लगातार बढ़ रही जनसंख्या के कारण पैदा हूआ पूरे विश्व में संकट

छपरा (सारण)। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश प्रवक्ता प्रमोद सिंह टुन्ना ने कहा कि वर्तमान समय में कोविड-19 महामारी दूनिया भर में सभी के लिए एक गंभीर खतरा बन चूका है।भारत समेत विश्व में फैले संक्रमण से उच्च जनसंख्या घनत्व के कारण परिणाम भयावह होंगे।अक्सर,भीड़-भाड़ की स्थिति में रहने वाले गरीबों के पास सोशल डिस्टेंसिंग,सामाजिक भेद और हाथ धोने के विकल्पों का अभाव होता है।उन्होंने कहा कि पूरे दक्षिण एसिया के शहरों में,जहां भी कोरोना के रिकार्ड किए गएमरीजों की संख्या बढ़ रही है।कारखानों और ब्यवसायों को बंद कर दिया गया है और श्रमिकों को अलग रखना शुरु कर दिया गया है।इन शहरी श्रमिकों में से अधिकांश ग्रामीण प्रवासी हैं।जो अब यात्रा प्रतिबंधों के कारण अपने घर लौटने में कठिनाईयों का सामना कर रहें है।अनिश्चित आर्थिक स्थिति में रहने वाले लोग,जो पहले से ही दैनिक काम खोजने के लिए संघर्ष कर रहे थे।अपने परिवारों के भविष्य और सुरक्षा के विषय में चिंतित और अनिश्चत हैं।जैसे-जैसे संक्रमण शहरों से गांवों की तरफ बढ़ रहा है वैसे ही कृषि श्रमिकों,छोटे और सीमांत किसानों,मनरेगा मजदूरों,बृद्धावस्था तथा दिब्यांग पेंशनभोगी,बिधवाओं तथा झूग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों,कचरा बीनने वाले तथा बेघरों एवं ऐसे ही अनय कमजोर वर्ग के लोगों में संक्रमण बड़ी तेजी से फैलता है।लाक डाउन के बीच घरेलू दूर्रब्यवहार और महिलाओं के खिलाफ हिंसा की खबरें भी सामने आ रही है।
श्री टुन्ना ने कहा कि देश का सार्वजनिक स्वास्थ्य ढ़ांचा पहले ही से जर्जर है।इन सेवाओं के निजीकरण की अनुमति देने के लिए वर्षों से अधिकांश सरकारों ने नव-आर्थिक नीतियों को लागू किया है।सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सरकारी खर्च में भारी कटौती कोविड -19 जैसे नीतिगत निर्णयों के विनाशकारी परिणामों को उजागर करता है। कोविड -19 संकट ने हमें यह भी दिखाया है कि कृषि औद्योगिक खाद्य प्रणाली और कारपोरेट खाद्य ब्यवस्था हमारे खाद्य प्रणालियों की वैश्विक महामारियों की भेदता को कैसे बढ़ाती है।इस संकट ने दूनिया भर के खाद्य आपूर्ति को खतरे में डाल दिया है।लेकिन,यह वह खाद्य आपूर्ति है जो लंबी दूरी और अंतर्राष्ट्रीय ब्यापार पर आधारित है।इसके अलावा वैज्ञानिकों ने यह दस्तावेज बनाना शुरु कर दिया है कि कैसे कृषि विशाक्त पदार्थों और मिट्टी के औद्योगिक उत्पादन से मिट्टी को नूकसान नये महामारी के खतरे को बढ़ाता है।बर्ड फ्लू,स्वाईन और पागल गाय की बीमारी के कारण दूनिया भर में किसान पहले से ही जानवरों के बड़े पैमाने पर शिकार से पीड़ित है।कोविड -19 महामारी एक अंतिम बैकप काल होनी चाहिए।कृषि-औद्योगिक खाद्य प्रणाली वैश्विक स्वास्थ्य के लिए खतरनाक है।इसे किसान कृषि विज्ञान पर केन्द्रित खाद्य प्रणाली के साथ बदलने का समय है।




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