मांझी। रिविलगंज के गोरिया छपरा सेमरिया श्मशानघाट स्थित मठ के संत श्री श्री 1008 ब्रह्मचारी बाबा उर्फ संत जगदीश दास (75) वर्ष का निधन बुधवार की रात हो गया। निधन की खबर मिलते ही आश्रम में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। ब्रह्मचारी बाबा के निधन क्षेत्र में शोक की लहर है। गुरुवार को हजारों की संख्या में आश्रम पहूंचे लोगों ने बाबा का अंतिम दर्शन कर अश्रुपूर्ण नयनों से श्रद्धांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। आश्रम सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बाबा के पार्थिव शरीर को शुक्रवार को समाधि शुक्रवार को समाधि दी जाएगी। दूर- दराजी शिष्यों का आना-जाना एवं दर्शन करना जारी है। विदित हो कि ब्रम्हलीन संत सरयू दास जी महाराज उर्फ़ सीसवनिया बाबा के परम शिष्य संत जगदीस दास उर्फ ब्रह्मचारी बाबा मूल रूप से भादपा गाँव के संत स्व आत्मा राम दास के पुत्र थे। दस वर्ष के उम्र में ही उन्होंने घर-परिवार को त्यागकर बाल ब्रह्मचर्य ग्रहण कर लिया था। कहा जाता है कि ब्रह्मचारी बाबा 65 वर्षों से आज तक आश्रम से बहार कभी निकले ही नहीं थे। रोग व्याधि होने पर भी चिकित्सक ही खुद जरुरी उपकरणों के साथ आश्रम में जाकर ही उनका इलाज किया करते थे। कुछ खास नजदीकी शिष्यों की माने तो बाबा साल में एक दिन स्नान करने सरयू नदी में जाते थे। लेकिन कब और किस वक्त जाते आज तक किसी ने नहीं देखा है। ब्रह्मचारी बाबा को “सीताराम” नाम से अटूट प्रेम था। कुछ बोलने से पहले उनके श्री मुख से सीताराम नाम ही निकलता था। प्रत्येक माह के दोनों एकादशी तिथि के दिन आश्रम में चौबीस घंटे का सीताराम नाम का संकीर्तन चलता था। तथा एकादशी व्रत करने वाले सैकड़ों श्रद्धालु मन्दिर परिसर में पारन।भोजन। ग्रहण करते थे। अपने गुरुदेव की पुण्यतिथि के अवसर पर प्रत्येक वर्ष यहां मठ में भंडारे का आयोजन ब्रह्मचारी बाबा करते थे जिसमें हजारों लोग शामिल होते थे। गाय,भैस या किसी जानवर के बीमार होने पर क्षेत्र के दूर दूर के लोग ब्रह्मचारी के पास आते थे और बाबा के गुरु जी द्वारा करीब डेढ़ सौ वर्ष पूर्व प्रज्ज्वलित हवन कुंड द्वारा हवन की राख।विभूति। और देशी दवा द्वारा जानवर ठीक हो जाते थे। बताते हैं कि हवन कुंड अनवरत प्रज्ज्वलित रहता है। सेमरिया श्मशानघाट पर बाबा के आश्रम में भक्तों का हमेशा आना जाना लगा रहता था। कहते हैं कि बाबा अपनी योग विद्या के बलबूते भक्तों के भविष्य की सटीक गणना भी करते थे। बाबा के ब्रम्हलीन होने के बाद मठ के उत्तराधिकारी को लेकर संशय बना हुआ है। भक्तों का कहना है कि मठ से जुड़े भक्तगण व साधु संत उत्तराधिकारी की समस्या का निदान करेंगे।