महेन्द्र मिसिर की धरती पर आकर गौरवान्वित हुई – मनीषा श्रीवास्तव

छपरा।सारण की धरती के लाल पूर्वी सम्राट महेंद्र मिसिर जी की जयंती पर भोजपुरिया माटी फाउंडेशन छपरा एवं भोजपुरिया माटी न्यूज़ द्वारा आयोजित होली मिलन समारोह एवं सम्मान समारोह में मुख्य कलाकार के रूप में उपस्थित हुई सुप्रसिद्ध लोक गायिका मनीषा श्रीवास्तव। गायिका मनीषा ने कहा कि छपरा की धरती को प्रणाम करती हूं जिसमें एक से बढ़कर एक कवि कलाकार व साहित्यकार प्रदान किए हैं। आज महेंद्र मिश्र की जयंती के दिन छपरा पहुंचकर अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रही हूं। मनीषा कहती है कि महेंद्र मिसिर जी को पूर्वी का जन्मदाता माना जाता है। उनके भोजपुरी लोकगीतों में पूर्वी विधा को गाकर न जाने कितने कलाकारों ने अपना नाम बनाया और भोजपुरी में प्रसिद्धी पाया। पूर्वी पुरोधा महेन्दर मिसिर के गीतों में प्यार है, स्नेह है, जुदाई है, ललकार है, विरह है, वियोग है, व वेदना का सार है।
भोजपुरी में व्याप्त अश्लीलता पर बात करते हुए मनीषा ने कहा कि आज के गायक बिना साधना के कम दिनों में रातों-रात स्टार बनने के चक्कर में अश्लीलता का परचम लहरा रहे हैं, यह भूल कर कि वह किसी के बेटा भाई पति या पिता हैं। उनको भी इसी समाज में रहना है। यहां तक कि वो स्वयं अपने गाए गीतों को परिवार के बीच नहीं सुनते। हम वैसे गायकों से कहेंगे कि अपनी संस्कृति अपनी भोजपुरी को बदनाम न करें।
भोजपुरी में अश्लील गीतों में आजकल महिला कलाकार भी अपने घर परिवार समाज संस्कृति को बदनाम कर रही हैं वह यह भूल रही हैं कि 1 दिन उनका हश्र बहुत बुरा होने वाला है। जिसने भी अपनी संस्कृति को धूमिल करने की कोशिश की है उनको समाज ने कतई बर्दाश्त नहीं किया है। एक न एक दिन इसका नकारात्मक प्रभाव उन्हें भी झेलना होगा। मनीषा ने आगे कहा कि रातो रात की प्रसिद्धि पानी की बुलबुला की तरह है जो कुछ समय के बाद खत्म हो जाता है। अगर देर तक चलना है तो अपनी संस्कृति को लेकर चलिए। साधना कीजिए। क्योंकि कहा जाता है कि जो रियाज करेगा वही राज करेगा।