शादी के एक सप्ताह बाद से गुम युवक 13 साल बाद मिला परिजनों को पागल रूप में, ले गए घर
 

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मशरक से रोहित कश्यप की रिपोर्ट 
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 थाना क्षेत्र के तरैया बाजार पर करीब 10 वर्षों से पागलों की भांति घूमता एक युवक को उस समय सहारा मिल गया जब उसकी बुआ ने उसे अपने भतीजे के रूप में पहचान की। जानकारी के अनुसार मसरख थाना क्षेत्र के कवलपुरा निवासी विजय कुमार सिंह का पुत्र रुपेश कुमार सिंह की शादी 7 जून 2004 को हुई थी। शादी के छः दिन बाद रुपेश किसी काम को लेकर मसरख बाजार गया और उस दिन से वह लापता हो गया। परिजन रुपेश को कहां कहां नहीं ढूंढे। थक हार कर वे निश्चिंत हो गए हैं कि अब रुपेश इस दुनिया में नहीं है। लेकिन बुधवार को अचानक रुपेश के जीवन में एक नया मोड़ आ गया। जब उसकी विकलांग बुआ उसे तरैया में अपने लापता भतीजे के रूप में पहचान की। रुपेश की बुआ ने लोगों के सहयोग से उसके शरीर पर लपेटे कपड़ा को हटवाया छौर कर्म(दाढ़ी हजामत) कराया तथा स्नान कराकर नया कपड़ा पहना कर उसे अपने घर ले गई। जानकारी के लिए बता दें की करीब 10 साल पूर्व तरैया में एक युवक आया जो पागलों की भांति इधर-उधर घूमता था। किसी से कोई बात नहीं करता था। इशारा से बात करता था। किसी दुकानदार ने कुछ दे दिया तो वह खा लेता और खदरा नदी किनारे स्थित वाईडीबीएस कॉलेज परिसर में रात गुजारता था। पुनः सुबह होते ही बाजार के इर्द-गिर्द घूमता दिख जाता था। कितने लोगों ने इस युवक के द्वारा जासूसी करने का भी अंदेशा लगाते सुना जाता था। ईधर दो-तीन वर्षों से वह लोगों से कुछ बातें करते देखा जाता था। दुकानदार से कभी पान, कभी मिठाई तो कभी पैसा मांगता था। जिसे कपड़े के पोटली में बांधकर शरीर में लपेट लेता था। उसकी दशा को देख दो वर्ष पूर्व कुछ स्थानीय नेताओं ने उसका बाल कटवाकर नए कपड़े भी दिए थे। परंतु फिर वह उसी ढर्रे पर अपना जीवन व्यतीत करने लगा।  परंतु ईश्वर ने करीब 13 साल बाद उसे अपनों से मिला दिया। जिसे पाकर उसकी बुआ समेत उस परिवार के सभी सदस्य  फूले नहीं समा रहे थे। मसरख कवलपूरा से मात्र आठ-दस किलोमीटर की दूरी पर यह युवक करीब 10 वर्ष से पागलों की भांति घूम रहा था। उधर उसके  परिजन कहां-कहां नहीं ढूंढ रहे थे। उक्त युवक की पहचान रुपेश कुमार सिंह के रूप में होने पर तथा उसे परिजनों द्वारा अपने साथ ले जाने पर व्यवसायी व  अन्य लोगों ने इसे ईश्वर का चमत्कार बताया।