गोपालगंज:- जिले के भोरे थाना क्षेत्र के तिलक डूमर गांव में बड़े भाई ने अपने ही सगे छोटे भाई की निर्मम हत्या कर दी. इस घटना के बाद मृतक के पुत्र ने अपने चाचा, चचेरे भाइयों और चाची के विरुद्ध हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई है. वहीं पुलिस प्राथमिकी दर्ज कर आरोपियों की तलाश में जुट गई है. मौत के बाद परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है. हालांकि अभी भी इस घटना में घायल एक महिला का इलाज अस्पताल में चल रहा है.

सरिया के विवाद में हुई थी मारपीट

भोरे थाना क्षेत्र के तिलक डूमर गांव में सरिया के विवाद को लेकर बड़े भाई सुदामा सिंह और छोटे भाई रामदेव सिंह के बीच झगड़ा हो गया. बात इतनी बढ़ गई कि सुदामा सिंह और उनके परिजनों ने रामदेव सिंह, उनके बेटे सोनू सिंह और रामदेव सिंह की पत्नी सुनीता देवी को मारपीट कर बुरी तरह घायल कर दिया. बाद में ग्रामीणों ने सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया. जहां से डॉक्टरों ने गोपालगंज के लिए रेफर कर दिया. गोपालगंज में रामदेव सिंह की हालत बिगड़ने के बाद उन्हें गोरखपुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया. जहां से डॉक्टरों ने लखनऊ पीजीआई रेफर कर दिया. इलाज के क्रम में ही रामदेव सिंह की सोमवार की शाम मौत हो गई. मौत के बाद परिजन उनके शव को लेकर गांव पहुंचे. वहीं इस घटना में घायल रामदेव सिंह की पत्नी का इलाज अभी भी सदर अस्पताल में ही चल रहा है. दूसरी तरफ मौत की खबर मिलने के बाद रामदेव सिंह के दरवाजे पर ग्रामीणों का हुजूम उमड़ पड़ा. मौके पर पहुंची पुलिस ने बेटे सोनू सिंह का बयान दर्ज किया.

चाचा सहित छह पर प्राथमिकी दर्ज

रामदेव सिंह की मौत के बाद उनके बेटे सोनू सिंह ने प्राथमिकी दर्ज कराई है. जिसमें सोनू सिंह ने कहा है कि वह और उनके पिता दोनों एक साथ तिलक डूमर से महरादेउर की ओर जा रहे थे. इसी दौरान रास्ते में सुदामा सिंह, संतोष सिंह, मनोज सिंह, चंदेश सिंह, सारदानंद सिंह, रुक्मणी कुंवर और शांति देवी आए और उनकी साइकिल छीन ली. जब इसका विरोध किया, तो उन लोगों ने अपने हाथ में लिए लोहे के रॉड और पारंपरिक हथियारों से हमला कर दिया. शोर सुनकर मां भी दौड़ी दौड़ी आई, जिसे भी मारपीट कर लहूलुहान कर दिया गया. इस मारपीट में रामदेव सिंह बुरी तरह घायल हो गए और अचेत हो गए. बाद में स्थानीय ग्रामीणों की मदद से उन्हें भोरे स्थित रेफर अस्पताल लाया गया.

नम आंखों से जब पिता ने दी मुखाग्नि तो रो पड़ा पूरा गांव

सरिया के विवाद में भाई द्वारा ही भाई की हत्या कर दिए जाने के बाद जब रामदेव सिंह का शव गांव पहुंचा, तो बूढ़े पिता भृगु राशन भगत की आंखें नम थी. हर तरफ चीख-पुकार मची थी. लोग सांत्वना देने में जुटे थे, तो वही जिस उम्र में बेटे सहारे की लाठी बनते हैं. आज उस उम्र में भृगुराशन भगत को अपने ही छोटे बेटे को कंधा देना पड़ रहा था. मृतक रामदेव सिंह के पांच पुत्र हैं. जिसमें संदीप, प्रदीप, मन्नू, सोनू, और संजीत शामिल है. संदीप फिलहाल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा है. पत्नी सुनीता देवी अभी भी अस्पताल में है।