प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा:जानें, क्यों अहम और ऐतिहासिक है
संजय कुमार सुमन
सम्पादक@दैनिक खोज खबर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इजरायल दौरा कई मायने में ऐतिहासिक है। भारत और इजरायल के कूटनीतिक रिश्तों के 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में हो रही इस यात्रा में दोनों देशों की आपसी संस्कृति, रिश्ते तथा सहयोग और ज्यादा मजबूत होंगे। यह यात्रा इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि पहली बार कोई भारतीय प्रधानमंत्री इजरायल की यात्रा पर गए हैं।

1992 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव ने इजरायल के साथ राजनयिक संबंधों की नींव रखी थी। भारत ने 1950 में इजरायल को मान्यता दी थी, लेकिन उससे कूटनीतिक संबंध नहीं रखे। हालांकि राजनयिक संबंध न होने के बावजूद इजरायल के साथ भारत के सामरिक रिश्ते बेहतर रहे। 1962, 1965 और 1971 में जंग के वक्त इजरायल ने भारत को आधुनिक सैन्य साजोसामान की आपूर्ति की थी। 1985 में भारत के प्रधानमंत्री रहे राजीव गांधी ने अमेरिका में इजरायली समकक्ष शिमोन पेरेज से मुलाकात की थी। बाद में 1992 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव ने इजरायल के साथ कूटनीतिक संबंधों की शुरुआत की। 2015 में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने इजरायल की यात्रा की थी। ऐसा करने वाले वह देश के पहले राष्ट्रपति हैं। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कुछ महीने पहले इजरायल का दौरा किया था। आज इजरायल भारत का अहम सामरिक साझेदार है।आइए जानें पीएम मोदी की यह यात्रा क्यों है खास…

1- इजराइल जाने वाले पहले भारतीय पीएम- इजराइल के आस्तित्व में आने के बाद पहली बार कोई भारतीय प्रधानमंत्री इजराइल का दौरा किया । इजराइल का गठन 1948 में हुआ। 1949 में संयुक्त राष्ट्र ने उसे मान्यता दी। 1950 में भारत ने इजराइल को स्वतंत्र देश की मान्यता दी लेकिन दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध कई दशकों बाद पीवी नरसिम्हाराव सरकार के समय बने। रक्षा तकनीक, जल संशोधन, कृषि तकनीक इत्यादि में इजराइल अग्रणी देश है। ऐसे में इजराइल से बेहतर संबंध भारत के लिए लाभकारी हैं।
2- वैश्विक राजनीति में नया रुख- भारतीय राजनेता जब भी इजराइल का दौरा करते रहे हैं वो साथ ही फिलीस्तीन भी जाते रहे हैं। भारत सरकार की इजराइल और फिलस्तीन दोनों को बराबर तवज्जो देने की नीति रही है। इजराइल और फिलिस्तीन के बीच लम्बे समय से जारी टकराव के बीच भारत सरकार की ये कोशिश रहती रही है कि उसे किसी एक का हिमायती न समझा जाए। भारतीय पीएम इस यात्रा में फिलस्तीन नहीं जाएंगे। एआईएमआईएम के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने पीएम मोदी के फिलस्तीन न जाने पर पहले ही सवाल खड़ किया है। यहूदी राष्ट्र इजराइल चारों तरफ से मुस्लिम राष्ट्रों से घिरा हुआ है। वो मुस्लिम देशों की साझा फौज से युद्ध भी लड़ चुका है। ऐसे में इजराइल की तरफ झुकना मुस्लिम विरोधी नीति के तौर पर देखा जा सकता है।

3- रक्षा क्षेत्र में सहयोग- रक्षा तकनीक में इजराइल दुनिया के सबसे अग्रणी देशों में एक है। भारत द्वारा साल 2012 से 2016 के बीच खरीदे गए 41 प्रतिशत हथियार इजराइल से खरीदे गए थे। अमेरिका और रूस के बाद इजराइल भारत का तीसरा सबसे बड़ा हथियार निर्यातक देश है। इजराइल 1962 के चीन युद्ध, 1965 और 1971 के पाकिस्तान युद्ध में भी इजराइल ने मदद की थी। अप्रैल 2017 में भारत और इजराइल के बीच 12 हजार करोड़ रुपये का रक्षा सौदा हुआ।भारत ने 1950 में इजरायल को मान्यता दी थी, लेकिन उससे कूटनीतिक संबंध नहीं रखे। हालांकि राजनयिक संबंध न होने के बावजूद इजरायल के साथ भारत के सामरिक रिश्ते बेहतर रहे। 1962, 1965 और 1971 में जंग के वक्त इजरायल ने भारत को आधुनिक सैन्य साजोसामान की आपूर्ति की थी। 1985 में भारत के प्रधानमंत्री रहे राजीव गांधी ने अमेरिका में इजरायली समकक्ष शिमोन पेरेज से मुलाकात की थी। बाद में 1992 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव ने इजरायल के साथ कूटनीतिक संबंधों की शुरुआत की। 2015 में राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने इजरायल की यात्रा की थी। ऐसा करने वाले वह देश के पहले राष्ट्रपति हैं। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कुछ महीने पहले इजरायल का दौरा किया था। आज इजरायल भारत का अहम सामरिक साझेदार है।
4- कृषि क्षेत्र में समझौते- भारत आज भी एक कृषि प्रधान देश है। देश की 60 प्रतिशत से ज्यादा आबादी खेती से जुड़ी हुई है। इजराइल कृषि तकनीक में काफी आगे है। भारत इजराइल के साथ मिलकर 2015-18 का एक्शन प्लान पर काम कर रहा है। भारत में बनाए जा रहे 26 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में से 15 इजराइल के सहयोग से विकसित किया जा रहे हैं। हरियाणा में पहले ही इजराइल की मदद से एक कृषि फॉर्म में 65 प्रतिशत कम पानी खर्च करके उपज 10 गुना बढ़ाने में सफलता हासिल की।

5- जल प्रबंधन क्षेत्र में सहयोग- जल प्रबंधन पूरी दुनिया के लिए समस्या बना हुआ है। 125 करोड़ से ज्यादा आबादी वाली कृषि प्रधान देश में पीने और सिंचाई दोनों के लिए पानी की जरूरत हमेशा बनी रहती है। जल प्रबंधन के क्षेत्र में इजराइल काफी विकसित है इसलिए इस क्षेत्र में वो भारत के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है। पीएम नरेंद्र मोदी के दौरे में जल प्रबंधन से जुड़े समझौते होने की पूरी उम्मीद है। 28 जून 2017 को केंद्रीय कैबिनेट ने इजराइल के साथ “नेशनल कैंपेन फॉर वाटर कंजरवेशन इन इंडिया” पर परस्पर सहयोग पत्र (एमओयू) को मंजूरी दी। साल 2016-17 में दोनों देशों के बीच 33 हजार करोड़ रुपये का परस्पर कारोबार हुआ। उम्मीद है कि पीएम मोदी के दौरे में ये कारोबार और बढ़ेगा।
6-मुंबई हमले में जीवित बचे इजरायली बच्चे से भी मिलेंगे मोदी
प्रधानमंत्री मोदी मुंबई पर हुए 26/11 के आतंकी हमलों में जीवित बचे इजरायली बच्चे मोशा से भी मिलेंगे। उस वक्त यह बच्चा महज 2 साल का था, जब 2008 में लश्कर के आतंकियों ने मुंबई के नरीमन हाउस पर हमला करके उसके माता-पिता रिवका और गैबरियल होल्ट्जबर्ग समेत 6 लोगों को मार डाला था। बच्चे मोशा की जान भारतीय आया सैंड्रा ने बचाई थी, जो मौके से बचकर निकलने में कामयाब हुई थी। दोनों बाद में इजरायल चले आए और अब मोशा के दादा-दादी के साथ रहते हैं। बता दें कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई दोनों ही देशों के साझा अजेंडे में शामिल है।





Recent Comments