राप्त करता हैं ।नियमित योग के आठो अंगों का पालन करने से पाप करने की प्रवृति समाप्त हो जाती है साथ ही ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए योग को धारण करने से अष्टचक्रो का जागरण कर लेने से वह पवित्र आत्मा प्रकृति से परे कैवल्य पद को प्राप्त कर लेता है।
*सम्पूर्ण सृष्टि के मूल आधार अविनाशी अक्षर ब्रह्म है:गोविन्द जी महाराज*
संगीतमय भागवत कथा के तीसरे दिन संध्या को भागवत कथा के दौरान सृष्टि वर्णन और सनातन ब्रह्म का चर्चा करते हुए गोविंद जी महाराज ने कहा कि यह सम्पूर्ण सृष्टि के मूल आधार अविनाशी अक्षर ब्रह्म है यजुर्वेद के अनुसार अक्षर ब्रह्म के चार पद अव्याकृत,सबलिक,केवल,और सत्यस्वरूप है । एक पद अव्याकृत ब्रह्म माया के सम्पर्क में आकर सृष्टि रचना में प्रवृत्त होते है। सृष्टि के प्रारम्भ में अव्याकृत अक्षर ब्रह्म का प्रतिबिंब इस मोह रूपी समुद्र में पड़ा वह प्रतिबिम्ब निर्जीव अंड रूप से मोहसागर में हजारों वर्षों तक तैरता रहा फिर काल कर्म स्वभाव को स्वीकार करने वाले अव्याकृत अक्षर ब्रह्म ने पांच तत्व,पंचतन्मात्रा,दस इंद्रिया,तीन गुणों के निर्माण कर एक सुवर्ण अंड को निर्मित कर उस निर्जीव अंडे प्रवेश किया उसी समय वह अंडा फूटा यानी विस्फोट को प्राप्त हुआ। उसी को आज का आधुनिक विज्ञान बिग बैंक कहता है। उस अंडे को फोड़कर सृष्टि का प्रथम जीव आदि नारायण की उतपति हुई और इस आदि नारायण से करोड़ो ब्रह्मांड उतपन्न हुआ प्रत्येक ब्रह्माण्ड में अलग अलग शेषशायी नारायण ,आदिशक्ति ब्रह्मा ,विष्णु ,महादेव,आदि उत्पन्न हुए और संसार विस्तार को प्राप्त हुआ। अतः जो कुछ उत्पन्न हुआ है वह सब सत्य नही असत्य है महाप्रलय के समय सभी नाश को प्राप्त हो जाते हैं ।इसलिये विद्वान पुरुष क्षर और अक्षर से उत्तम पुरुष अक्षरातीत पुरुषोत्तम को अनन्य प्रेम लक्षणा भक्ति द्वारा भजन करते हैं उत्तम पुरुष अक्षरातीत श्री कृष्ण ही सभी आत्माओ के स्वामी है इन्ही के भजन से निजआत्माओ को अपने निजधाम परमधाम की प्राप्ति होती है।