
राजस्थान /(न्यूज इनपुट-कुमुद रंजन सिंह की रिपोर्ट) :
फतेहपुर शेखावाटी 20 अक्टूबर प्रेक्षा इच्छ धातु से बना है जिसका अर्थ होता है देखना एकाग्र चित्त होकर ध्यानपूर्वक देखना ही प्रेक्षा ध्यान है आत्मा का साक्षात्कार प्रेक्षा ध्यान के द्वारा ही संभव है यह बात शिवाजी विद्यामंदिर प्रांगण में एक दिवसीय प्रेक्षा ध्यान प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षक सतीश शांडिल्य संबोधन दे रहे थे। इन्होंने कहा कि ध्यान करने से शरीर के हारमोंस में परिवर्तन होता है यह परिवर्तन होने से विचारों में भी परिवर्तन होता है प्रेक्षा ध्यान विद्यार्थियों को प्रयोग करना चाहिए प्रशिक्षक शांडिल्य ने महाप्राण ध्वनि के साथ प्रेक्षा ध्यान के चारों चरण का प्रयोग कराया ध्यान के बाद आसनों में ताड़ासन संपाद आसन मुद्रा में ज्ञान मुद्रा और और वायु मुद्रा का प्रयोग बताया तथा दोनों में अंतर बताया इस अवसर पर विद्यालय के प्रधाना अध्यापक मेवाराम मार् बाल ने कहा कि आज के युग में तनाव काफी बढ़ रहा है हर व्यक्ति तनाव में जीता है तनाव से मुक्ति पाने के लिए प्रेक्षा ध्यान का प्रयोग करते रहना चाहिए आज का बालक ही कल का भविष्य है आज का बालक जैसा होगा वैसा ही राष्ट्र होगा राष्ट्र मजबूत तभी होगी जब राष्ट्र के बच्चे स्वस्थ होंगे और मजबूत होंगे शरीर स्वस्थ रखने के लिए एवं स्मरण शक्ति के विकास के लिए विद्यार्थियों को प्रयोग करते रहना चाहिए छात्र अमित ने संकल्प शक्ति का प्रयोग कराया जीवन विज्ञान क्लब के छात्राओं ने संयम म य जीवन होक्ष प्रार्थना से कार्यक्रम की शुरुआत हुई इस अवसर पर प्रियंका ने प्रयोग कराइए तथा प्लास्टिक का थैली से बचने का संकल्प विधि का प्रयोग ही कराई और और कहां की कपड़े के थैले का ही प्रयोग करें उपयोग कराने पर बल दिया।




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