राखी की दूकानें सजी, रंग-बिरंगे राखियां खरीदने उमड़ी बहनों की भीड़

#संजय विजित्वर (हाजीपुर)-राखी की दूकानें सजी। रंग-बिरंगे राखियां खरीदने उमड़ी बहनों की भीड़। रक्षाबंधन का पावन त्योहार का दिन इस वर्ष १५अगस्त को यानी स्वतंत्रता-दिवस के दिन है ।आज बाजार में विशेष रूप से बहनों की भीड़ राखी और मिष्ठान की दूकानों पर दिखाई पड़ी ।साथ ही तिरंगा झंडा भी कई दूकानों में सजी हुई दिखाई पड़ी। बच्चे,युवा और उनके अभिभावकों की भीड़ भी रही ।स्थानीय रामाशीष चौक ,स्टेशन चौक, अनवरपुर चौक,राजेन्द्रचौक, गांधी चौक,गुदरी रोड,मस्जिद चौक आदि प्रमुख स्थानों पर राखी की दर्जनों दूकानें सजी हुई मिली जहां बहनों की भीड़ हर दूकान पर दिखाई पड़ी।विभिन्न डिजाइनों में राखी ,दूकानों में सजी हैं। बहनें अपनी मनपसंद राखी की खरीदारी में तन्मय और उत्सुक दिखाई पड़ रही हैं । बहनें उत्सुक क्यों न हों,अपने भाई की कलाई पर राखी जो बांधनी है ।राखी अर्थात् ऐसा रक्षासूत्र जो भाइयों की कलाई पर बांधकर उनके दीर्घायु और सुखद जीवन की कामना करती हैं साथ ही स्वयं के रक्षार्थ भाई से वचन लेती हैं ।भाई का मुंह मीठा अपने हाथों मिष्ठान खिलाकर करती हैं।भाई अपनी बहनों को नेग स्वरूप पैसे,सामान, कपड़े तथा आभूषण भी देते हैं ।ऐसी मान्यता है कि बहनों से राखी बिना नेग अर्थात् उपहार दिए नहीं बंधाई जाती है ।राखी के बारे में एक कथा जो काफी चर्चित है कि मुगल बादशाह हुमायूं को रानी करमवती ने अपने राज्य के रक्षार्थ राखी भेजी थी और बादशाह हुमायूं राखी की महत्ता जानकर काफी प्रसन्न हुए थे और रानी करमवती की रक्षा करने का वचन भी दिया था साथ ही आक्रमण होने पर मदद के लिए अपनी सेना को भी भेजा था। सावन की पूर्णिमा को मनाए जाने वाले इस त्योहार में पंडित भी अपने यजमानों को रक्षा सूत्र बांधते हैं, बर्षों से यह परंपरा रही है।इस वर्ष यह सुखद संयोग है कि राखी का त्यौहार और स्वतंत्रता दिवस का त्यौहार एक साथ एक दिन ही पड़ा है। इस दिन सभी भाई अपनी बहनों की रक्षा के लिए वचन देगा ,वहीं दूसरी ओर देश का हर नागरिक अपने देश की एकता और अखंडता के लिए मन -मस्तिष्क से पूरी निष्ठा के साथ राष्ट्रीय ध्वज के नीचे यह वचन लेगा कि हमारा भारत सदियों तक अखंड रहे तथा प्रेम और सौहार्द्र हर पल बना रहे।