महाभारत कालीन जरासंध अखाड़ा का अस्तित्व खतरे में

#कुमुद रंजन सिंह की रिपोर्ट/नालंदा :राजगीर का जरासंध अखाड़ा का अस्तित्व खतरे में दिखाई दे रहा है इसकी कहानी आप किताबो पढ़ा ही होगा और महाभारत सीरियल में देखा ही होगा ,यह स्थल राजगीर बाजार से करीब छह किलोमीटर की दूरी पर है ,इससे एक किलोमीटर पहले सोन भंडार है जहाँ प्रत्येक दिन सैकड़ो की संखिया में पर्यटक आते है और इसका रहस्य जानने की कोशिश करते है मगर उससे भी पुराना और ऐतिहासिक जरासंध के अखाड़ा सरकार के उपेक्षा के कारण बदहाल है ना तो कोई पर्यटक यहां पहुचता है और ना ही इसे देखभाल करने बाला है कुछ दिन पूर्व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस अखाड़ा को देखने पहुचे थे उन्होंने नाराजगी जाहिर किया था और कहा था की यह अखाड़ा पुरातत्व विभाग के अधीन है इस लिए बिहार सरकार इसके डेवलपेन्ट का काम नही करा सकती है अगर केंद्र सरकार चाहे तो हम मदद जरूर कर सकते है इसके बाद यह मामला जहाँ था वहीं आज भी है ,इस अखाड़ा की कहानी 5 हजार वर्ष पुराना है ,इस स्थल पर भगवान श्री कृष्ण भीम और अर्जुन के साथ इसी स्थल पर पधारे थे जरासंध को युद्ध के लिए ललकारा था उसके बाद इसी स्थल पर भीम और अर्जुन के बीच 28 दिनों तक मल युद्ध हुआ था उसके बाद इसी अखाड़ा में भीम ने छल से जरासंध का वध किया था,यहाँ की मिट्टी बिल्कुल आम मिट्टी से अलग है यहाँ की मिट्टी उजला है इसके पीछे का कारण है की जरासंध इस जगह पर सैकड़ो लीटर दूध से नहाता था जिसमे से काफी दूध यहाँ बह जाया करता था इसी कारण यहाँ की मिट्टी उजला है ।