मधेपुरा:आपसी भाईचारा और अमन चैन की दुआओं के साथ ईद  सम्पन्न

संजय कुमार सुमन

दैनिक खोज खबर,मधेपुरा

ईद का पर्व चौसा में हर्षोउल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर चौसा की मज्जिदों व  ईदगाह में अमन चैन की दुआओं के साथ नमाज अता की गई। इस दौरान ईदगाह व मस्जिदों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम पुलिस द्वारा किये गये थे।
आज सोमवार की सुबह से ही बड़ी संख्या में मुस्लिम भाई अपने बच्चों के साथ नये कपड़े पहनकर ईदगाह व मस्जिदों में नमाज के लिए पहुंचने लगे। ईदगाह पर सुबह 9 बजे नमाज अता की गई। यहां पर बच्चों ने खेल खिलौनों की जमकर खरीदारी की। इस मौके पर पुलिस द्वारा कड़े सुरक्षा इंतजाम किये गये थे।

अमीर-गरीब का भेद मिटाने का त्योहार है ईद 

ईद सिर्फ एक त्योहार नहीं है, सही मायने में यह खुद को संतुलित करने और समाज को बराबरी पर लाने का मौका है। पूरे महीने में निकली जकात और खैरात हर एक के तन पर नया कपड़ा लाने, घर पर बेहतरीन पकवान होने और अमीर गरीब के दस्तरखान का फर्क मिटाने का मौका है। इस पर भी अगर कहीं कोई फर्क रह जाए तो ईद पर हर एक से गले मिलकर, बराबरी को मजबूत करने का मौका है।

 दो दिलों को एक करने का त्यौहार है ईद

वैसे भी त्योहार को परंपरा की तरह नहीं, प्रयोग की तरह देखना चाहिए। उसके पीछे छिपी वजहों को समझना चाहिए, जिसके लिए त्योहार बनाए गए। ईद और रमजान ने बिखरे दिलों को एक कर दिया। गरीब की भूख, जरूरत और ख्वाहिश ने अमीर को महसूस करने पर मजबूर कर दिया। जिस दिल में यह अहसास जग जाएगा, वह दिलों का यह फर्क मिटाने के लिए खुद-बखुद तड़प उठेगा।

ईद और चाँद का दीदार क्या है खास

ईद की बात हो और चांद के दीदार का ज़िक्र न हो तो यह मुमकिन नहीं। ईद का चाँद रमज़ान के 30 वें रोज़े के बाद ही दिखता है। इसी चांद को देखकर ईद मनाई जाती है। हिजरी कैलेंडर यह इस्लामिक कैलेंडर है। इसके अनुसार ईद साल में दो बार आती है। एक ईद के नाम से जानी जाती है और दूसरी को ईद-उल-फ़ितर  कहते हैं। ईद को मीठी ईद भी कई लोग कहते हैं।

अब आपके दिमाग में यह सवाल उठ रहा होगा कि आखिर ईद किस दिन मनाई जाती है। ईद मनाने के लिए चांद का दिखना ज़रूरी है। यही वजह है कई बार भारत में चांद की वजह से ईद अलग अलग दिन मनाई जाती है। चाँद और ईद का रिश्ता कुछ अजब सा है वो आप भी जान लें।

ईद-उल-फितर हिजरी कैलेंडर के दसवें महीने शव्वाल यानी उल-मुकर्रम की पहली तारीख को मनाई जाती है। अब समझने वाली बात यह भी है कि हिजरी कैलेंडर की शुरुआत इस्लाम की एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक घटना से मानी जाती है। वह घटना है हज़रत मुहम्मद द्वारा मक्का शहर से मदीना की तरफ हिज़रत करने की यानी हज़रत मुहम्मद ने मक्का छोड़ कर मदीना के लिए कूच किया था।

हिजरी सवंत जिस हिजरी कैलेंडर का हिस्सा है वह चांद पर आधारित है। इस कैलेंडर में हर महीना नया चाँद देखकर ही शुरू माना जाता है। ठीक इसी तर्ज पर शव्वाल महीना भी नया चांद देख कर ही शुरू होता है। हिजरी कैलेंडर के मुताबिक़ रमज़ान के बाद आने वाला महीना होता है। शव्वाल ऐसे में जब पहला चाँद नज़र नहीं आता रमज़ान के महीने को पूरा नहीं माना जाता।

शव्वाल का चाँद नज़र न आने पर माना जाता है कि रमज़ान का महीना पूरा होने में कमी है। इसी वजह से ईद अगले दिन या जब भी चाँद नज़र आय तब मनाई जाती है।

ईद के मौके पर दी बधाई 

ईद मौके पर प्रखण्ड विकास पदाधिकारी मिथिलेश बिहारी वर्मा, थाना अध्यक्ष सुमन कुमार सिंह,चौसा पश्चिमी मुखिया प्रतिनिधि सचिन कुमार बंटी,सरपंच प्रतिनिधि गजेन्द्र प्रसाद यादव,पूर्व मुखिया श्रवण कुमार पासवान,तफशीर आलम,मनौवर आलम,याहिया सिद्दिकी,शाहीद आलम,आरिफ आलम,याशिर हमीद,सिराजुल नदाफ,अरजपुर पूर्वी में पूर्व मुखिया मनोज प्रसाद, मुखिया प्रतिनिधि घनश्याम कुमार,पश्चिमी में मुखिया प्रतिनिधि सुबोध कुमार सुमन,लौआलगान पूर्वी में जदयू नेता मुर्शिद आलम,मनौवर हुसैन,पश्चिमी में मुखिया संतोष साह,फुलौत पूर्वी में मुखिया बबलू ऋषिदेव,शहंशाह कैफ,शब्बीर आलम,पश्चिमी में मुखिया पंकज मेहता,पैना में मुखिया प्रतिनिधि शाहजहाँ,जुबैर आलम,कौनेन बशीर एवं जिला परिषद अनीकेत कुमार मेहता,पूर्व जिला परिषद प्रतिनिधि मनोज राणा ने गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी।

कहीँ कोई अप्रिय घटना ना हो दंडाधिकारी के साथ पुलिस बल मौजूद देखे गये।कहीँ से भी अप्रिय  घटना की सूचना नही है।कुल मिला कर ईद पर्व शांतिपूर्वक सम्पन्न रहा।