राजस्थान में दिल पर पत्थर रख 1.3 प्रतिशत लोगों ने नोटा को डाला वोट, 15 सीटों पर हार-जीत के अंतर से अधिक नोटा के खाते में पड़े वोट

दैनिक खोज ख़बर, चुनाव डेस्क/मनोकामना सिंह : राजस्थान में 1.3 प्रतिशत वोट नोटा को पड़े, इसे कहा जाए की लोगों ने दिल पर पत्थर रख नोटा को वोट डाला तो अतिशयोक्ति नहीं होनी चाहिये.क्योंकि नोटा का प्रयोग सरकार से नाराजगी के रूप में देखा जाता हैं.मतदाताओ ने विधानसभा चुनाव के परिणाम में 15 सीटों पर नोटा का जोर रहा.जहां जीत-हार के अंतर से अधिक वोट नोटा के खाते में पड़े.इससे चुनाव विश्लेषक भाजपा का नुकसान बता रहे हैं.हलांकि कई सीटों को नोटा के इस्तेमाल के बाद भी भाजपा अपनी सीटें बचाने में कामयाब रही.लेकिन समीक्षकों का तर्क हैं की सवर्ण युवा मतदाता चुनाव पूर्व कुछ मुद्दों पर भाजपा का विरोध कर नोटा का भय दिखा रहे थे.जिसकों लेकर भाजपा के राज्य स्तरीय नेता आलाकमान के भय से मुंह नहीं खोल रहे थे, जबकि क्षेत्रो में नेताओं को युवाओं का विरोध भी झेलना पड़ा था.फिर भी पार्टी लाइन के खिलाफ सार्वजनिक रूप से पार्टी आलाकमान के विरोध में मुखर नहीं हुये.जिसका नतीजा युवाओं ने रही सही कसर को दिल पर पत्थर रख नोटा का बटन दबाकर अपना विरोध जाता दिया.जिसका नतीजा सामनें हैं.
वसुंधरा राजे के सरकार में कद्दावर व कैबिनेट मंत्री रहे काली चरण सराफ को 1704 मतों से तो जीत मिल गयीं.लेकिन उससे अधिक 2371 मत नोटा के खाते में गये.आसिन्द विधानसभा से भाजपा के उम्मीदवार जब्बार सिंह खंखला 154 मतों से अपनि सीट बचा ली.लेकिन वहां भी नोटा के खाते में 2943 मत पड़े.इसके अलवा घाटोल, बूंदी, पीलीबंगा, मालवीय नगर, चौमू, पोकरण, खानपुर, मारवाड़ जंक्शन, मकराना, खेतरी, दांतारामगढ़, फतेहपुर ऐसे विधानसभा क्षेत्र हैं जहां जीत-हार से कहीं अधिक वोट नोटा के खाते में पड़े.सबसे अधिक नोटा को वोट 11002 कुशलगढ़ विधानसभा में पड़े,हालंकि यहां पर जीत हार का अंतर 18950 वोटो का था.
दरअसल, नोटा को 1.3 फीसदी वोट मिले, जिन्हें सरकार के खिलाफ नाराजगी का इशारा माना जाता है। राजस्थान के मुख्य निर्वाचन अधिकारी आनंद कुमार ने बुधवार को बताया था कि 4,67,781 लाख वोट नोटा में पड़े थे। बीजेपी को जहां 38.8 फीसदी वोट मिले वहीं कांग्रेस को महज 0.5 फीसदी ज्यादा 39.3 फीसदी वोट मिले। कांग्रेस को बीजेपी से करीब 1.70 लाख वोट ज्यादा मिले। वहीं, इस बार नोटा को गए वोटों से पता चलता है कि बीजेपी ने कांग्रेस के हाथ 5.6% वोट शेयर तो गंवाया लेकिन 1.65% का नुकसान नोटा की वजह से भी हुआ। नोटा को सरकार से नाराजगी के रूप में देखा जाता है।
राजस्थान में दिल पर पत्थर रख 1.3 प्रतिशत लोगों ने नोटा को डाला वोट, 15 सीटों पर हार-जीत के अंतर से अधिक नोटा के खाते में पड़े वोट




Recent Comments