
सिवान /(✍️राष्ट्रवादी धनंजय सिंह तोमर के फेसबुक वॉल से) : सावला मलीन चेहरा, दुबला कद काठी, चेहरे पर चिन्तन के साथ सरलता की आभा, आज के भौतिकता से कोसों दूर, मुख्यतः कुर्ता पैजामा चप्पल पहने और कांधे पर झोला लिए यह युवा दिख जाएगा। यह युवा कोई आम युवा नही है अति साधारण सा दिखने वाला यह युवा दरौंधा में निर्दलीय प्रत्याशी के प्रचंड जीत के सूत्रधार में से एक है। नवनिर्वाचित विधायक के साथ खड़े युवक नाम है संदीप गिरी । गिरी जी को उनके जानने वाले कई नामों से पुकारते है जैसे संत जी, बाबा, गिरी बाबा, देवता और महराज । जहाँ के के भौतिकवादी युग मे युवा फैशन और आधुनिकता के तरफ आकर्षित हो चकाचौंध भरी दुनिया मे जीने की इक्षा रखते है वही यह साधारण सा दिखने वाला असाधारण व्यक्तित्व में अवतरित संदीप गिरी वाकई में मिसाल है। साधारण व्यक्तित्व में असाधारण क्षमता वाला यह युवा समसामयिक सूत्रधार है ।
इनके बात करने का तरीका और जुबान से मधु रूपी टपके शब्द आपको अवश्य की अपना कायल बना लेगा। धर्म, राष्ट्र और संस्कृति को अपना जीवन अर्पित करने वाले गिरी जी दरौंधा से प्रचंड जीत के प्रमुख चेहरा में से एक है। संघ , और संस्कृति संबंधित कई संस्थाओ से जुड़े गिरी जी नवनिर्वाचित विधायक कर्णजीत सिंह उर्फ व्यास सिंह के प्रमुख सलाहकारों में से एक है जो पूर्व से ही दरौंधा के मतदाताओं के नब्ज टटोल अंदर मची आंतरिक विद्रोह को चिन्हित कर लिया और पुरजोर तरीक़े से व्यास सिंह को मैदान में डटे रहने का सलाह देते रहे।
कौटिल्य चाणक्य, अरस्तु और निकोलो मेकियावेली को तो हम लोगों ने नहीं देखा लेकिन संदीप गिरी को देखकर लगता है कि अवश्य ही वह लोग भी ऐसे ही राजनीतिक रणनीतिकार होंगे जिन्होंने राजनीतिक और राजनीतिक में नए चेहरे को स्थापित कर अपनी रणनीति से राजनीतिक हवा का रुख मोड़ दिया होगा और एक नई परिभाषा गढ़ दुनिया को नया संदेश दिया होगा।
आजीवन मां भारती को अपना जीवन समर्पित करने वाले संदीप गिरी ब्रह्मचर्य का प्राण ले चुके हैं भारत और भारत के संस्कृति के पुनरुत्थान के लिए अपने जीवन को समर्पित कर देना ही एकमात्र लक्ष्य लिए यह युवा भविष्य में अवश्य ही एक बड़ा चेहरा बनेगा । व्यास सिंह के समर्थकों और उनके साथ देने वाले करीबी कहते हैं कि माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास राजनीति रणनीतिकार प्रशांत किशोर है तो व्यास सिंह के पास संदीप गिरी हैं। श्री गिरी अपने कर्मठता और लगन लिए दरौंधा क्षेत्र के सभी गांव और बस्तियों में पूरी तन्मयता के साथ चुनाव भर डटे रहे और चुनाव जीतने के बाद फिर यह रणनीतिकार चेहरा पर्दे के पीछे गुमनाम हो जाएगा ।




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