मनुष्य अपने आत्मा के उद्धार हेतु गुरु के द्वारा परमात्मा की भक्ति को प्राप्त करता हैं:गोविन्द जी महाराज
#सुरभि तिवारी
तरैय(सारण)09.04.2018
श्री कृष्ण प्रणामी धर्म श्री प्राण नाथ सेवा आश्रम ट्रष्ट छपरा के तत्वधान में चल रहे योग विज्ञान शिविर एवं संगीतमय भागवत कथा के नौवें दिन गोविंद जी महाराज ने भगवान श्री कृष्ण के रसमयी रासलीला का वर्णन करते हुए बताया कि राधा और कृष्ण का अनन्य प्रेम ही वंशी हैं जब श्यामसुंदर अपने अधरों पर वंशी की मधुर तान छेड़ते हैं उस समय ब्रज की गोपियां अपने घर का काम धाम छोड़कर श्री कृष्ण के पास चली आती थी। और उनके प्रेम के अधीन होकर उनके वशीभूत हो जाती थी और तो क्या उस वंशी की मधुर ध्वनि सुनकर गौ ,हरिन, कोयल ,नदिया ऐ सब अपना कार्य छोड़कर कृष्ण की वंशी सुनकर अपने आप को कृष्ण के चरणों मे समर्पित कर देती और प्राण वल्लभ श्री कृष्ण के चरणों मे अपना तन मन धन सब कुछ अर्पण कर देती ।पुरुषोत्तम भगवान को प्राप्त करने के लिए इन गोपियों के समान ही अपना जीवन सर्वस्व कृष्ण के चरणों मे समर्पित कर देनी चाहिये। नवधा भक्ति से भी न्यारा अनन्य प्रेम लक्षणा भक्ति करनी चाहिये ।भक्तो के आदर्श हैं ब्रज की गोपिया ।मनुष्य अपने आत्मा के उद्धार हेतु गुरु की द्वारा परमात्मा की भक्ति को प्राप्त करता हैं लेकिन वह गुरु निज स्वरूप को बताने वाला होना चाहिए ।जो गुरु शिष्यों का विश्वास पात्र होकर उत्तम पुरुष अक्षरातीत श्री कृष्ण परमात्मा की भक्ति से विमुख कर देता हैं वह गुरु घोर नारकी योनियों में भटकता रहता हैं इसलिये प्रत्येक भगवत प्रेमी को अपने आत्मा के उद्धार हेतु सच्चिदानंद श्री कृष्ण का ही आश्रय लेना चाहिये ।निजधाम की प्राप्ति हेतु गोपियों को अपना आदर्श मानकर गोपियों के समान ही श्री कृष्ण को अपने प्रियतम के रूप में स्वीकार कर लेना चाहिए ।क्योंकि क्षर पुरुष और अक्षर पुरुष इन दोनों से परे सनातन अक्षरातीत श्री कृष्ण ही पूर्ण ब्रह्म परमात्मा है ।उनको छोड़कर सम्पूर्ण नारायणी श्रुष्टि जो संसार के रूप में दृष्टिगोचर हो रहा है वह सब असत्य है।इसलिये आत्मज्ञानी पुरुषों को बिभिन्न प्रकार के व्रत उपवास कर के अपने समय को व्यर्थ नही गवाना चाहिये ।वही पूर्ण ब्रह्म अक्षरातीत परमात्मा महामति प्राण नाथ के रूप में नवतनपुरी धाम जामनगर गुजरात मे सोलहवीं सदी प्रकट होकर पदमपुराण ,हरवंश पुराण,भविष्य पुराण ,महेश्वरतंत्र, आदि की भविष्यवाणी को सत्य कर दिए और तारतम्य ज्ञान के द्वारा निजधाम का मार्ग खोल दिये ।सात करोड़ मन्त्रो का सारतत्व श्री कृष्ण तारतम्य मन्त्र ही जिसकी दीक्षा सभी आत्माओ को ग्रहण करना चाहिये ।तारतम्य मन्त्र ज्ञान द्वारा जीव को अपने स्वरूप का बोध होता हैं।सोमवार को कथा का शुभारंभ द्वीप प्रज्वलित कर भाजपा के पूर्व विधायक जनक सिंह ने किया।उक्त मौके पर डॉ त्रिलोकीनाथ सिंह, रामधार सिंह, उपेन्द्र सिंह, विजय शंकर सिंह,योगेन्द्र सिंह कुशवाहा,रणविजय सिंह, डॉ रंजीत सिंग,गुड्डू सिंह, शेर सिंह,युवराज रजनीश व अन्य मौजूद थे।




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