
*राजद के बाहुबली नेता प्रभुनाथ सिंह को हजारीबाग न्यायालय ने सुनवाई उम्र कैद सजा*
✍नवीन सिंह परमार
♨राजद के बाहुबली नेता व महाराजगंज के पूर्व सांसद प्रभुनाथ सिंह को मंगलवार को हजारीबाग न्यायालय ने 22 वर्ष पहले हुए एक हत्याकांड में उन्हें उम्रकैद की सजा सुनायी है. हजारीबाग के एडीजे 9 के सरेंद्र शर्मा की कोर्ट में हुई सुनवाई में प्रभुनाथ सिंह के साथ ही उनके भाई दीनानाथ सिंह व सहयोगी रितेश सिंह को भी उम्रकैद की सजा सुनायी गयी है. इसके अलावा 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. इससे उनके परिवार के लोगों व समर्थकों में काफी मायूसी है. वहीं पीड़ित परिवार के लोग फैसले से संतुष्ट हैं, लेकिन उनका मानना है कि प्रभुनाथ सिंह को उम्रकैद की सजा मिलनी चाहिए. पत्नी चांदनी सिंह ने मीडिया को बताया कि प्रभुनाथ सिंह को फांसी की सजा मिलनी चाहिए थी. हालांकि उम्रकैद की सजा से थोड़ी राहत मिली है. एक विधवा को न्याय मिला है.
मशरख के विधायक अशोक सिंह की हत्या उनके ही सरकारी आवास पर बम मार कर दी गयी थी. तब अशोक सिंह जनता दल के विधायक थे. विधायक अशोक सिंह की घटनास्थल पर ही मौत हो गयी थी. इतना ही नहीं, अशोक सिंह से मिलने आये अनिल कुमार सिंह भी घटना में मारा गया था. इस मामले में अशोक सिंह की पत्नी चांदनी सिंह ने प्रभुनाथ सिंह के खिलाफ केस दर्ज कराया था.
दिवंगत अशोक सिंह की पत्नी चांदनी देवी प्रभुनाथ सिंह समेत उनके भाई दीनानाथ सिंह को भी आरोपी बनाया गया था. इन्वेस्टिगेशन में प्रभुनाथ सिंह के एक और भाई केदार सिंह समेत रितेश सिंह और सुधीर सिंह का भी नाम सामने आया. इस मामले की सुनवाई पटना उच्च न्यायालय में चल रही थी. वर्ष 1997 में पटना उच्च न्यायालय ने केस को हजारीबाग न्यायालय में ट्रांसफर कर दिया गया था. कुछ दिनों के लिए इसकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में भी हुई. बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले की सुनवाई फिर से हजारीबाग कोर्ट में हुई. इसी मामले की सुनवाई करते हुए 18 मई को हजारीबाग कोर्ट ने प्रभुनाथ सिंह समेत अन्य को दोषी करार दिया था और मंगलवार को इसमें उम्रकैद की सजा सुनायी गयी.
गौरतलब हो कि प्रभुनाथ सिंह एक मामले में गिरफ्तार कर छपरा जेल भेजा गया था. छपरा जेल में प्रभुनाथ सिंह के रहते वहां कानून व्यवस्था बिगड़ने लगी थी. इसके चलते उनको हजारीबाग जेल में शिफ्ट कर दिया गया था. उस समय झारखंड अलग राज्य नहीं बना था. बाद में प्रभुनाथ सिंह को जमानत हो गयी थी. इसके बाद प्रभुनाथ सिंह के आवेदन पर ही हजारीबाग कोर्ट में इस केस का ट्रायल चला और 22 वर्षों के बाद सुनवाई पूरी हुई.
*✏इनपुट: श्रीनारद मीडिया- हजारीबाग ब्यूरो*




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