मृत्यु भोज खाना महा पाप है- वीर आदित्य

वीर आदित्य, संस्थापक मानव आर्मी/ग्राम असोइया(मढ़ौरा),सारण।

मेरे दादा जी दो भाई थे, और मेरे दादा जी भाई में छोटे थे, पर बड़े दादा जी के बड़े बेटे 65 के थे, एक दिन शाम में आठ बजे के आसपास अचानक मृत्यु हो गई, जबकि उनको ज्यादा कुछ नहीं हुआ था सिर्फ खांसी था,

उनका 26 तारीख़ को दासवांँ था, मेरे पूरे खानदान में ज्यादातर लोगों ने सर मुंडन करवाया, पर हमने मुंडन नहीं कराया, बस एक बात के कारण की, मेरे मुंडन करा लेने से स्वर्गीय पापा जी या उनके परिवार वालों को क्या लाभ होगा, मुझे लगा कोई लाभ नहीं होगा, इसलिए मैंने मुंडन नहीं कराया।

अब 29 तारीख़ को #मृत्युभोज हैं, सवर्गीय बड़े पापा के लड़के के पास इतना भी पैसा नहीं है कि अपना भरण-पोषण ठीक से कर सके, मतलब गैस है तो आटा नहीं, आटा है तो गैस नहीं, आलू है तो तेल नहीं, मान लीजिए ठीक से खाने के लिए भी पैसा नहीं और रहने के लिए खर-पतवार वाला भी अच्छा से घर नहीं,

इनके अलावा मेरे खानदान में लगभग सब ठीक ठाक है, सबका घर बहुत अच्छा है,

स्वर्गीय बड़े पापा के बेटी दुखी मन से हमसे बोली #मृत्युभोज ना होई त हमार पापा अन्न-दाना के बिना तरपत होईहाँन, भाई भी कुछ ऐसा ही बोल रहे थे लगातार, लगभग सभी लोग बोलने लगा #मृत्युभोज करा दीजिए

मेरे घर की बात होती तो मृत्यु भोज नहीं होता खैर,,
मृत्युभोज के लिए मैंने खानदान के लोगों से बात किए तो सब लोग कुछ कुछ पैसा दे रहे हैं कि मृत्यु भोज करा दिया जाए,

👉🏻 मैं @VeerAditya ऐलन करता हूँ कि आज से कभी भी मृत्यु भोज नहीं खाउगा, और लोगों को इसके प्रति जागरूक करूँगा

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जिस आंगन में पुत्र शोक से
बिलख रहे माता
वहां पहुंचकर स्वाद जीव का तुमको कैसे भाता ।
पति के चीर योग में व्याकुल
युक्ति विधवा रोती
बड़े चाव से पंगत खाते तुम्हें पीर नहीं होती।
मरने वालों के प्रति अपना
सद व्यवहार निभाओ
धर्म यही कहता है बंधु मृतक भोज मत खाओ
चला गया संसार छोड़ कर
जिसका पालन हारा,
बड़ा चेतना हीन जहाँ पर वज्रपात दे मारा।
दुख भूखे रह कर भी परिजन
तेरहवीं खिलते,
अंधी परम्परा के पीछे जीते जी मर जाते। इस कुरीति के उन्मूलन का
साहस कर दिखाओ
धर्म यही कहता है बंधुओं मृतक भोज मत खाओ !

इससे अच्छी बात तो यह होगी कि मृत्युभोज पर धन व्यर्थ करने के बजाय के आपसी सहयोग से चन्दा इकट्ठा करके मृतक के गरीब,असहाय परिवार की आर्थिक मदद कर दी जाये !
यही मानवता का तकाजा और फर्ज है ; ऐसा करने से समाज को नयी दिशा और परिवर्तन, प्रेम का संदेश भी जायेगा