शालिनी रंजन अपने माता-पिता एवं बड़े भाई मेडिकल छात्र के साथ
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मढौरा के तीन बेटीयों ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा “नीट” मे की क्वालीफाई,शालिनी रंजन को मिली 712 वी रैंक 

मढौरा (सारण)
मढौरा के तीन बेटीयों ने अपने प्रतिभा का डंका बजा कर ही छोड़ी ।ग्रामीण परिवेश मे पढ़ी-बढ़ी शालिनी रंजन ,ऋतु कुमारी एवं विजया भरद्वाज ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट मे अच्छे रैंक लाकर जिले और राज्य के साथ परिवार का भी नाम रोशन की है ।पढाई मे लग्न हो तो ये तीनो ने साबित कर दिया की सफलता स्वयं कदम चुमेगी ।सबसे अच्छे रैंक लाने वाली शालिनी रंजन मढौरा के धेनुकी गांव निवासी बाबू राम सिंह एवं श्रीमति रेणु देवी के तीन संतानों मे सबसे छोटी है ।इन्होने 720 अंको के परीक्षा मे 631अंक लाकर  ओवरॉल 712 रैंक और ओबीसी कटेगरी मे 168 रैंक लायी है ।मढौरा की दूसरी बिटिया ऋतु कुमारी है ।विनोद कुमार एवं श्रीमति अंजलि कुमारी की चार संतानों मे दूसरी संतान है ।इन्होने भी 720 अंको के मेडिकल परीक्षा मे 558 अंक लाकर ओवरॉल 8284 रैंक और ओबीसी कटेगरी मे 2979 रैंक लायी है ।मढौरा की ही रवि प्रताप सिंह एवं श्रीमति सुकांति सिंह की एकलौती बेटी विजया भरद्वाज ने भी अपने परिश्रम के बल 720 अंको मे 501 अंक लाकर ओवरॉल 25904 रैंक लायी है ।इन्हे भी नामांकन मिल जाने की उम्मीद है । 
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शालिनी रंजन ने अपनी प्रतिभा 
का उत्कृष्ट प्रदर्शन मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट मे की है ।देश के कठिन माने जाने वाली मेडिकल परीक्षा मे ओवरऑल 712 जबकि ओबीसी कटेगरी मे 168  रैंक लाकर शालिनी ने अपने उत्कृष्टता का परिचय दी है ।इन्हे 720 अंको के परीक्षा मे कठिन अध्यन के बदौलत 631 अंक लाकर देश के अच्छे मेडिकल कॉलेज मे नामांकन की पात्रता हासिल कर ली है ।शालिनी रंजन ने पिछले सप्ताह एम्स मेडिकल प्रवेश परीक्षा मे भी 2099 रैंक ला चुकी है ।ग्रामीण परिवेश मे पली बढ़ी शालिनी ने 2013 मे उच्च विद्यालय मढौरा से 84%अंक के साथ मैट्रिक और प्रखंड के ही जीएम हाइ स्कूल बरदहीया से 2015 मे इंटर 73% अंको के साथ पास की थी।शालिनी रंजन ने मेडिकल परीक्षा की तैयारी एलेन कोटा से की थी ।शालिनी रंजन धेनुकी गांव के सधारण परिवार  के  बाबू राम सिंह एवं रेणु देवी की तीन संतानों मे सबसे छोटी लाडली बेटी है ।एक भाई एवं दो बहनों मे शालनी के बड़ी बहन नालनी रंजन भी श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज से फाइनल इयर मे है जबकि भाई पुष्कर कुमार भी अलीगढ़ यूनिवर्सिटी से मेडिकल कोर्स के तीसरे साल मे है ।इन्होने अपने सफलता का श्रेय परिवार मे माता-पिता एवं श्रेष्टजनो को दी ।पेशे से पिता दवा व्यवसायी तो माता आंगनवाड़ी सेविका है ।