🛑 मांडलगढ़ – उपचुनाव 🛑
भाजपा की चिंता: झलक उठी आहत, चुनाव को लेकर राजे ने लगाई ताकत :
मांडलगढ़ [ दिलीप मेहता ]..✍🏻मांडलगढ़ उप चुनाव को लेकर भाजपा में चिंता की लहर के कारण लगता है भाजपा भारी आहत है और इसी को लेकर मुख्यमंत्री राजे खुद यहां पर कमान संभालने आ रही है और पुरी ताकत लगा रही है । आज से ही 3-4 दिनो में दर्जनो मंत्री व 20 से भी ज्यादा विधायक चुनावी दौरे पर आकर कमान संभालने वाले है इसका मुख्य कारण जो उभर कर सामने दिखाई दे रहा है वह मोटे तौर पर भीलवाडा के भाजपा जिला संगठन को माना जा रहा है ? जिलाध्यक्ष की मनमानी व बैरूखी का आलम पिछले 2-3 महिनो से ही सुनाई दे रहा है जिसकी झलक अब खुलकर दिखाई देने लगी है । यह तो भला हो मंत्री श्रीचंद कृपलानी का जो नाराजगी की कडी को एक एक कर जौडने में दिखाई दे रहे है।
कृपलानी ने काफी कार्यकर्ताओ को बुथ स्तर पर ताकत के साथ जोडा है । मुख्यमंत्री राजे अब पुरे दम के साथ नाराज लोगो को मनाने में लग गई है और पुरे प्रयास कर रही है । स्थानीय नेता व कार्यकर्ताओ का उनके घर में ही सम्मान नहीं हो तो फिर उनकी आत्मा को ठेस पहुंचतीहै।
दुसरी और निर्दलिय चुनाव में डटे गोपाल मालवीय के खडे रहने पर पहले भाजपा खुश थी लेकिन अब बढ़ती भीड व वोटो की चिंता से भाजपा परेशान दिख रही है । अभी बसंत पंचमी का दौर चल रहा है और पेडो से पत्ते गिर रहे है इसी तरह मालवीय कांग्रेस व भाजपा के वोट रूपी पत्ते खैर रहे है और वो पत्ते भाजपा के ज्यादा नजर आ रहे है । चर्चाओ के अनुसार खुफिया स्तर पर भी भाजपा की हालत नाजुक लग रही है और इसी कारण राजे अब खुद जोश के साथ दम भरने आ रही है।
2008 के चुनाव में भी ऐसा ही दौर था तब निर्दलिय खडे इंजि . धाकड को जीत की और देखकर चुनाव में भाजपा टिकट से खडी हुई बाईसा ने कहा कि आप मुझ वोट मत दो और काकोसा [ प्रदीप कुमारसिंह ] को दो .. इस खबर के समाचार पत्र में छपने परकाफी हंगामा हुवा था और बाद में यह चुनाव बाईसा मात्र 1488 वोटो से हार गई थी । वो ही कहानी फिर आ सकती है जब कांग्रेस जीत की और बढ़ती दिखाई देगी तो मतदान से पहले 2–3 दिनो में उलटी हवा बह सकती है जिसका फायदा भाजपा को मिल सकता है .?

फिलहाल मांडलगढ़ सीट का चुनावी आंकलन खुफिया तरिके से भी फेल दिखाई दे रहा है । भाजपा की बुथ लेवल तक कडी मेहनत व मान मनुहार पर जोर तथा निर्दलिय की सभाओ में भीड का होना व कांग्रेस का भी प्रचार में तेजी लाना क्या गुल खिलायेगा यह कहा नही जा सकता ? अनुमान है कि 26- 27 जनवरी तक कुछ चुनावी हवा कि झलक दिखाई देगी वो झलक किस की तरफ होगी .. यह राम ही जाने ?? 🤷🏼‍♂🤷‍♀