
नवजात देखभाल सप्ताह पर सेमिनार का आयोजन
नवजात मृत्यु दर में कमी के लिए छोटे बच्चों की देखभाल पर भी होगा ज़ोर
आईएनएपी के तहत वर्ष 2030 तक नवजात मृत्यु दर में कमी लाने का लक्ष्य
पटना/ 19 नवम्बर: राज्य में 15 नवम्बर से राष्ट्रीय नवजात देखभाल सप्ताह मनाया जा रहा है, जो आगामी 21 नवम्बर तक चलेगा. इसके मद्देनजर मंगलवार को पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल(पीएमसीएच) में नवजात देखभाल सप्ताह पर सेमिनार का आयोजन किया गया. राज्य स्वास्थ्य समिति के सहायक कार्यपालक निदेशक करुणा कुमारी के साथ अन्य राज्य स्तरीय पदाधिकारियों एवं चिकित्सकों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया.
75 प्रतिशत नवजात मृत्यु दर में कमी संभव: पीएमसीएच के बाल रोग विभाग के विभागाध्यक्ष एके जायसवाल ने बताया बेहतर देखभाल एवं प्रबंधन के माध्यम 75 प्रतिशत नवजात मृत्यु दर में कमी लायी जा सकती है. शिशु मृत्यु दर में भी कमी लाने के लिए नवजात मृत्यु दर में कमी लानी होगी. इंडिया वन एक्शन प्लान(आईएनपी) एवं सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल के तहत नवजात मृत्यु दर को घटाकर दो डिजिट की जगह वन डिजिट तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. नवजात को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में कई प्रयास किए जा रहे हैं जिसमें एसएनसीयू, न्यू बोर्न स्टेबलाईजेसन यूनिट, पोषण पुनर्वास केंद्र एवं न्यू बोर्न इंटेंसिव केयर यूनिट महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं.
गृह आधारित देखभाल रखा गया थीम: इस अवसर पर राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी बाल स्वास्थ्य डॉ. वीपी राय ने कहा नवजात देखभाल सप्ताह के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को नवजात स्वास्थ्य पर जागरूक किया जा रहा है. इसके लिए आशाओं द्वारा किए जा रहे गृह आधारित नवजात देखभाल पर अधिक ज़ोर दिया गया है. कुल 6 थीम के विषय में आशाएं घर-घर जाकर परिवार वालों को जागरूक कर रही है. इसके अंतर्गत माँ और बच्चों को एक साथ रखना, बच्चे को हमेशा गर्म रखना, नाल को सूखा रखना, स्तनपान से पहले एवं शौच के बाद हमेशा हाथ की धुलाई करना, खतरे के संकेत का पूर्व में पहचान करना एवं जन्म के एक घन्टे के भीतर शिशु को स्तनपान कराना एवं 6 माह तक केवल स्तनपान कराने पर लोगों को जानकारी दी जा रही है.
छोटे बच्चों के देखभाल पर चलेगा कार्यक्रम: डॉ. राय ने बताया गृह आधारित नवजात देखभाल के तहत केवल 42 दिनों तक ही शिशु की देखभाल की जाती थी. अब 15 माह तक के बच्चों को भी घर पर आशाओं द्वारा देखभाल की जाएगी. इसके लिए गृह आधारित यंग चाइल्ड केयर कार्यक्रम की शुरुआत की गयी है. इसके तहत कुल 5 गृह भ्रमण का प्रावधान किया गया है. जिसमें शिशु को 3 माह, 6 माह, 9 माह, 12 माह एवं 15 माह तक देखभाल किया जाएगा. साथ ही माताओं को स्तनपान, टीकाकरण एवं अनुपूरक आहार जैसे अन्य विषयों पर जानकारी दी जाएगी.
राज्य में 713 एनबीसीसी: प्रसव कक्ष में नवजात को जरुरी सुविधा उपलब्ध कराने के लिए न्यू बोर्न केयर कार्नर(एनबीसीसी) का निर्माण किया गया है. राज्य में अभी कुल 713 एनबीसीसी कार्यरत है. साथ ही सभी जिलों में गंभीर बच्चों के लिए सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट एवं कुपोषित बच्चों के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र भी बनाये गए हैं.
क्या आप जानते हैं : इस दौरान पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से 1 घन्टे के भीतर स्तनपान एवं 6 माह तक केवल स्तनपान के फायदों को भी बताया गया
स्तनपान से नवजात मृत्यु दर में 20 प्रतिशत एवं 5 साल से कम उम्र के बच्चों के मृत्यु दर में 13 प्रतिशत की कमी लायी जा सकती है
स्तनपान से डायरिया से होने वाली मौतों में 11 गुना कमी आती है
स्तनपान से निमोनिया से होने वाली मौतों में 15 गुना कमी आती है
स्तनपान से बच्चों में शारीरिक विकास के साथ बौधिक विकास भी तेजी से होता है
इस दौरान राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी टीकाकरण सह मानसिक स्वस्थ्य डॉ. एनके सिन्हा, यूनिसेफ से डॉ. सरिता, पीएमसीएच के प्रसूति विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. चन्द्रकला एवं केयर से डॉ. नीरज के साथ अन्य चिकित्सक एवं नर्स उपस्थित थे.




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