*पुलिस से पब्लिक नहीं, गुंडे डरें:-भागलपुर डीआईजी विकास वैभव*
संजय कुमार सुमन
सम्पादक@दैनिक खोज खबर
मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया…मजरूह सुल्तानपुरी के ये वाक्य डीआईजी विकास वैभव पर सटीक बैठती है। अपने कर्तव्य के प्रति सजग और देश के ऐतिहासिक और पौराणिक विरासत पर गहन शोध करने वाले वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और भागलपुर रेंज के डीआईजी विकास वैभव ने इलाके में अपराध के ग्राफ को शून्य करने की ठान ली है।

उनके चल रहे इस अनवरत प्रयास का असर भागलपुर में दिखने लगा है। इसी क्रम में डीआईजी विकास वैभव ने कर्तव्य में लापरवाही और केस की सही जांच ना करने के आरोप में आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। डीआईजी विकास वैभव के पास रिकार्ड संख्या में पीड़ित लोग पहुंच रहे हैं। कोई दबंगों से परेशान थे, तो कोई पुलिस की नाइंसाफी से, कई लोगों को स्थानीय रंगदार तंग कर रहे थे, तो कई लोगों के केस की जांच ठीक ढंग से नहीं चल रही थी, लेकिन अब उन्हें विश्वास है कि अब उनकी सारी समस्यायें दूर होंगी और त्वरित कार्रवाई की जायेगी।पीड़ितों की मानें तो उन्हें पता चला है कि भागलपुर में कोई पुलिस के बड़े साहब आये हैं, वहां जाने से इंसाफ भी मिलता है और सुनवाई भी होती है। भागलपुर के समाजसेवी कहते हैं कि एक पुलिस पदाधिकारी के लिए पीड़ितों के मन में इस प्रकार के विचार, पुलिस महकमे के साथ-साथ डीआईजी विकास वैभव के लिए बड़े सम्मान की बात है।

हाल में भागलपुर में डीआईजी के पद पर पदस्थापित हुए वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी विकास वैभव ने मात्र कुछ ही दिनों में आम लोगों के दिलों में एक बड़ी छाप छोड़ी है। उन्होंने संबंधित थानों और अधिकारियों को अपने कर्तव्य के प्रति सदैव सजग रहने और लापरवाही ना बरतने की स्पष्ट चेतावनी दे दी है। जानकारी के मुताबिक, निलंबित सभी पुलिसकर्मियों को पहले विकास वैभव की ओर से चेतावनी जारी की गयी थी। उन्हें चेताया गया था कि वह मामले को हल्के में ना लें और अपने ड्यूटी को अच्छी तरह से अंजाम दें।
स्थानीय लोगों में उत्साह
स्थानीय लोगों की मानें तो विकास वैभव के भागलपुर रेंज का डीआईजी बनने के बाद इलाके के अपराधियों में दहशत है।
वैभव की ओर से पुलिस अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि इलाके में रंगदारी और क्राइम की घटना को कतई बरदाश्त नहीं किया जायेगा। उन्होंने अपने कार्यालय में इलाके के अधिकारियों के साथ बैठक की और सख्त निर्देश जारी किया। बैठक में सभी थानेदारों को चेताया गया कि यदि वह अपने कर्तव्य का पालन सही तरीके से नहीं करते हैं, तो उन पर कार्रवाई की जायेगी। किसी भी हाल में लापरवाही बरदाश्त नहीं की जायेगी। इसके लिए आप तैयार रहें। इतनी कार्रवाईयों के बाद भी आपकी लगातार शिकायतें आ रही है। उन्होंने थानेदारों को कहा है कि वे अपनी कार्यशैली में सुधार लाएं। अभी संभलने का मौका दिया जा रहा है।
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थानेदारों को लगायी फटकार
थानेदारों को कड़ी फटकार लगाते हुए डीआइजी ने कहा कि पदभार ग्रहण करने के साथ ही उन्होंने पत्र जारी किया। जिसमे पाच बिंदुओं पर काम करने का निर्देश दिया गया था। उन्होंने कहा कि थानेदारों को जनहित के कार्य में दो कदम बढ़ कर पहल करनी चाहिए। डीआईजी ने कहा कि थानेदार और थाने के अफसर निष्पक्ष होकर काम करें। किसी से प्रभावित होकर या लापरवाहीपूर्वक काम करने की शिकायत मिलेगी तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसी पीड़ित को यदि वरीय अधिकारी आपके पास भेजते हैं तो उसपर संज्ञान लेकर तुरंत बात सुनिए।
पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए रहें प्रतिबद्ध
डीआइजी ने कहा कि हो सकता है कि कई मामलों में लोग झूठ बोलकर मामला दर्ज कराने आए। मगर इस परिस्थिति में भी घटना की सच्चाई पता करके रिपोर्ट तैयार कीजिए ताकि झूठे लोगों को बोलने को किसी तरह का मौका नहीं मिले। उन्होंने कहा कि आपको पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध होना चाहिए। उन्होंने डीएसपी को भी थाने की मॉनिटरिंग करने का निर्देश दिया।
थानों में बढ़ेगी तो कोर्ट में घटेगी केस की संख्या
उन्होंने कहा कि लोग कोर्ट में नालिसी की संख्या में काफी कमी आयी होगी। जब थाने में पीड़ित को इंसाफ नहीं मिलता है तब वे न्यायालय की शरण में जाते हैं। थानेदारों ने अपनी समस्या बताते हुए कहा कि सभी थाने में दो-तीन गुना केस बढ़ गया है। इस पर उन्होंने कहा कि जल्द सब कुछ ठीक हो जाएगा। बैठक में सिटी डीसपी शहरयार अख्तर, डीएसपी विधि व्यवस्था राजेश सिंह प्रभाकर और डीएसपी कहलगाव रामानंद कौशल के अलावा इंस्पेक्टर व थानेदार उपस्थित थे।
पुलिसकर्मी सस्पेंड
जानकारी के मुताबिक डीआईजी विकास वैभव काफी गुस्से में हैं। उनका गुस्सा सही भी है। अपराध का ग्राफ जो बढ़ता जा रहा है। डीआईजी विकास वैभव ने काम में लापरवाही, सही से केस की जांच न करने और पक्षपात के आरोप में 8 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया। पुलिसकर्मी अपनी करनी की वजह से नप गए। पहले भी डीआईजी ने कार्रवाई के लिए चेताया था। नहीं मानें तो लपेट दिया।अब इंक्वायरी होगी ।निलबंन के बाद तीन को जिला बदर कर दिया गया है। सबसे पहले डीआईजी ने सबौर थानेदार नीरज कुमार तिवारी को निलंबित किया। उसके बाद 15 मई को नाथनगर थाने के दारोगा विकास कुमार को निलंबित किया। 18 मई को ललमटिया थाना प्रभारी रीता कुमारी और थाने के एएसआई मुकेश कुमार सिंह को निलंबित किया। 22 मई को बांका के सिर्किल इंस्पेक्टर महबूब आलम को निलंबित किया गया और 27 मई को बबरगंज थाना प्रभारी राजेश कुमार, जगदीशपुर के एएसआई बीरेन्द्र कुमार और सिपाही पुरुषोत्तम कुमार को निलंबित किया गया है। विकास वैभव ने इलाके में आते ही इशारों ही इशारों में उन अपराधियों को भी कड़ा संदेश दिया है, जो इलाके में अपराध की घटनाओं को अंजाम देते हैं। खासकर स्थानीय लोगों में डीआईजी के त्वरित एक्शन लेने से काफी खुशी है।स्थानीय लोगों का कहना है कि भागलपुर में ऐसे ही पदाधिकारी की जरूरत थी।डीआईजी ने अपने मातहतों को एक पत्र जारी कर पांच विशेष बिंदुओं पर काम करने की सलाह दी है।डीआईजी ने किसी भी प्रकार की छोटी भी लापरवाही को बरदाश्त नहीं करने की चेतावनी दी है।





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