महापंडित राहुल सांकृत्यायन की 125 वीं जयंती पर हुआ संगोष्ठी का आयोजन

छपरा:-महापण्डित राहुल सांकृत्यायन को हिन्दी यात्रा साहित्य का जनक माना जाता है। हिंदी में राहुल साकृत्यायन जैसा विद्वान, घुमकड़ व ‘महापंडित’ की उपाधि से स्मरण किया जाने वाला कोई अन्य साहित्यकार नही मिलेगा।
उक्त बातें केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा के निदेशक प्रो नंद किशोर पाण्डेय ने जयप्रकाश विश्वविद्यालय के अंगीभूत महाविद्यालय रामजयपाल कॉलेज के सभागार में महापंडित राहुल सांकृत्यायन जी के 125 वीं जयंती के अवसर पर “महापंडित राहुल सांकृत्यायन और सारण” विषयक पर एक दिवसीय रास्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन पर अपने संबोधन में कही।
कार्यक्रम का विधिवत उद्घाटन विधान पार्षद प्रो वीरेंद्र नारायण यादव,केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा के निदेशक प्रो नंद किशोर पाण्डेय, ज्ञान पीठ से पुरस्कृत प्रो अरुण कमल व महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो डॉ सिद्धार्थ शंकर सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यक्रम का मंच संचालन प्रो अरुण कमल ने किया जबकि अध्यक्षता प्राचार्य ने की।
इस अवसर पर विधान पार्षद प्रो नवल किशोर यादव,प्रो चंद्रमा सिंह, प्रो लालबाबू यादव,प्रो एचके वर्मा,प्रो विनय सिंह,प्रो इरफान अंसारी,सहित कई अन्य गण्यमान्य लोग उपस्थित थे।
मालूम हो कि राहुल सांकृत्यायन की कर्मभूमि सारण के परसागढ़ मठ रही है जहां से इन्होंने पूरे देश में भ्रमण किया था।
महापंडित राहुल सांकृत्यायन का जन्म 9 अप्रैल 1893 को यूपी के आजमगढ़ जिले के पंदहा गांव निवासी नाना रामशरण पाठक के घर हुआ था। इनका पिता जी का नाम गोवर्धन पाण्डेय और माता का नाम कुलवन्ती देवी था
जो यूपी के आजमगढ़ जिला अंतर्गत कनैला गांव निवासी थे और इनका बचपन का नाम केदारनाथ पाण्डेय था।




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