द्वापर युग की गिर गाय के दर्शन के लिए सोनपुर थाने में पहुंचते है लोग

सोनपुर –हरिहर क्षेत्र की पावन भूमि पर एक अद्भुत गाय की चर्चा हर किसी की जुबान पर है हो भी क्यों नहीं जिस गाय के चर्चा द्वापर युग में भी हुई हो वह गाय अगर यहां उपलब्ध है तो उसके दर्शन से हर लोग कृतार्थ होना चाहते हैं । धार्मिक रूप से भी इस गाय की चर्चा हो रही है कारण की इस गाय  के  मस्तक पर भोले भंडारी भगवान शंकर के त्रिशूल की छाप नजर आती है सोनपुर थाने में पदस्थापित पुलिस इंस्पेक्टर दयानंद सिंह ने इसे अपने कार्यकाल के दौरान बक्सर  में खरीदा था बक्सर भी धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है बताया जाता है कि गिर नस्ल की गाय विरले ही मिलती है ।  इसके कई आयुर्वेदिक औषधिय गुण भी हैं । इसके मूत्र के सेवन से कैंसर जैसी असाध्य बीमारी के प्रकोप को भी कम तथा समाप्त किया जा सकता है  ऐसा चिकित्सक भी बताते हैं । इस गाय को देखने के लिए सारण जिले से ही नहीं अपितु दूसरे जिलों से भी लोग सोनपुर थाना पहुंच रहे हैं । गौ सेवा के पवित्र उद्देश्य से पाले गय।  इस गाय को सारण के पुलिस अधीक्षक हर किशोर राय समेत कई वरीय पुलिस पदाधिकारी देख चुके हैं ।  यहां की आम जनता तो इस गाय के दर्शन से अपने को सौभाग्यशाली मानती है ।

भारत के लोगों के रग-रग में गौमाता बसती हैं. प्रत्येक हिन्दू परिवार में गौ पूजा को महत्व है.गौमाता के कारण ही हमारी सनातन संस्कृति का डंका विश्व में बजता है.वह व्यक्ति सौभाग्यशाली है जिसे गौमाता की सेवा करने का मौका मिलता है.गिर गाय के दूध अमृत के समान है.-
आचार्य शुशील चन्द्र शास्त्री
पुजारी हरिहर नाथ मंदिर सोनपुर

गाय के महत्व को वही समझता है जिसका मन पावन,निर्मल,विचार अच्छे होते हैं.त्रिगुण,सत्व, रज,तमा-रहित चित और बुद्धि गुणातीत हो जाय तो गोपदार्थ की महत्ता को जाना जा सकता है. जिसने हमारे प्रति किंचित भी उपकार किया है उसके प्रति सदा कृतज्ञ रहना,यही सनातन धर्म है.भगवान की सृष्टि में गौमाता के जैसा कोई कृतज्ञ प्राणी नहीं है.संपूर्ण ब्रह्माण्ड पर गाय का जो उपकार है उसका वर्णन नहीं किया जा सकता.-
संत विष्णु दास उदासीन मौनी बाबा
लोक सेवा आश्रम सोनपुर सारण